अध्यात्म

Raja Sankranti (रज संक्रांति) 2025: झूले, पीठा और श्रृंगार से भरा रज पर्व – कैसे मनाते हैं ओडिशा के लोग ये पारंपरिक उत्सव

Raja Sankranti 2025 Date, Images, Photo: राजा संक्रांति, जिसे रज पर्व के नाम से भी जाना जाता है, ओडिशा का एक प्रमुख और पारंपरिक त्योहार है, जो तीन दिनों तक बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से भगवान विष्णु की पत्नी भूमा देवी की अराधना को समर्पित है। मान्यता है कि इस दौरान पृथ्वी माता रजस्वला होती हैं, इसलिए इस अवधि को प्रकृति और स्त्री शक्ति का उत्सव माना जाता है। यह त्योहार ओडिशा की संस्कृति और सामाजिक एकता को दर्शाता है।

Image

Raja Sankranti 2025

Raja Sankranti 2025 Date, Images, Photo: राजा संक्रांति आमतौर पर ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को शुरू होता है और तीन दिनों तक चलता है। 2025 में यह पर्व 14 जून को शुरू होगा और 16 जून तक मनाया जाएगा। पहले दिन को 'पहिली राजा' कहते हैं, दूसरा दिन 'राजा संक्रांति' और तीसरा दिन 'भू-दौ' या 'वसुमती स्नान' कहलाता है। इस दौरान खेती-बाड़ी का काम बंद रहता है, क्योंकि यह समय पृथ्वी को विश्राम देने का माना जाता है। चलिए जानते हैं इस पर्व के बारे में खास बातें।

रज पर्व या राजा संक्रांति क्या है?

रज पर्व ओडिशा का एक पारंपरिक और खास त्योहार है, जो मुख्यतः लड़कियों और महिलाओं से जुड़ा होता है। यह तीन दिनों तक मनाया जाता है, और इन तीन दिनों में प्रकृति, धरती माता और नारी शक्ति का सम्मान किया जाता है। त्योहार की शुरुआत से एक दिन पहले 'सजबाज' होता है, जिसमें तैयारियां शुरू हो जाती हैं। पहले दिन को 'पहिली रज', दूसरे दिन को 'मिथुन संक्रांति' और तीसरे दिन को 'भू दाह' या 'बसी रज' कहा जाता है।

रज संक्रांति 2025

रज संक्रांति 2025

इस पर्व में अविवाहित लड़कियों के लिए विशेष महत्व होता है। वे अच्छे कपड़े पहनती हैं, सजती-संवरती हैं और पारंपरिक व्यंजन जैसे पोड़ा पीठा खाती हैं। इस दौरान वे नंगे पांव चलने से बचती हैं और झूले पर झूलना बहुत शुभ माना जाता है। घरों के आंगनों या पेड़ों की डालियों पर रस्सियों के झूले बांधकर झूलने की परंपरा इस पर्व की सबसे खास पहचान है। रज पर्व के दौरान कोई भी ऐसा काम नहीं किया जाता जिसमें जमीन की खुदाई हो – जैसे खेती, निर्माण या खुदाई आदि। इसका उद्देश्य धरती माता को आराम देना होता है। यह मान्यता है कि जैसे महिलाओं को मासिक धर्म के समय आराम की आवश्यकता होती है, वैसे ही धरती मां को भी विश्राम मिलना चाहिए।

राजा संक्रांति की कहानी (Raja Sankranti Ki Katha)

रज पर्व के पीछे एक सुंदर और गहराई से जुड़ी हुई पौराणिक मान्यता है। कहा जाता है कि इस दौरान धरती माता यानी देवी पृथ्वी, जो भगवान विष्णु की पत्नी 'भूमा देवी' के रूप में जानी जाती हैं, मासिक धर्म (रजस्वला) से गुजरती हैं। ओड़िया भाषा में ‘रज’ शब्द का अर्थ होता है मासिक धर्म, और यह शब्द 'रजस्वला' से निकला है, जिसका मतलब होता है – मासिक धर्म वाली महिला। रज पर्व, स्त्री के इसी प्राकृतिक चक्र को न सिर्फ मान्यता देता है, बल्कि उसे सम्मान और उत्सव का रूप भी देता है।

Laveena Sharma
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

और पढ़ें
End of Article