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बच्चों की खुशी का राज महंगे खिलौने नहीं, एक्सपर्ट ने बताई ये जरूरी आदत

Parenting Tips: बच्चों की खुशी सिर्फ अच्छे स्कूल, महंगे खिलौनों या सुविधाओं से नहीं आती। असली खुशी तब मिलती है जब बच्चे खुद को प्यार, सम्मान और समझ मिलने वाला महसूस करते हैं।

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बच्चों की खुशी का राज

Parenting Tips: आज के समय में बच्चों की परवरिश करना पहले से कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गया है। बदलती दुनिया और सोशल मीडिया के दौर में हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा खुश भी रहे और जीवन में सफल भी हो। लेकिन सवाल यह है कि आखिर खुश बच्चों (Happy Child Traits) की सबसे बड़ी खासियत क्या होती है? पेरेंटिंग एक्सपर्ट पूरवा के अनुसार, खुश बच्चे हमेशा सबसे ज्यादा होशियार या प्रतिभाशाली नहीं होते, बल्कि उनके जीवन में एक ऐसा इंसान जरूर होता है जो उन्हें समझता है, उनकी बात सुनता है और उन्हें वैसे ही स्वीकार करता है जैसे वे हैं।

बच्चों को चाहिए ऐसा इंसान जो उन्हें समझ सके

पूरवा ने बताया कि उन्होंने 25 साल से ज्यादा समय तक बच्चों के साथ काम किया है और इस दौरान उन्होंने देखा कि खुश बच्चों के पीछे अक्सर एक ऐसा बड़ा व्यक्ति होता है, जिससे वे अपने दिल की बात खुलकर कह सकते हैं। बच्चों को सिर्फ उनकी तारीफ सुनने की जरूरत नहीं होती, बल्कि उन्हें यह महसूस होना चाहिए कि कोई उनकी भावनाओं को समझता है। जब माता-पिता बच्चों की बात ध्यान से सुनते हैं, उनके सवालों का जवाब देते हैं और उन्हें समय देते हैं, तो इससे बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है।

बच्चों को दें प्यार और भरोसे का माहौल

पेरेंटिंग एक्सपर्ट का कहना है कि माता-पिता को बच्चों के लिए एक ऐसा माहौल बनाना चाहिए जहां वे बिना डर के अपनी बातें शेयर कर सकें। इसके लिए रोजाना ज्यादा समय निकालना जरूरी नहीं है। अगर माता-पिता अपने व्यस्त दिन में से सिर्फ 15 मिनट भी बच्चों के साथ बैठकर उनकी बातें सुनें, उनके दिन के बारे में पूछें और उनकी भावनाओं को समझें, तो इसका बहुत अच्छा असर पड़ता है। बच्चों को यह महसूस होना चाहिए कि उनका महत्व सिर्फ उनकी पढ़ाई, नंबर या उपलब्धियों से नहीं है, बल्कि वे खुद भी उतने ही खास हैं।

बच्चों की गलतियों पर डांट नहीं, समझ की जरूरत

बच्चे गलतियां करके ही सीखते हैं। ऐसे में माता-पिता को हर गलती पर आलोचना करने की बजाय बच्चों को समझाने की कोशिश करनी चाहिए। जब बच्चों को अपने माता-पिता से भावनात्मक सहारा मिलता है, तो वे ज्यादा आत्मविश्वासी बनते हैं और अपनी परेशानियों का सामना बेहतर तरीके से कर पाते हैं।

बच्चों से बातचीत करना है बेहद जरूरी

आज कई परिवारों में माता-पिता और बच्चों के बीच बातचीत कम होती जा रही है। व्यस्त जीवनशैली के कारण बच्चे कई बार अपनी परेशानियां मन में ही रख लेते हैं। इसलिए जरूरी है कि माता-पिता बच्चों के साथ दोस्त की तरह बातचीत करें। उनसे उनकी परेशानियों, पसंद-नापसंद और भावनाओं के बारे में पूछें। खुलकर बातचीत करने से बच्चों और माता-पिता के बीच रिश्ता मजबूत होता है।

prabhat sharma
प्रभात शर्माauthor

प्रभात शर्मा टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के फीचर डेस्क में कार्यरत ट्रैवल और लाइफस्टाइल राइटर हैं। यात्राओं के प्रति उनका गहरा जुनून और नई जगहों को समझने–परखने की क्षमता उनकी लेखन शैली को बेहद जीवंत और पाठकों से जोड़ने वाली बनाती है। वे ऑफबीट डेस्टिनेशन, लोकल कल्चर, हेरिटेज साइट्स, रोड ट्रिप्स, फूड जर्नी और बजट ट्रैवल जैसे विषयों पर मजबूत पकड़ रखते हैं। प्रभात की स्टोरीज़ सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि यात्रा के माहौल, भाव और अनुभव को भी महसूस कराती हैं। अब तक 7,000 से अधिक कंटेंट लिख चुके प्रभात अपनी सहज भाषा, प्रामाणिक जानकारी और अनुभव-आधारित दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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