Jaya Parvati Vrat 2026 Start Today: हिन्दू धर्म में जया पार्वती व्रत का खास महत्व है, जिसका उपवास लगातार 5 दिनों तक रखा जाता है। इस दौरान देवों के देव महादेव की पत्नी माता पार्वती के जया रूप की पूजा की जाती है। ये व्रत अविवाहित कन्याएं और विवाहित महिलाएं दोनों रखती हैं। कुंवारी कन्याएं योग्य पति के लिए ये उपवास रखती हैं, जबकि पति की लंबी उम्र और खुशहाल वैवाहिक जीवन के लिए सुहागिन महिलाएं जया पार्वती व्रत का कठिन अनुष्ठान करती हैं। आज यहां पर आप जया पार्वती व्रत से जुड़ी हर जरूरी जानकारी के बारे में जानेंगे।
जया पार्वती व्रत 2026 की तिथि
पंचांग के अनुसार, हर साल जया पार्वती व्रत यानी विजया पार्वती व्रत का आरंभ आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि से होता है। इस बार त्रयोदशी तिथि का आरंभ कल 26 जुलाई 2026 को दोपहर 01 बजकर 57 मिनट पर हुआ है, जिसका समापन आज 27 जुलाई 2026 को दोपहर 04 बजकर 14 मिनट पर होगा। ऐसे में आज 27 जुलाई 2026, सोमवार से ही जया पार्वती व्रत शुरू हुआ है।
जया पार्वती व्रत की पूजा के शुभ मुहूर्त
| शुभ मुहूर्त के नाम | समय सीमा |
| ब्रह्म मुहूर्त | सुबह 04:16 बजे से 04:58 बजे तक |
| प्रातः संध्या | सुबह 04:37 बजे से 05:40 बजे तक |
| अभिजित मुहूर्त | दोपहर 12:00 बजे से 12:55 बजे तक |
| विजय मुहूर्त | दोपहर 02:43 बजे से 03:38 बजे तक |
| गोधूलि मुहूर्त | शाम 07:15 बजे से 07:36 बजे तक |
| सायाह्न संध्या | शाम 07:15 बजे से 08:18 बजे तक |
| निशिता मुहूर्त | रात्रि 12:07 बजे से 12:49 बजे तक (28 जुलाई) |
| जया पार्वती प्रदोष पूजा मुहूर्त | शाम 07:15 बजे से रात 09:20 बजे तक |
जया पार्वती व्रत की पूजा विधि
आज सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि कार्य करने के बाद शुद्ध कपड़े धारण करें। फिर घर के मंदिर में एक छोटे पात्र में पानी में ज्वार और गेहूं के दाने बोएं। पात्र के ऊपर 3 या 7 बार कलावा लपेटें, जिसे कुमकुम से पहले रंग लें। लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां पार्वती और शिव जी की मूर्ति स्थापित करें। हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें। देवी-देवताओं को जल, चंदन, अक्षत, वस्त्र, श्रृंगार का सामान, फल, फूल और मिठाई अर्पित करें। घी का दीपक जलाने के बाद 'ऊं शिवाय नम:' और 'ऊं पार्वतीपतये नम:' मंत्र का 11 बार जाप करें। जया पार्वती व्रत की कथा पढ़ने के बाद आरती करके पूजा का समापन करें।
बता दें कि 5 दिनों तक रोजाना पात्र और शिव-पार्वती जी की पूजा की जाती है, जबकि अंतिम दिन ज्वार और गेहूं को मिट्टी सहित निकालकर किसी पवित्र नदी में विसर्जित किया जाता है। इसके बाद सात्विक भोजन करके 5 दिनों के व्रत का समापन करना होता है।
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जया पार्वती व्रत के नियम
- व्रत के प्रत्येक दिन ज्वार, गेहूं और शिव-पार्वती जी की पूजा करें।
- पांच दिनों में आप केवल फल, दूध, दही, फलों का जूस और दूध से बनी चीजों का सेवन सकते हैं।
- जया पार्वती व्रत के दौरान नमक वाला भोजन नहीं किया जाता है।
- 5 दिनों तक अनाज नहीं खाना चाहिए।
- इन दिनों सभी प्रकार की सब्जियों के सेवन से बचें।
- दोपहर के समय सोने से बचें।
- बाल और नाखून न काटें।
- नकारात्मक चीजों को अपने ऊपर हावी न होने दें।
- 5वें दिन रात में सोने की जगह जागरण करें।
जया पार्वती व्रत की समापन तिथि
जया पार्वती व्रत का समापन हर साल आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि पर होता है। इस बार 31 जुलाई 2026 को जया पार्वती व्रत का समापन होगा, लेकिन 5 दिनों के व्रत का पारण 1 अगस्त 2026 को किया जाएगा। बता दें कि जया पार्वती व्रत को लगातार पांच, सात, नौ या ग्यारह वर्षों तक करना होता है, जबकि अधिकतम बीस वर्षों तक करने का नियम है।
