अगर आप भी पहली बार निवेश करने जा रहे हैं और चाहते हैं कि आपका पैसा सुरक्षित रहे साथ ही उस पर निश्चित रिटर्न भी मिले तो फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड की तरह इसमें बाजार के उतार-चढ़ाव का असर नहीं पड़ता। यही वजह है कि निवेश की शुरुआत करने वाले लोगों के बीच FD सबसे लोकप्रिय विकल्पों में से एक मानी जाती है। आइए एफडी को लेकर सभी जरूरी बातों पर एक नजर डाल लेते हैं-
क्या होती है फिक्स्ड डिपॉजिट?
फिक्स्ड डिपॉजिट एक ऐसी निवेश योजना है, जिसमें आप एक निश्चित राशि को तय अवधि के लिए बैंक या वित्तीय संस्थान में जमा करते हैं। निवेश करते समय ही ब्याज दर तय हो जाती है और पूरी अवधि के दौरान वही दर लागू रहती है। मैच्योरिटी पूरी होने पर आपको मूलधन के साथ ब्याज भी मिल जाता है। यही निश्चितता इसे कम जोखिम वाला निवेश बनाती है।
FD कैसे काम करती है?
FD में निवेश करते समय तीन फैक्टर बेहद अहम होते हैं- निवेश की राशि, निवेश की अवधि (टेन्योर) और ब्याज भुगतान का विकल्प। इसके आधार पर ही आपकी FD पर मिलने वाला रिटर्न तय होता है। कई संस्थान मासिक, तिमाही या वार्षिक ब्याज भुगतान का विकल्प भी देते हैं, जबकि कुछ योजनाओं में पूरा ब्याज मैच्योरिटी के समय मिलता है।
कितनी तरह की होती है FD
हालांकि, निवेश से पहले आपको यह भी समझना होगा कि एफडी दो तरह की होती है- पहली क्यूमुलेटिव एफडी और दूसरी नॉन-क्यूमुलेटिव एफडीक्यूमुलेटिव एफडी (Cumulative FD)
क्यूमुलेटिव एफडी में आपका फंड मैच्योरिटी तक लॉक हो जाता है। इसमें मिलने वाला ब्याज मूलधन में जुड़ता रहता है और मैच्योरिटी पर एक साथ पूरा भुगतान मिलता है। यह विकल्प उन लोगों के लिए बेहतर है जिन्हें भविष्य में बड़ी राशि की जरूरत होती है।
नॉन-क्यूमुलेटिव एफडी (Non-Cumulative FD)
नॉन-क्यूमुलेटिव एफडी में ब्याज मासिक, तिमाही, छमाही या वार्षिक आधार पर मिलता है। नियमित आय चाहने वाले निवेशकों के लिए यह विकल्प ज्यादा बेहतर माना जाता है। इसमें रेगुलर और पहले से तय इनकम का फायदा मिलता है।
सही अवधि चुनना क्यों जरूरी
FD की अवधि कुछ महीनों से लेकर कई वर्षों तक हो सकती है। अगर आपका लक्ष्य कम समय का है तो कम अवधि वाली FD चुन सकते हैं। वहीं, लंबे समय के लिए निवेश करने पर चक्रवृद्धि (Compound Interest) का लाभ अधिक मिल सकता है। इसलिए निवेश करने से पहले अपने वित्तीय लक्ष्य और जरूरतों को ध्यान में रखकर अवधि तय करनी चाहिए।
मैच्योरिटी राशि कैसे तय होती है?
FD से मिलने वाला कुल रिटर्न निवेश राशि, ब्याज दर, निवेश अवधि और कंपाउंडिंग की फ्रिक्वेंसी पर निर्भर करता है। इसके साथ ही, निवेश से पहले FD कैलकुलेटर का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे यह समझना आसान हो जाता है कि अलग-अलग अवधि और ब्याज दर पर आपको मैच्योरिटी के समय कितनी राशि मिलेगी।
