अध्यात्म

Radha Rani Ki Aarti: राधा रानी की आरती, राधा रानी तेरी आरती गाऊं, आरती श्री वृषभानुसुता की... देखें पूरे राधा अष्टमी की आरती के लिरिक्स

राधा रानी की आरती, Radha Ashtami Aarti, Radha Rani Ki Aarti In Hindi (आरती श्री वृषभानुसुता की आरती, राधारानी तेरी आरती गाऊं): राधा अष्टमी के खास दिन पर राधा जी की पूजा के बाद कथा और फिर आरती की जाती है। यहां राधा रानी की आरती के लिरिक्स मौजूद हैं।

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राधा रानी की आरती (pic credit: canva)

राधा रानी की आरती, Radha Ashtami Aarti, Radha Rani Ki Aarti In Hindi (राधी जी की आरती: आरती श्री वृषभानुसुता की आरती, राधारानी तेरी आरती गाऊं): राधा अष्टमी का शुभ त्योहार हर साल भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन राधा रानी की पूजा करने से श्रीकृष्ण का आशीर्वाद मिलता है। इस साल राधा अष्टमी 31 अगस्त यानी आज के दिन मनाई जा रही है। इस दिन पूजा-पाठ के बाद राधा रानी की आरती की जाती है और इसलिए यहां राधा रानी की आरती के लिरिक्स हिंदी में दिए गए हैं।

राधा रानी की आरती के लिरिक्स (Radha Rani Ki Aarti In Hindi)-

आरती श्री वृषभानुसुता की,

मंजुल मूर्ति मोहन ममता की ॥

त्रिविध तापयुत संसृति नाशिनि,

विमल विवेकविराग विकासिनि ।

पावन प्रभु पद प्रीति प्रकाशिनि,

सुन्दरतम छवि सुन्दरता की ॥

॥ आरती श्री वृषभानुसुता की..॥

मुनि मन मोहन मोहन मोहनि,

मधुर मनोहर मूरति सोहनि ।

अविरलप्रेम अमिय रस दोहनि,

प्रिय अति सदा सखी ललिता की ॥

॥ आरती श्री वृषभानुसुता की..॥

संतत सेव्य सत मुनि जनकी,

आकर अमित दिव्यगुन गनकी ।

आकर्षिणी कृष्ण तन मनकी,

अति अमूल्य सम्पति समता की ॥

॥ आरती श्री वृषभानुसुता की..॥

। आरती श्री वृषभानुसुता की ।

कृष्णात्मिका, कृष्ण सहचारिणि,

चिन्मयवृन्दा विपिन विहारिणि ।

जगजननि जग दुखनिवारिणि,

आदि अनादिशक्ति विभुता की ॥

॥ आरती श्री वृषभानुसुता की..॥

आरती श्री वृषभानुसुता की,

मंजुल मूर्ति मोहन ममता की ॥

Radha Rani Teri Aarti Gaun | Shree Radha Rani Aarti Full Lyrics (राधा अष्टमी पर श्रीजी की आरती लिखत में)-

राधारानी तेरी आरती गाऊँ,

भानु दुलारी तेरी आरती गाऊँ,

आरती गाऊँ मैं तो वारि वारि जाऊँ,

आरती गाऊँ तोपे वारि वारि जाऊँ॥

कीरत लाली तेरी आरती गाऊँ,

श्यामा प्यारी तेरी आरती गाऊँ,

आरती गाऊँ मैं तो वारि वारि जाऊँ,

आरती गाऊँ तोपे वारि वारि जाऊँ॥

बरसाने वाली तेरी आरती गाऊँ,

राधारानी तेरी आरती गाऊँ

बरसाने की ऊँची अटारी,

छवि श्यामा की लागे अति प्यारी,

श्रीजी छवि पे बलि बलि जाऊँ,

राधारानी तेरी आरती गाऊँ॥

लाडली तुम हो ब्रज की महारानी,

महिमा तुम्हरी जाये ना बखानी,

ब्रजधाम में वास मैं पाऊँ,

राधारानी तेरी आरती गाऊँ॥

कृष्ण हैं मिलते जिसके नाम से,

जपते हैं सब बड़े ही भाव से,

राधे राधे गा के तुमको मनाऊँ,

राधारानी तेरी आरती गाऊँ॥

राधा नाम की अर्जी लगाकर,

बरसाना मंदिर में आकर,

संतन संग राधा गुण गाऊँ,

राधारानी तेरी आरती गाऊँ॥

भोरी भोरी नवल किशोरी,

कारे कान्हा राधा गोरी,

चरणों में जिनके मैं शीश झुकाऊँ,

राधारानी तेरी आरती गाऊँ॥

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

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