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Pausha Putrada Ekadashi 2023 Date, Muhurat: पौष पुत्रदा एकादशी व्रत से होगी 2023 की शुरूआत, नोट करें डेट और मुहूर्त

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Dec 29, 2022, 02:46 PM IST

Pausha Putrada Ekadashi 2023 Date, Time, Puja Muhurat (पौष पुत्रदा एकादशी कब है 2023): पौष पुत्रदा एकादशी व्रत को लेकर मान्यता है कि इस व्रत को रखने से संतान प्राप्ति के योग बनते हैं। ऐसा माना जाता है कि व्रत रखने से संतान की हर संकट में रक्षा होती है। यहां जानें कब है जनवरी 2023 में पौष पुत्रदा एकादशी व्रत।

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Pausha Putrada Ekadashi 2023 Date, Muhurat: पौष पुत्रदा एकादशी व्रत से होगी 2023 की शुरूआत, नोट करें डेट और मुहूर्त

Pausha Putrada Ekadashi 2023 Date, Puja Muhurat: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का एक खास महत्व है। शास्त्रों के मुताबिक एकादशी को सभी व्रतों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। नए साल यानी 2023 की पहली एकादशी का व्रत जनवरी के पहले हफ्ते में ही है। इस एकादशी को पौष पुत्रदा एकादशी या वैकुंठ एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। आइए जानते हैं, इसकी तारीख और शुभ मुहूर्त की डिटेल।

when is Pausha Putrada Ekadashi in January 2023

हिंदू पंचांग के मुताबिक पौष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 1 जनवरी 2023 को रात 07 बजकर 11 मिनट से शुरू हो रही है। वहीं, 2 जनवरी 2023 को रात 08 बजकर 23 मिनट पर इसका समापन होगा। इस तरह उदयातिथि के मुताबिक 2 जनवरी को पौष पुत्रदा एकादशी व्रत मनाई जाएगी। वहीं पुत्रदा एकादशी का पारण 3 जनवरी की सुबह किया जाएगा।

Paush Putrada Ekadashi 2023 Puja Vidhi

पुत्रदा एकादशी के दिन सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त में उठकर नित्य कर्मों से निवृत्त होकर स्नान करें। इसके बाद विष्णु भगवान का स्मरण करते हुए व्रत के लिए संकल्प लें। अब पूजा स्थल पर भगवान के समक्ष घी का दीप प्रज्जवलित करें। इसके बाद भगवान को मौली, चंदन, जौ, तिल, जनेऊ, तुलसी, फूल, पंचामृत, गंगाजल इत्यादि अर्पित करें। इसके बाद भोग लगाकर अंत में आरती करके पूजा का समापन करें।

आपको बता दें कि पुत्रदा एकादशी का व्रत साल में दो बार रखा जाता है। पहला व्रत पौष महीने में होता है तो वहीं दूसरा व्रत सावन में मनाया जाता है। ये दोनों ही व्रत संतान की हर संकट में रक्षा करने वाले माने गए हैं। मान्यताओं के मुताबिक भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को व्रत के महत्व के बारे में बताया था। मान्यता है कि इस व्रत को रखने से संतान प्राप्ति के योग बनते हैं।

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