अध्यात्म

क्या है पास्ट लाइफ रिग्रेशन, क्या सच में पिछले जन्म तय करते हैं हमारा वर्तमान?

पास्ट लाइफ रिग्रेशन एक ऐसा विषय है जो हमारे अस्तित्व, कर्म और जीवन के गहरे रहस्यों को समझने की कोशिश करता है। चाहे आप इसे आध्यात्मिक सत्य मानें या मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया यह निश्चित रूप से आत्म- चिंतन और आत्म- विकास का एक शक्तिशाली माध्यम हो सकता है।

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पास्ट लाइफ रिग्रेशन (pc: youtube)

क्या सच में हम अपने पिछले जन्मों को जान सकते हैं? क्या आज हमारे जीवन में जो कुछ घट रहा है, उसका संबंध हमारे पूर्व जन्मों से है? ऐसे ही गहरे और जिज्ञासा से भरे सवालों के बीच पास्ट लाइफ रिग्रेशन एक ऐसा विषय है, जो आध्यात्म और मनोविज्ञान दोनों को जोड़ता है। यहां से आप इसके बारे में विस्तार में जान सकते हैं।

पास्ट लाइफ रिग्रेशन क्या है?

पास्ट लाइफ रिग्रेशन एक प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से व्यक्ति को उसके अवचेतन मन तक ले जाया जाता है। यह आमतौर पर हिप्नोटिक ट्रांस या गहरी ध्यान अवस्था (योग निद्रा जैसी स्थिति) के जरिए किया जाता है। इस अवस्था में व्यक्ति अपने उन अनुभवों तक पहुंच सकता है, जो उसकी वर्तमान स्मृति में नहीं होते, लेकिन अवचेतन में सुरक्षित रहते हैं। मान्यता यह है कि आत्मा कभी नष्ट नहीं होती वह केवल शरीर बदलती है। हर जन्म के अनुभव, भावनाएं और कर्म कारण शरीर में संग्रहित रहते हैं और अगले जन्म में भी उनका प्रभाव दिखाई देता है।

क्या यह प्रक्रिया आसान है?

विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रक्रिया पूरी तरह संभव है और कई लोगों ने इसका अनुभव किया है। हालांकि, हर व्यक्ति के लिए इसका अनुभव अलग हो सकता है। कुछ लोग आसानी से ट्रांस में चले जाते हैं, जबकि कुछ को अधिक समय और प्रयास लगता है। इसके दो प्रमुख तरीके बताए जाते हैं-

  • साधना आधारित तरीका – लंबा और गहरा अभ्यास
  • हिप्नोटिक तकनीक – प्रशिक्षित थेरेपिस्ट के माध्यम से अपेक्षाकृत आसान

क्या हमारे वर्तमान जीवन की समस्याएं पिछले जन्मों से जुड़ी हो सकती हैं?

इस प्रश्न का उत्तर पूरी तरह हां या नहीं में नहीं है। तीन संभावनाएं मानी जाती हैं-

  • पिछले जन्मों के कर्म
  • वर्तमान जीवन की गलतियां
  • पर्यावरणीय परिस्थितियां
उदाहरण के तौर पर, कुछ लोगों को बिना स्पष्ट कारण के शारीरिक या मानसिक समस्याएँ होती हैं। पास्ट लाइफ रिग्रेशन के अनुसार, यह उनके पूर्व जन्मों के कर्मों का परिणाम हो सकता है।

कर्म और उसके प्रभाव-

कर्म और उसका प्रभाव का एक सरल नियम बताया जाता है- जो दोगे, वही लौटकर आएगा। यदि किसी ने पूर्व जन्म में दूसरों को कष्ट दिया, तो संभव है कि उसे उसी प्रकार का कष्ट इस जीवन में अनुभव करना पड़े। इसी तरह, प्रेम, सम्मान और सेवा का फल भी सकारात्मक रूप में लौटता है।

अमीर और गरीब में जन्म का अंतर क्यों?

अमीर और गरीब में जन्म का अंतर जानने की कोशिश करें तो ये भी कर्म और सीख का परिणाम माना जाता है। कुछ आत्माएं सीखने के लिए कठिन परिस्थितियों में जन्म लेती हैं। कुछ अपने कर्मों का संतुलन करने आती हैं। कभी-कभी यह आत्मा की स्वयं की चुनी हुई चुनौतियां भी होती हैं।

सोल कॉन्ट्रैक्ट क्या होता है?

सोल कॉन्ट्रैक्ट एक प्रकार का आध्यात्मिक समझौता है, जो आत्मा अगले जन्म से पहले तय करती है। इसमें यह शामिल होता है कि उसे कौन-कौन सी चुनौतियाँ झेलनी हैं, किन रिश्तों से मिलना है और क्या सीखना है। यह आत्मा के विकास का हिस्सा माना जाता है।

रिश्तों और जीवन के पैटर्न-

कई बार जीवन में एक ही प्रकार की समस्या बार-बार आती हैं, जैसे रिश्तों में धोखा। इसे कर्मिक पैटर्न माना जाता है। जब तक व्यक्ति अपनी गलती को समझकर उसे स्वीकार नहीं करता, यह चक्र चलता रहता है। इसे तोड़ने के लिए जरूरी है कि अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करना, दूसरों को दोष देना बंद करना और माफी और क्षमा का अभ्यास करना।

डेज़ावू का रहस्य क्या है?

कभी-कभी हमें लगता है कि कोई घटना पहले भी हो चुकी है इसे डेजावू कहा जाता है। इसे पिछले जन्मों की स्मृतियों या अनुभवों से जोड़ा जाता है, जो अवचेतन में संग्रहित रहते हैं।

क्या आत्मा जानवर के रूप में भी जन्म ले सकती है?

कुछ आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह संभव है। आत्मा की प्रवृत्ति और इच्छाएं तय करती हैं कि अगला जन्म किस रूप में होगा।

आत्महत्या और अधूरी यात्रा-

जो लोग जीवन को बीच में ही समाप्त कर देते हैं, उनके बारे में माना जाता है कि उनकी आत्मा को तुरंत मुक्ति नहीं मिलती। उन्हें एक “लर्निंग पीरियड” से गुजरना पड़ता है। अगला जीवन अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है। जीवन को बेहतर बनाने के तीन सूत्र क्या हैं? इस सवाल के जवाब में जानें कि इसके तीन सरल लेकिन गहरे सिद्धांत दिए जाते हैं- पहला सिद्धांत माफी और स्वीकार्यता है यानी अपने पुराने कर्मों के लिए क्षमा मांगें और जीवन की चुनौतियों को स्वीकार करें। दूसरा सिद्धांत है, प्रार्थना और आत्म चिंतन- रोज कुछ समय अपने भीतर झांकने और ईश्वर से जुड़ने में लगाएं। वहीं, तीसरा सिद्धांत है कृतज्ञता, मतलब जो भी मिला है, उसके लिए धन्यवाद दें। शुक्राना का भाव जीवन को हल्का और सकारात्मक बनाता है।

Dr Rama Solanki
डॉ रमा सोलंकी author

डॉ. रमा सोलंकी टीवी और डिजिटल मीडिया में 17 वर्षों से अधिक अनुभव रखने वाली वरिष्ठ पत्रकार और मीडिया स्ट्रैटेजिस्ट हैं, जिन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित ... और देखें

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