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NEET पास करने के बाद भी इन वजहों से रद्द हो सकता है एडमिशन, छात्र गांठ बांध लें ये बातें

अगर आपको लगता है कि NEET यूजी परीक्षा पास करने से आपको एमबीबीएस में एडमिशन मिल जाएगा, तो ऐसा नहीं है। परीक्षा में टॉप करने के बाद भी आपका एडमिशन कई वजहों से रद्द किया जा सकता है। इसलिए छात्रों को सलाह है कि वह इन विशेष बातों पर ध्यान दें।

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NEET पास करने के बाद भी इन वजहों से रद्द हो सकता है एडमिशन (Photo - AI)

NEET: नीट यूजी (NEET UG) परीक्षा में शामिल होने वाले लाखों उम्मीदवार इस समय अपने परीक्षा रिजल्ट का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। लाखों छात्रों की नजरें आधिकारिक वेबसाइट पर टीकी हुई है, क्योंकि एमबीबीएस में प्रवेश के लिए नीट यूजी परीक्षा पास करना उनके लिए जरूरी है। लेकिन छात्रों को यह नहीं पता की नीट यूजी पास होने के बाद भी MBBS में उनका एडमिशन रद्द हो सकता है। जी हां, आपने सही पढ़ा, अगर आपको ऐसा लगता है कि परीक्षा में अच्छा स्कोर हासिल कर लेने भर से ही देश के किसी भी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस (MBBS) की सीट पक्की हो जाती है, तो यह आपकी सबसे बड़ी गलतफहमी है।

हकीकत यह है कि नीट परीक्षा पास करने के बाद भी एमबीबीएस में दाखिला लेना उतना आसान नहीं है, जितना कई उम्मीदवारों को लगता है। परिणाम घोषित होने के बाद की एडमिशन प्रक्रिया बेहद जटिल होती है। यदि आप इस प्रक्रिया की अनिवार्य शर्तों को पूरा नहीं कर पाते हैं, तो परीक्षा क्रैक करने के बावजूद आपका एडमिशन अंतिम समय में कैंसिल किया जा सकता है। इसलिए आपको कुछ विशेष बातों का ध्यान रखने की आवश्यकता है।

क्या नीट पास होना एडमिशन की गारंटी है?

यह जानना हर मेडिकल एस्पिरेंट के लिए बेहद जरूरी है कि नीट यूजी परीक्षा क्वालीफाई करना मेडिकल कॉलेज में दाखिले की 100% गारंटी नहीं देता है। परीक्षा पास करने के बाद काउंसलिंग प्रक्रिया के दौरान विभिन्न कॉलेजों और संस्थानों द्वारा निर्धारित की गई कड़ी शर्तों को पूरा करना करने वाले उम्मीदवारों को अपनी शैक्षणिक योग्यता, मेरिट रैंक और मेडिकल फिटनेस को साबित करना होता है। यदि कोई अभ्यर्थी इनमें से किसी भी एक शर्त को पूरा नहीं कर पाता है तो ऐसी स्थिति में उसका एडमिशन कैंसिल हो सकता है।

परीक्षा के बाद नहीं मिलता डायरेक्ट एडमिशन

परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों को इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि नीट यूजी का रिजल्ट आने के बाद कोई भी कॉलेज या संस्थान उन्हें सीधे यानी डायरेक्ट एडमिशन नहीं देता। रिजल्ट जारी होने के बाद सभी सफल उम्मीदवारों को मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) के ऑल इंडिया कोटा या संबंधित राज्यों की काउंसलिंग अथॉरिटी द्वारा आयोजित की जाने वाली काउंसलिंग प्रक्रिया में शामिल होने के लिए आवेदन करना जरूरी है। इसी काउंसलिंग के दौरान रैंक और चुने हुए कॉलेजों में खाली सीटों की उपलब्धता के आधार पर उम्मीदवारों को सीट आवंटित की जाती है।

12वीं में 1 नंबर भी कम हुआ तो कैंसिल होगा एडमिशन

कई बार अभ्यर्थी नीट यूजी की लिखित परीक्षा में तो बेहतरीन स्कोर खड़ा कर लेते हैं, लेकिन 12वीं बोर्ड परीक्षा के अनिवार्य पात्रता नियमों पर ध्यान देना भूल जाते हैं। ऐसे में उन्हें एडमिशन के दौरान परेशानी का सामना करना पड़ता है। नीट यूजी के नियमों के अनुसार, एमबीबीएस में प्रवेश के लिए 12वीं क्लास में फिजिक्स (भौतिक विज्ञान), केमिस्ट्री (रसायन विज्ञान) और बायोलॉजी (जीव विज्ञान) विषयों में सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम अंक कम से कम 50 प्रतिशत होने चाहिए, जबकि एससी, एसटी और ओबीसी उम्मीदवारों को कम से कम 40 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य है। एक अंक की कमी भी उम्मीदवार का एडमिशन रद्द करवा सकती है।

मेडिकल फिटनेस टेस्ट में फेल होना

एक अच्छा डॉक्टर बनने के लिए उम्मीदवार का केवल पढ़ाई में होना आवश्यक नहीं है, बल्कि शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ होना अनिवार्य है। इसी कारण से एमबीबीएस कोर्स में दाखिले के समय संबंधित मेडिकल कॉलेज हर चयनित स्टूडेंट का बेहद बारीक और विस्तृत मेडिकल चेकअप कराता है। जांच के दौरान यदि अभ्यर्थी में कोई ऐसी गंभीर शारीरिक अक्षमता या बीमारी पाई जाती है जो नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के मानकों के विपरीत हो, या जो भविष्य में उसे मेडिकल प्रैक्टिस करने से रोकती हो, तो उस स्थिति में भी परीक्षा पास कर चुके सफल उम्मीदवार का एडमिशन तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया जाता है।

गलत या फर्जी जानकारी देने पर एडमिशन रद्द और कानूनी कार्रवाई

एडमिशन प्रक्रिया के दौरान सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आपके एप्लीकेशन फॉर्म में भरी गई एक-एक जानकारी पूरी तरह सच और सटीक होनी चाहिए। दाखिले के वक्त कॉलेज स्तर पर आपके सभी दस्तावेजों का बारीकी से वेरिफिकेशन (सत्यापन) किया जाता है। इस दौरान अगर उम्मीदवार की कोई भी जानकारी गलत या फर्जी निकलती है तो उसके एडमिशन को रद्द किया जाता है। साथ ही उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाती है। इतना ही नहीं आगे आयोजित होने वाले एनटीए की परीक्षा में बैठने से भी रोक लगा दी जाती है। नीट यूजी के नतीजों का इंतजार कर रहे सभी अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू होने से पहले अपने 12वीं के मार्क्स, जाति और डोमिसाइल प्रमाण पत्रों को अच्छी तरह जांच लें ताकि बाद में कोई दिक्कत न आए।

Varsha Kushwaha
वर्षा कुशवाहा author

वर्षा कुशवाहा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की एजुकेशन डेस्क पर बतौर कॉपी एडिटर कार्यरत हैं और पिछले 5 वर्षों से मीडिया में सक्रिय हैं। जर्नलिज़्म में पोस्... और देखें

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