अध्यात्म

Nirjala Ekadashi Vrat Rules: निर्जला एकादशी पर भूलकर भी न करें ये काम, वरना नहीं मिलेगा व्रत का पूरा फल

Nirjala Ekadashi Vrat Rules: निर्जला एकादशी व्रत केवल खाना-पीना छोड़ना नहीं है, बल्कि इससे आगे कई तरह के नियमों का पालन करना है। आज हम आपको कुछ ऐसे काम बताएंगे जो निर्जला एकादशी के व्रत में नहीं करने चाहिए।

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निर्जला एकादशी व्रत

Nirjala Ekadashi Vrat Rules: निर्जला एकादशी का विशेष महत्व हिंदू धार्मिक परंपरा में माना गया है। सभी एकादशियों में निर्जला एकादशी का स्थान सबसे खास माना जाता है। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली यह एकादशी भगवान विष्णु की आराधना के लिए समर्पित है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमों के साथ रखा गया व्रत साल भर की सभी एकादशियों के समान पुण्य देने वाला होता है। यही कारण है कि देशभर में लाखों श्रद्धालु निर्जला एकादशी का व्रत रखते हैं और आज के दिन भगवान विष्णु का स्मरण करते हैं।

जैसा कि आपको निर्जला एकादशी नाम से ही स्पष्ट हो रहा है कि "बिना जल के" यानी इस व्रत में जल ग्रहण नहीं किया जाता है। इस दिन व्रती सूर्योदय से लेकर अगले दिन द्वादशी तिथि तक अन्न और जल का त्याग कर भगवान विष्णु की उपासना करते हैं। हालांकि इस व्रत का महत्व केवल उपवास तक सीमित नहीं है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार व्रत के दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन करना भी जरूरी माना गया है। यदि इन नियमों की अनदेखी की जाए तो व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। आइए जानते हैं ऐसे 5 काम जो आपको निर्जला एकादशी (Ekadashi Vrat Rules) में नहीं करने चाहिए।

भोजन और जल ग्रहण न करें

निर्जला एकादशी का सबसे प्रमुख नियम अन्न और जल का त्याग है। व्रत रखने वाले भक्तों को पूरे दिन खाना और पानी का सेवन नहीं करना चाहिए। यह त्याग तप और संयम का प्रतीक है। पारंपरिक रूप से निर्जल उपवास को ही सबसे श्रेष्ठ माना गया है।

नकारात्मक विचारों से दूर रहें

धार्मिक ग्रंथों में व्रत केवल शरीर की नहीं बल्कि मन की शुद्धता का भी माध्यम माना गया है। इसलिए निर्जला एकादशी के दिन क्रोध, ईर्ष्या, द्वेष और नकारात्मक सोच से दूर रहने की सलाह दी जाती है। आज दिनभर व्रत करते हुए भगवान विष्णु के नाम का स्मरण, भजन-कीर्तन और धार्मिक ग्रंथों का पाठ करने से मन शांत रहता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

झगड़े और विवाद से दूर रहें

निर्जला एकादशी व्रत का उद्देश्य आत्मसंयम और आध्यात्मिक उन्नति है। ऐसे में किसी से बहस करना, कडवे वचन बोलना या विवाद में पड़ना व्रत के असर को कम कर सकता है। इस दिन परिवार, मित्रों और समाज के लोगों के साथ मधुर व्यवहार बनाए रखना चाहिए। इस व्रत के दौरान शांति और सद्भाव का वातावरण रखने से ही व्रत की पवित्रता बढ़ जाती है।

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नशा और दुराचार से दूर रहें

निर्जला एकादशी के दिन किसी भी प्रकार के नशे, व्यसन या अनुचित व्यवहार से दूर रहना चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि यह दिन आत्मशुद्धि और आत्मनियंत्रण का अवसर होता है। इसलिए व्यक्ति को अपने आचरण में संयम, सादगी और मर्यादा बनाए रखनी चाहिए।

आलस्य का त्याग करें

निर्जला एकादशी के दिन ज्याद देर तक सोना या आलस्य में समय बिताना अच्छा नहीं माना जाता है। आज के दिन आपको पूजा-पाठ, जप और सत्संग में समय देना श्रेष्ठ माना गया है। इस दिन पूजा-पाठ में लगाया गया ध्यान आपको लंबे समय तक मानसिक शांति देता है।

gulshan kumar
गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

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