Nirjala Ekadashi Ke Bhajan: हिंदू धर्म में निर्जला एकादशी का विशेष महत्व है। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर रखा जाने वाला यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है। साल 2026 में निर्जला एकादशी का व्रत आज 25 जून, गुरुवार को किया जा रहा है। आज के दिन दिनभर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी के मधुर भजनों का गायन कर प्रभु का स्मरण करते हैं। भजन-कीर्तन से मन को शांति मिलती है और भक्ति भाव भी प्रबल होता है। यदि आप भी निर्जला एकादशी के अवसर पर भगवान विष्णु की भक्ति में लीन होना चाहते हैं, तो यहां दिए गए मधुर और लोकप्रिय भजनों को पढ़ें और उनका आनंद लें। आगे पढ़ें निर्जला एकादशी के मधुर भजन। (Ekadashi Bhajan Lyrics)
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Nirjala Ekadashi Ke Bhajan (निर्जला एकादशी के भजन)
श्री मन नारायण नारायण हरि हरि लिरिक्स
श्री मन नारायण नारायण हरि हरि
तेरी लीला सबसे नयारी नयारी हरि हरि
भज मन नारायण नारायण हरि हरि
जय जय नारायण नारायण हरि हरि
हरी ॐ नमो नारायणा, ॐ नमो नारायणा
हरी ॐ नमो नारायणा
लक्ष्मी नारायण नारायण हरि हरि
बोलो नारायण नारायण हरि हरि
भजो नारायण नारायण हरि हरि
जय जय नारायण नारायण हरि हरि
सत्य नारायण नारायण हरि हरि
जपो नारायण नारायण हरि हरि
भजो नारायण नारायण हरि हरि
जय जय नारायण नारायण हरि हरि
सुर्य नारायण नारायण हरि हरि
बोलो नारायण नारायण हरि हरि
भज मन नारायण नारायण हरि हरि
जय जय नारायण नारायण हरि हरि
विष्णु नारायण नारायण हरि हरि
जपो नारायण नारायण हरि हरि
भज नारायण नारायण हरि हरि
जय जय नारायण नारायण हरि हरि
बदरीनारायण नारायण हरि हरि
बोलो नारायण नारायण हरि हरि
भज मन नारायण नारायण हरि हरि
जय जय नारायण नारायण हरि हरि
ब्रह्म नारायण नारायण हरि हरि
जपो नारायण नारायण हरि हरि
भज नारायण नारायण हरि हरि
जय जय नारायण नारायण हरि हरि
चन्द्र नारायण नारायण हरि हरि
बोलो नारायण नारायण हरि हरि
भज नारायण नारायण हरि हरि
जय जय नारायण नारायण हरि हरि
भक्तो के प्यारे हरि हरि
आधार हमारे हरि हरि
तन मन में बसे हो हरि हरि
कण कण में बसे हो हरि हरि
तेरी छवि है सुन्दर नयारी नयारी हरि हरि
तेरी मूरत मंगल कारी हरि हरि हरि
शरण में अपनी लेलो हरि हरि हरि
पृथ्वी नारायण नारायण हरि हरि
जय जय नारायण नारायण हरि हरि
हम आए शरण तिहारी हरि हरि
शिव नारायण नारायण हरि हरि
जय जय नारायण नारायण हरि हरि
तेरी मूरत मंगल कारी हरि हरि हरि
शरण में अपनी लेलो हरि हरि हरि
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हरि मिलते हैं हरि गुण गाने से...
हरि मिलते हैं, हरि गुण गाने से ॥
नहीं मिलते हैं, सबको रिझाने से ॥
हरि मिलते हैं... जय हो ॥ हरि गुण...
चाहे, मंदिर में जाओ, चाहे परिक्रमा लगाओ ॥
नहीं मिलते हैं, घंटी बजाने से ॥
हरि मिलते हैं... जय हो ॥ हरि गुण...
चाहे, गीता पढ़ो, या रामायण पढ़ो ॥
नहीं मिलते हैं, माला घुमाने से ॥
हरि मिलते हैं... जय हो ॥ हरि गुण...
तुम, प्रेमी बनो, सबके प्यारे बनो ॥
भगती, मिलती है, सत्संग में जाने से ॥
हरि मिलते हैं... जय हो ॥ हरि गुण...
चाहे, गंगा नहा लो, चाहे यमुना नहा लो ॥
नहीं मिलते हैं, डुबकी लगाने से ॥
हरि मिलते हैं... जय हो ॥ हरि गुण...॥
