Nirjala Ekadashi Vrat: निर्जला एकादशी हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण और कठिन व्रतों में से एक मानी जाती है। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाने वाला यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस दिन बिना अन्न और जल ग्रहण किए उपवास करने की परंपरा है। यही कारण है कि इस व्रत को करने से साल भर की सभी एकादशियों के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। हालांकि आस्था और श्रद्धा के इस पर्व में स्वास्थ्य की अनदेखी करना उचित नहीं माना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का भी मानना है कि हर व्यक्ति की शारीरिक क्षमता अलग होती है, इसलिए निर्जला एकादशी का व्रत सभी के लिए उपयुक्त नहीं होता है। आज हम आपको कुछ ऐसे लोगों के बारे में बताएंगे जिन्हें निर्जला एकादशी का व्रत (Nirjala Ekadashi Fasting) न करने का सलाह दी जाती है।
क्यों कठिन माना जाता है ये व्रत
निर्जला एकादशी का सबसे मुख्य नियम पूरे दिन जल का त्याग करना है। ज्येष्ठ की भीषण गर्मी के मौसम में पड़ने वाली यह एकादशी शरीर पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है। लंबे समय तक पानी न पीने से डिहाइड्रेशन, कमजोरी, चक्कर आना और ब्लड प्रेशर से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। यही कारण है कि कुछ लोगों को यह व्रत रखने से पहले विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
गर्भवती महिलाएं
गर्भवती महिलाओं को निर्जला एकादशी का व्रत न करने की सलाह दी जाती है। क्योंकि गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर को सामान्य दिनों की तुलना में अधिक पोषण और पानी की आवश्यकता होती है। वहीं निर्जल रहने से शरीर में पानी की कमी हो सकती है, जिससे मां और गर्भस्थ शिशु दोनों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को निर्जला व्रत न करने की सलाह दी जाती है।
टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़ें: पहली बार रख रहे हैं निर्जला एकादशी व्रत कैसे रखें, निर्जला एकादशी व्रत की विधि
बुजुर्गों और बच्चे
यदि आपकी उम्र अधिक हो चुकी है, तो आपकी शारीरिक सहनशक्ति अपेक्षाकृत कम होती है। वहीं छोटे बच्चों का शरीर भी लंबे समय तक भूखा-प्यासा रहने के लिए तैयार नहीं होता है। ऐसे में निर्जला व्रत उनके लिए परेशानी का कारण बन सकता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि बुजुर्गों और बच्चों को अपनी शारीरिक स्थिति को देखते हुए ही उपवास करना चाहिए।
कुछ बीमारियों से पीड़ित लोग
कुछ लाइफस्टाइल डिजीज जैसे- डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट रोग और किडनी संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को भी इस व्रत को करते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। इन बीमारियों में नियमित दवाएं और पर्याप्त मात्रा में पानी लेना आवश्यक होता है। लंबे समय तक भूखा और प्यासा रहने से ब्लड शुगर का लेवल असंतुलित हो सकता है या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए यदि आपको इस तरह की कोई समस्या है, तो आपको निर्जला एकादशी व्रत नहीं करना चाहिए।
स्तनपान कराने वाली महिलाएं
स्तनपान कराने वाली महिलाओं के शरीर को पर्याप्त तरल पदार्थ और पोषण की आवश्यकता होती है। यदि मां लंबे समय तक पानी और भोजन से दूर रहती है, तो दूध के उत्पादन और उसकी गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है। इसका सीधा प्रभाव शिशु के पोषण पर पड़ता है। इसलिए स्तनपाल कराने वाली माताओं को पूरी तरह निर्जला व्रत न करने की सलाह दी जाती है।
हमेशा याद रखें किआस्था का वास्तविक उद्देश्य आत्मसंयम और ईश्वर के प्रति समर्पण है, न कि अपने स्वास्थ्य को जोखिम में डालना। इसलिए निर्जला एकादशी का व्रत रखते समय श्रद्धा के साथ-साथ अपनी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य का भी पूरा ध्यान रखना चाहिए।
