Nirjala Ekadashi Vrat Katha: शास्त्रों अनुसार निर्जला एकादशी व्रत रखने से व्यक्ति को उसके समस्त पापों से मुक्ति मिल जाती है और साथ ही मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह व्रत मुख्य रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो किसी कारणवश वर्षभर की सभी एकादशियों का पालन नहीं कर पाते। केवल इस एक व्रत को करने से उन्हें सभी व्रतों के बराबर फल प्राप्त होता है। इस साल ये एकादशी 6 जून को पड़ी है। यहां आप देखेंगे निर्जला एकादशी की पावन कथा।
निर्जला एकादशी पर इन वस्तुओं का करें दान, मिलेगा अखंड पुण्य और विष्णु कृपा
महाभारत के अनुसार, यह व्रत भीमसेन से जुड़ा हुआ है। पांडवों में भीम को भोजन का बहुत शौक था। जब श्रीव्यास जी ने पांडवों से कहा कि वर्ष भर सभी एकादशियों का व्रत रखना चाहिए, तो भीम ने कहा— "मुझे बहुत भूख लगती है, मैं भोजन के बिना नहीं रह सकता, मैं व्रत नहीं रख पाऊंगा।"
इस पर श्रीव्यास जी ने कहा कि यदि तुम केवल ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी का व्रत निर्जल (बिना जल पिए) रहकर कर लो, तो वह सभी एकादशियों के व्रत के बराबर पुण्य देगा। भीम ने व्यास जी के कहे अनुसार इस कठिन व्रत को पूरी आस्था और नियम के साथ किया। उसने सूर्योदय से पहले जल पिया और फिर अगले दिन सूर्योदय तक कुछ भी नहीं लिया। इस व्रत के प्रभाव से उसे सभी एकादशियों का फल प्राप्त हुआ। तभी से यह व्रत 'भीमसेनी एकादशी' या 'पांडव एकादशी' के नाम से भी जाना जाता है।