Premanand Maharaj New Year Rules: नए वर्ष में कौन-कौन से नियम लें? प्रेमानंद महाराज ने बताया नववर्ष का असली मतलब
- Authored by: Mohit Tiwari
- Updated Dec 31, 2025, 08:45 PM IST
Premanand Maharaj New Year Rules: वृंदावन के संत स्वामी प्रेमानंद महाराज ने कुछ ऐसे नियम बताए हैं, जो आपको नववर्ष पर लेने चाहिए। महाराज जी के अनुसार, ये नियम आपकी लाइफ बदल सकते हैं। उन्होंने एक प्रश्न का उत्तर देते हुए, इन नियमों के बारे में बताया है। आइए जानते हैं कि वे कौन से नियम हैं, जिनका पालन करने का संकल्प हमें नववर्ष पर लेना चाहिए?
प्रेमानंद महारााज ने बताया कैसे मनाएं नववर्ष
Premanand Maharaj New Year Rules: नया साल हर किसी के जीवन में एक नई शुरुआत का प्रतीक होता है। लोग इस मौके पर उत्साह से भर जाते हैं और नए संकल्प लेते हैं, लेकिन क्या ये संकल्प सच्चे सुख की ओर ले जाते हैं? वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज जी ने एक सवाल के जवाब में आने वाले नव वर्ष के लिए कुछ महत्वपूर्ण नियम बताए हैं।
महाराज जी कहते हैं कि नए साल को मंगलमय बनाने के लिए हमें अच्छे आचरणों के नियम लेने चाहिए, न कि गलत कामों में लिप्त होकर पाप बढ़ाने वाले नियम लेने चाहिए। उन्होंने कहा कि लोग नए वर्ष के उत्साह में शराब पीते हैं, मांस खाते हैं, व्यभिचार करते हैं और नशा करते हैं, जो पूरी तरह गलत है। इस पर प्रेमानंद महाराज ने कुछ ऐसे संकल्प बताए, जो हर किसी को नववर्ष पर लेने चाहिए।
अच्छे आचरणों के नियम लें, जीवन को बनाएं शुद्ध
महाराज जी के अनुसार, नए वर्ष में हमें ऐसे नियम लेने चाहिए जो हमारे आचरण को सुधारें और भगवान की कृपा प्राप्त करने में मदद करें। उन्होंने कहा कि हम अधिक से अधिक नाम जप करेंगे, यानी भगवान का नाम बार-बार लेंगे। इससे मन शांत रहता है और सकारात्मक ऊर्जा आती है। इसके अलावा, क्रोध नहीं करेंगे, क्योंकि क्रोध मन को अशांत करता है और रिश्तों को खराब करता है। महाराज जी ने कहा कि गंदी बातों में किसी भी तरह मन नहीं जाने देने का संकल्प लें। अगर मन भटके तो उसे बार-बार हटाकर भगवान में लगाएं। यह नियम मन की शुद्धि के लिए बहुत जरूरी है।
इसके साथ ही, हो सके तो इस वर्ष परोपकार करेंगे। कोई न कोई ऐसा दान, कोई ऐसा पुण्य या कोई ऐसा परोपकार जिससे हमारे भगवान प्रसन्न हों। महाराज जी ने कहा कि ये अच्छी बातें हमें अपनानी चाहिए। ऐसे नियम से न केवल अपना जीवन सुधरता है, बल्कि दूसरों की मदद से पुण्य भी मिलता है। नए वर्ष को एक नए जीवन की तरह मानें और इन नियमों को अपनाकर आगे बढ़ें।
गलत कामों को छोड़ने का संकल्प लें, पाप से दूर रहें
महाराज जी ने नए वर्ष के उत्साह में की जाने वाली गलतियों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि लोग नए वर्ष के उत्साह में शराब पीते हैं, पार्टी मनाते हैं, मांस खाते हैं, व्यभिचार करते हैं और नशा करते हैं। यह सब गलत बात है। नए वर्ष को मंगलमय बनाने के लिए इन सबको छोड़ने का नियम लो। जो आज तक करते रहे, इस वर्ष में नहीं करना है। अब अपना नया वर्ष मानो नया जीवन है, तो खुद से कहो कि हम मांस नहीं खाएंगे, शराब नहीं पिएंगे, हम पाप कर्म नहीं करेंगे। हम हिंसा नहीं करेंगे, चोरी नहीं करेंगे, हम गलत आचरण नहीं करेंगे। ऐसे नियम आपको लेने चाहिए।
महाराज जी ने कहा कि ‘ऐसे लोग बावरे हैं जो नववर्ष उपद्रव करते हैं। शराब पी के इधर-उधर पड़ेंगे और बोलेंगे आज नया वर्ष का उत्साह हैप्पी न्यू ईयर। लेकिन ये क्या हैप्पी न्यू? ये हैप्पी है? लड़खड़ा रहे हो। ये हैप्पी है? शराब पी रहे हो। गंदे आचरण कर रहे हो। हैप्पी दुख भोगोगे। पाप कर्म कर रहे हो। मनुष्य को मदिरा पीना पाप है। राक्षस को मदिरा पीना स्वाभाविक है, लेकिन मनुष्य को पीना पाप है। राक्षस पिए तो उसकी बात अलग है क्योंकि वो उसी प्रकार का आचरण करते हैं। आजकल तो लोग कहने लग गए, हम तो राक्षस ही हैं, तो आपके लिए दुर्गति भी पक्की है। नरक का रास्ता भी पक्का है,बस इंतजार करो। फिर दुर्गति होगी।
कर्म बिगड़ जाएगा तो बाद में पड़े पड़े सड़ते हैं लोग और जब पड़े रहोगे तो कोई प्यार से पानी भी देना नहीं चाहेगा। आज तुम कमा रहे हो चार के काम आ रहे हो और कल जब पड़े रहोगे तो वही चार तुम्हारी तरफ देखेंगे भी नहीं। तुम्हारी गली में नहीं आएंगे कि कहीं बुला ना ले वो। कहीं वो बुला ना ले। बड़ा स्वार्थी संसार है। इसलिए भजन करो। पाप कर्म को छोड़ दो। मनमानी मत करो कि हम राक्षस ही हैं। नहीं तो वह दंड भोगने को मिलेगा जो तुम सोच भी नहीं रहे हो। अनेक योनियों में अनेक प्रकार से दंड भोगना पड़ता है। कोई अकेले मनुष्य योनि थोड़ी है। 8399 योनियां और हैं जिनमें हमें दंड भोगना पड़ता है।’
अज्ञानी करते हैं पार्टी
महाराज जी ने कहा कि ‘अज्ञान से ग्रसित लोग पार्टी मनाते हैं और इन्हीं बातों की पार्टी मनाते हैं। मदिरा पीना मांस खाना व्यभचार करना बोले न्यू ईयर हैप्पी न्यू ईयर। ये हैप्पी वाले काम कर रहे हैं। ये नरक वाले काम कर रहे हो। ये दुख वाले काम कर रहे हो। तुम्हारा पतन हो जाएगा इससे, इसलिए सबको प्रार्थना करके हम ये बात कहते हैं अगर आप मान ले तो शराब पीना, मांस खाना, पर स्त्री गमन करना, हिंसा करना, चोरी करना ये सब नरक के रास्ते हैं। मनुष्य जीवन मिला।
आप कोई राक्षस थोड़ी हो इसलिए राक्षसों वाले कार्य मत करो। मनुष्य वाले कार्य करो। अब कह रहे हैं हैप्पी और लड़खड़ा के नाली में गिर रहे हैं। ये हैप्पी है। शराब पी के लड़खड़ा के बोले हैप्पी ये हैप्पी माने प्रसन्नता होती है। प्रसन्नता परमात्मा से प्राप्त होती है। गंदी बातों से नहीं इसलिए सबसे प्रार्थना है लड़ाई झगड़ा मत कीजिए। शराब मत पीजिए। मांस मत खाइए। पराए स्त्री के प्रति दुर्व्यवहार की भावना मत रखिए। इन बातों का बुराइयों का त्याग कीजिए तो हमारा नव वर्ष मंगलमय रहे और सब पर भगवान की कृपा रहे। सब स्वस्थ रहे, सब सुखी रहे, सब धर्म आचरण पर चलें।'
क्या है हैप्पी न्यू ईयर का अर्थ?
महाराज जी ने हैप्पी न्यू ईयर के सच्चे अर्थ को बताते हुए कहा कि हैप्पी माने प्रसन्नता होती है। प्रसन्नता परमात्मा से प्राप्त होती है। गंदी बातों से नहीं। लोग शराब पीकर लड़खड़ाते हैं और कहते हैं हैप्पी, लेकिन ये हैप्पी नहीं है। ये दुख भोगोगे। पाप कर्म कर रहे हो। इसलिए नए वर्ष में ऐसे काम न करें जो पतन का कारण बनें। सच्ची प्रसन्नता भगवान में लगने से मिलती है, न कि नशे या गलत आचरण से।
इस साल लें ये संकल्प
महाराज जी ने सभी से प्रार्थना की कि ‘इस नवीन वर्ष के आगमन पर संकल्प लें कि आप कोई पापाचरण नहीं करेंगे। जैसे कोई शराब पीता हो तो संकल्प ले कि मैं इस नवीन वर्ष से प्रारंभ होते ही शराब छोड़ दूंगा। जीवन में नहीं। मांस भक्षण करते हो तो मांस छोड़ दीजिए। जो अगर पराई स्त्री से आप सहवास करने की इच्छा रखते हो तो उसको छोड़ दीजिए। आप किसी बुराई को छोड़ दीजिए। महाराज जी कहते हैं कि देश विदेश में लोग सुनते हैं और काफी मतलब आपके वचनामृत का पान करके अपने जीवन में एक निखार ले आए हैं।