अध्यात्म

नवरात्र के तीसरे दिन किस देवी की पूजा होती है, आज नवरात्रि का कौन सा दिन है, जानें नवरात्र तीसरे दिन की देवी कथा, मंत्र

नवरात्र के तीसरे दिन किस देवी की पूजा होती है (today Navratri which day): शारदीय नवरात्र 2025 का नौ दिनों का महापर्व इन दिनों जारी हैं। आज नवरात्र का तीसरा दिन है। नवरात्र के तीसरे दिन पर देवी चंद्रघंटा की पूजा होती है। यहां जानें नवरात्र थर्ड डे पर मां चंद्रघंटा की पूजा विधि, कथा, मंत्र आदि की जानकारी।

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नवरात्र के तीसरे दिन किस देवी की पूजा होती है (Pic: Pinterest)

नवरात्र के तीसरे दिन किस देवी की पूजा होती है (today Navratri which day): आश्विन मास की शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि पर बुधवार को नवरात्रि का तीसरा दिन है। यह पावन अवसर मां चंद्रघंटा को समर्पित है, जो भक्तों के हृदय में ममता और शक्ति का संचार करती हैं। इस दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। द्रिक पंचांग के अनुसार, बुधवार को सूर्य कन्या राशि में गोचर करेंगे, जबकि चंद्रमा तुला राशि में विराजमान रहेंगे। अभिजीत मुहूर्त नहीं है और राहुकाल का समय दोपहर के 12 बजकर 13 मिनट से शुरू होकर 1 बजकर 43 मिनट पर खत्म होगा।

नवरात्र तीसरे दिन की कथा

नवरात्र के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की कथा इस प्रकार है - प्राचीन समय में जब असुरों का अत्याचार बहुत बढ़ गया था, तब देवता बड़े भयभीत हो गए। सभी देवता मिलकर भगवान शंकर और विष्णु के पास पहुंचे और प्रार्थना की कि उनका उद्धार किया जाए। तभी भगवान शंकर के तेज, विष्णु जी के बल और ब्रह्मा जी के प्रभाव से एक दिव्य शक्ति प्रकट हुई। वह शक्ति मां दुर्गा थीं। मां का स्वरूप अत्यंत दिव्य और अद्भुत था। जब वे सिंह पर सवार होकर असुरों के संहार के लिए निकलीं, तो उनके मस्तक पर अर्धचंद्र के आकार की स्वर्णिम घंटा प्रकट हुई। इसी कारण वे मां चंद्रघंटा कहलाईं।

मां के दस हाथ हैं, जिनमें अलग-अलग अस्त्र-शस्त्र सुशोभित रहते हैं। उनका सिंह पर सवार रूप देखकर राक्षसों के हृदय कांप उठे। मां की घंटा की गूंज से दुष्टों का नाश हुआ और देवताओं के मन में उत्साह व विजय का विश्वास जाग उठा। इस प्रकार मां चंद्रघंटा ने अपने भक्तों का कल्याण किया और अधर्म का नाश कर धर्म की स्थापना की।

मां चंद्रघंटा की पूजा का महत्व

देवी भागवत पुराण में वर्णित है, मां चंद्रघंटा का स्वरूप अत्यंत भव्य और अलौकिक है। उनके मस्तक पर अर्द्धचंद्र सुशोभित है। यही कारण है कि उन्हें 'चंद्रघंटा' नाम से जाना जाता है। मां चंद्रघंटा की पूजा से जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है। इसके साथ ही, मानसिक शांति भी मिलती है और नई ऊर्जा का संचार होता है।

पुराणों के अनुसार, मां चंद्रघंटा की आराधना से पारिवारिक सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है, साथ ही नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं। इनकी पूजा विशेष रूप से सूर्योदय से पहले कर लेनी चाहिए, क्योंकि इस समय मां की विशेष कृपा बरसती है। वहीं, पूजा में लाल और पीले गेंदे के फूल चढ़ाने का महत्व है, क्योंकि यह फूल मां की ममता और शक्ति का प्रतीक हैं।

मां चंद्रघंटा का मंत्र

ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः

इसे कम से कम 108 बार जपना श्रेष्ठ है।

मां चंद्रघंटा की आरती लिखित

जय मां चन्द्रघण्टा सुख धाम। पूर्ण कीजो मेरे काम॥

चन्द्र समाज तू शीतल दाती। चन्द्र तेज किरणों में समाती॥

मन की मालक मन भाती हो। चन्द्रघण्टा तुम वर दाती हो॥

सुन्दर भाव को लाने वाली। हर संकट में बचाने वाली॥

हर बुधवार को तुझे ध्याये। श्रद्धा सहित तो विनय सुनाए॥

मूर्ति चन्द्र आकार बनाए। सन्मुख घी की ज्योत जलाएं॥

शीश झुका कहे मन की बाता। पूर्ण आस करो जगत दाता॥

कांचीपुर स्थान तुम्हारा। कर्नाटिका में मान तुम्हारा॥

नाम तेरा रटू महारानी। भक्त की रक्षा करो भवानी॥

नवरात्र के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा विधि

इस दिन विधि-विधान से पूजा शुरू करने के लिए ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें। मंदिर या पूजा स्थल को साफ करें। एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माता की प्रतिमा स्थापित करें, साथ ही कलश की भी स्थापना करें। अब देवी मां को श्रृंगार का सामान चढ़ाएं, जिसमें लाल चुनरी, सिंदूर, अक्षत, लाल पुष्प (विशेषकर गुड़हल), चंदन, रोली आदि अर्पित करें।

इसके बाद उन्हें फल, मिठाई, या अन्य सात्विक भोग लगाएं (जैसे खीर या हलवा)। मां दुर्गा के सामने घी का दीपक और धूपबत्ती जलाएं। आप चाहें तो दुर्गा सप्तशती का पाठ कर सकते हैं। अंत में मां दुर्गा की आरती करें।

(आईएएनएस के सहयोग के साथ)

Medha Chawla
मेधा चावला author

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वा... और देखें

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