Navratri 2023 2nd Day, Maa Brahmacharini Vrat Katha In Hindi (मां ब्रह्मचारिणी की व्रत कथा): नवरात्रि का दूसरा दिन मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप को समर्पित है। इन माता की पूजा से व्यक्ति के सभी काम पूरे होते हैं। साथ ही कार्यों में आ रही रुकावटें भी दूर हो जाती हैं। कहते हैं जिन पर मां ब्रह्मचारिणी की कृपा बरसती है उन्हें हर काम में विजय प्राप्त होती है इसके अलावा माता के आशीर्वाद से हर तरह की परेशानियां भी समाप्त हो जाती है। देवी ब्रह्मचारिणी की विधि विधान पूजा करने से व्यक्ति में तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम की वृद्धि होती है। तो चलिए जानते हैं माता ब्रह्मचारिणी की पावन कथा।
Navratri Day 2 Katha: Mata Brahmacharini Vrat Katha
मां ब्रह्मचारिणी का जन्म पर्वतराज हिमालय के घर हुआ था। उन्होंने भगवान शिव से विवाह की इच्छा व्यक्त की, लेकिन उनके माता-पिता उन्हें कहा कि शिव जी को प्रसन्न करने के लिए तुम्हें कठिन तप करना होगा। तब देवी ब्रह्मचारिणी ने नारद जी से सलाह मांगी और उनके सुझाव अनुसार माता ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए घोर तपस्या की। कठिन तपस्या के कारण ही माता को ब्रह्मचारिणी नाम से जाना गया।
धार्मिक मान्यताओं अनुसार माता ब्रह्मचारिणी एक हजार साल बिना अन्न ग्रहण किए सिर्फ फल खाकर बिताये और उन्होंने सौ सालों तक जमीन पर रहकर शाक पर निर्वाह किया। इतना ही नहीं उन्होंने वर्षा और धूप के घोर कष्ट को सहा। टूटे हुए बिल्व पत्र खाकर भगवान शंकर की भक्ति की। फिर कई हजार साल तक बिना जल और भोजन की घोप तपस्या की।
इस कठिन तपस्या के चलते देवी का शरीर काफी कमज़ोर हो गया था। देवता, ऋषि-मुनि सभी ने देवी ब्रह्मचारिणी की तपस्या की सराहना की और कहा कि देवी इतनी कठिन तपस्या आज से पहले किसी ने नहीं की आपको भगवान शिव पति रूप में अवश्य प्राप्त होंगे। अंत में माता की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शंकर ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार कर लिया।
