Nautapa 2026 : गर्मी अब अपने सबसे तीखे रूप में पहुंचने वाली है। ज्योतिष और मौसम विज्ञान दोनों के अनुसार दो दिन बाद से सूर्यदेव की तपिश और तेज होने लगेगी, क्योंकि 2026 का नौतपा शुरू होने जा रहा है। भारत में हर साल नौतपा को भीषण गर्मी का सबसे महत्वपूर्ण दौर माना जाता है। इस दौरान धरती पर सूर्य की किरणें बेहद तेज प्रभाव डालती हैं, जिससे तापमान तेजी से बढ़ जाता है। धार्मिक दृष्टि से भी नौतपा का विशेष महत्व बताया गया है।
2026 में कब से कब तक रहेगा नौतपा
वर्ष 2026 में नौतपा 25 मई से शुरू होकर 2 जून तक रहेगा। यह लगातार 9 दिनों तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, जिसे ज्योतिष में अत्यंत उष्ण माना गया है। यही कारण है कि इन दिनों में गर्मी अपने चरम पर पहुंच जाती है।
क्या होता है नौतपा (Kya Hota Hai Nautapa)
नौतपा का अर्थ है ‘नौ दिनों की तपन’। ज्योतिष शास्त्र में माना जाता है कि जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तब पृथ्वी पर उनकी गर्मी सबसे अधिक प्रभाव डालती है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार रोहिणी नक्षत्र को चंद्रमा का प्रिय नक्षत्र माना गया है। जब सूर्य इस नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तब अग्नि तत्व की ऊर्जा बढ़ जाती है। इसका प्रभाव पृथ्वी, मौसम और जीव-जगत पर दिखाई देता है। माना जाता है कि नौतपा के दौरान सूर्यदेव अपनी पूर्ण उष्ण शक्ति से पृथ्वी को तपाते हैं, जिससे वातावरण की अशुद्धियां समाप्त होती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह समय तप, साधना और संयम का भी माना गया है।
इन नौ दिनों में सूर्य की किरणें सीधी और तीखी मानी जाती हैं। यह लगातार 9 दिनों तक चलता है। इस दौरान गर्म हवाएं और तेज तापमान देखने को मिलता है। ज्योतिष में इसे प्रकृति की शुद्धि और ऊर्जा का समय माना जाता है। मान्यता है कि नौतपा जितना तीखा होता है, बारिश उतनी अच्छी होती है।
क्या है वैज्ञानिक कारण
वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो मई के अंतिम सप्ताह में सूर्य की किरणें भारत के अधिकांश हिस्सों पर लगभग सीधी पड़ती हैं। इस समय धरती अधिक गर्मी सोखती है। गर्म हवाएं यानी लू चलने लगती हैं और तापमान तेजी से बढ़ता है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार यह गर्मी मानसून बनने की प्रक्रिया में भी मदद करती है। समुद्र और धरती के तापमान में अंतर बढ़ने से मानसूनी हवाओं को गति मिलती है।
नौतपा के दौरान क्या करें
शरीर को हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी माना जाता है। नारियल पानी, बेल का शरबत, छाछ और नींबू पानी का सेवन लाभकारी रहेगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार सुबह तांबे के लोटे से सूर्यदेव को जल अर्पित करने से सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। नौतपा में जल, छाता, फल, सत्तू और शीतल वस्तुओं का दान शुभ माना गया है। हल्का और सुपाच्य भोजन करने की सलाह दी जाती है। मौसमी फल और दही का सेवन लाभकारी माना गया है। तेज धूप से बचने के लिए सिर को कपड़े या टोपी से ढककर निकलना चाहिए।
नौतपा में क्या न करें
तेज गर्मी में खाली पेट बाहर निकलना शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है। इस दौरान मसालेदार और भारी भोजन से पाचन खराब हो सकता है। लू लगने का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए दोपहर में बाहर निकलने से बचना चाहिए। धार्मिक दृष्टि से नौतपा में मन को शांत रखने और संयम बरतने की सलाह दी जाती है। गर्मी में बासी खाना जल्दी खराब हो सकता है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
साधना काल है नौतपा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नौतपा केवल गर्मी का समय नहीं, बल्कि तप और साधना का भी काल माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि इस दौरान किया गया जप, दान और पूजा विशेष फल देता है। वहीं मौसम विज्ञान के अनुसार नौतपा अच्छी बारिश और बेहतर मानसून का संकेत भी माना जाता है।
