अध्यात्म

नाग पंचमी के दिन क्यों नहीं बनती है रोटी? सिलाई-कढ़ाई पर वर्जित, जानें नाग पंचमी पर क्या करें और क्या न करें?

Nag Panchami 2025, पंचमी पर क्या करें और क्या न करें?: आज नागपंचमी है। इस खास मौके पर देशभर में नाग देवता की पूजा की जाती है। नागपंचमी के दिन कुछ खास नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है। यहां से आप जान सकते हैं कि आपको नागपंचमी के दिन क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए।

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नाग पंचमी के दिन क्या करें, क्या न करें (Photo Source: Canva)

Nag Panchami 2025, पंचमी पर क्या करें और क्या न करें?: नाग पंचमी का पर्व हर साल सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन मनाया जाता है। ये दिन नाग देवता की पूजा को समर्पित है। इस दिन नाग देवता की पूजा की जाती है साथ ही उपवास भी रखा जाता है। इससे जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है। नाग पंचमी की पूजा के भी कुछ खास नियम हैं। साथ ही इस दिन कुछ खास चीजों को करने की मनाही है। आप यहां से खासतौर से उन चीजों के बारे में जानें, जो आपको नागपंचमी पर भूलकर भी नहीं करना है।

नाग पंचमी के दिन लोहे का इस्तेमाल कर सकते हैं?

नाग पंचमी की पूजा के दिन लोहे की कड़ाही या तवा को आग पर नहीं चढ़ाना चाहिेए। साथ ही इस दिन लोहा खरीदना भी वर्जित है।

नाग पंचमी के दिन सिलाई-कढ़ाई कर सकते हैं?

नाग पंचमी के दिन किसी भी नुकीली चीज जैसे सुई का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। ऐसा करने पर भगवान शेषनाग नाराज होते हैं। इसलिए इस दिन सिलाई-कढ़ाई भी नहीं करनी चाहिए।

नाग पंचमी के दिन साग बना सकते हैं?

नाग पंचमी के दिन भूलकर भी साग काटकर नहीं बनाना चाहिए।

नाग पंचमी के दिन नाग देखने से क्या होता है?

नाग पंचमी के दिन यदि आपको अचानक कहीं सांप दिख जाए तो समझें भगवान शिव की कृपा आप पर बरसने वाली है।

नाग पंचमी के दिन खुदाई करवा सकते हैं?

नाग पंचमी के दिन घर के जमीन की खुदाई करने से बचना चाहिए। माना जाता है कि इससे मिट्टी या जमीन के नीचे बने में सांपों के बिल के टूटने का डर रहता है।

नाग पंचमी के दिन बाल धो सकते हैं?

नाग पंचमी के दिन बाल धो सकते हैं। इस दिन बाल धोने को लेकर कोई मनाही नहीं है।

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

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