Makar Sankranti 2023 Puja Vidhi, Mantra: आज है मकर संक्रांति, जानें पूजा विधि, मंत्र, मुहूर्त सबकुछ

Makar Sankranti 2023 Puja Vidhi, Shubh Muhurat, Time, Samagri, Mantra, Aarti in Hindi: मकर संक्रांति यानी खिचड़ी (Khicdi) का त्योहार सनातन धर्म (Snatan Dharm) के लोगों के लिए बेहद खास होता है। इस दिन स्नान-दान (Snan-Daan) का विशेष महत्व बताया जाता है।

Updated Jan 15, 2023 | 07:34 AM IST

makar sankranti 2023

Makar Sankranti 2023: मकर संक्रांति पर क्या करते हैं, जानें सबकुछ।

Makar Sankranti 2023 Puja Vidhi, Shubh Muhurat, Time, Samagri, Mantra, Aarti: मकर संक्रांति इस बार 15 जनवरी को मनाई जाएगी। उत्तर भारत में इसे कई जगह खिचड़ी (Khichdi) के त्योहार के नाम से जाना जाता है। इस दिन से सूर्य देव उत्तारयण हो जाते हैं। ज्योतिष शास्त्र अनुसार जब सूर्य देव अपने पुत्र की राशि मकर में प्रवेश करते हैं तब मकर संक्रांति मनाई जाती है। सनातन धर्म के लोगों के लिए ये त्योहार बेहद खास होता है। इस दिन स्नान-दान का विशेष महत्व बताया जाता है। जानिए मकर संक्रांति पर क्या करते हैं।

मकर संक्रांति 2023 तिथि और मुहूर्त (Makar Sankranti 2023 Date And Muhurat)

मकर संक्रांति 2023- 15 जनवरी 2023 (रविवार)
पुण्य काल मुहूर्त- सुबह 07:15 से दोपहर 12:30 तक
महापुण्य काल मुहूर्त - सुबह 07:15 से सुबह 09:15 तक

मकर संक्रांति का महत्व (Makar Sankranti 2023 Significance)

हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति के दिन से ही हर तरह के मांगलिक कार्यों का शुभारंभ कर दिया जाता है। इस दिन से शादी, गृह प्रवेश, नये वाहन की खरीदारी, घर बनाने, घर खरीदने, मुंडन आदि जैसे शुभ कार्य किए जा सकते हैं। मकर संक्रांति के दिन दान-दक्षिणा का भी बेहद महत्व बताया गया है। कहते हैं इस दिन जो मनुष्य अपनी स्वेच्छा से जरूरतमंदों को दान पुण्य करता है उसे शुभ फल की प्राप्ति होती है। बता दें मकर संक्रांति का पर्व नई फसल और नए ऋतु के आगमन की खुशी प्रकट करने के लिए मनाया जाता है।

मकर संक्रांति पूजा विधि (Makar Sankranti 2023 Puja Vidhi)

  • मान्यता के अनुसार मकर संक्रांति के दिन सूर्य अपने पुत्र शनि से मिलने जाते हैं। इस दिन विशेष रूप से भगवान सूर्य की पूजा की जाती है। कहते हैं इस दिन जो कोई भी व्यक्ति पूरे विधि-विधान से भगवान सूर्य की पूजा करता है उन पर सूर्य भगवान अपना आशीर्वाद बनाए रखते हैं।
  • मकर संक्रांति के दिन अच्छी तरह से अपने घर की साफ-सफाई कर लें।
  • सुबह जल्दी उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  • पूजा करने वाले इंसान को अपने माथे पर रोली और चावल के आटे का तिलक लगाना चाहिए।
  • इसके बाद भगवान शनि और सूर्य देव की पूजा करें।
  • भगवान के समक्ष एक दीपक जलाएं।
  • फिर एक थाली में कुछ पैसे, घेवर, तिल से बने लड्डू इत्यादि प्रसाद रूप में चढ़ाएं।
  • सूर्य मंत्र का जाप करें।
  • सूर्य मंत्र: ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः। सूर्य मंत्र:ॐ घृणि सूर्याय नमः!
  • पूजा करने के बाद जरूरतमंदों को दान करें।

मकर संक्रांति पर किन चीजों का करें दान (Makar Sankranti Per Kya Daan Karen)

मकर संक्रांति के दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन खिचड़ी, घी, तिल, घुड़, तेल, कंबल आदि चीजों का दान सबसे ज्यादा शुभ होता है। कहते हैं इन चीजों के दान से सूर्य देव के साथ-साथ शनि देव की भी कृपा प्राप्त हो जाती है।

मकर संक्रांति पर बनाएं जाने वाले पकवान (Dishes Made On Makar Sankranti)

मकर संक्रांति के दिन गुड़ और तिल से बनी चीजें बनाई और खाई जाने की परंपरा है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि तिल और गुड़ सर्दी के मौसम में शरीर को गर्मी देते हैं और साथ-साथ हमारे शरीर को कई तरह के पोषक तत्व प्रदान करते हैं। इसके अलावा उत्तर भारत में कई जगहों पर इस दिन खिचड़ी खाई जाती है। खिचड़ी के साथ इस दिन तिल की गजक, रेवड़ी, गुड़ इत्यादि का पकवान बनाया और खाया जाता है। कई जगह इस दिन दही चूड़ा खाने की भी परंपरा है।

मकर संक्रांति पर लगते हैं तीर्थ दर्शन और मेले (Makar Sankranti Mela)

देश में कई जगहों पर मकर संक्रांति के दिन मेले आयोजित किए जाते हैं। खासकर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दक्षिण भारत में इस दिन बड़े भव्य और खूबसूरत मेलों का आयोजन होता है। इस दिन लाखों की संख्या में श्रद्धालु गंगा और देश की अन्य पवित्र नदियों में स्नान और दान इत्यादि करने पहुंचते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्री कृष्ण ने कहा है कि जो भी व्यक्ति मकर संक्रांति पर देह का त्याग करता है उसे मोक्ष की प्राप्ति अवश्य होती है।

मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व (Religious Significance of Makar Sankranti)

  • पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति के दिन ही भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि के घर जाते हैं।
  • इस त्यौहार से जुड़ी एक कथा के अनुसार जब पृथ्वी पर असुरों का आतंक बेहद बढ़ गया था तब मकर संक्रांति के दिन ही भगवान विष्णु ने असुरों का संहार किया और लोगों को असुरों के आतंक से मुक्त कराया। भगवान विष्णु ने असुरों के सिरों को काटकर मंदरा पर्वत पर गाड़ दिया। मान्यता है कि भगवान विष्णु की असुरों पर विजय के रूप में मकर संक्रांति मनाई जाने लगी।
  • महाभारत काल में भीष्म पितामह ने मकर संक्रांति के दिन को ही अपने शरीर को त्यागा था।
मकर संक्रांति का त्योहार कहां कैसे मनाया जाता है? इस त्यौहार को जगह-जगह कई अलग-अलग नामों से मनाया जाता है। बिहार, यूपी में इसे कई स्थानों पर खिचड़ी कहा जाता है, पंजाब और विभिन्न उत्तर भारतीय राज्यों में इसे ‘लोहड़ी’ के रूप में मनाया जाता है, वहीं असम में इसे ‘माघ या भोगली बिहू’ के रूप में मनाया जाता है, गुजरात में इसे ‘उत्तरायण’ कहा जाता है तो वहीं मकर संक्रांति को तमिलनाडु में ‘पोंगल’ के नाम से मनाया जाता है।
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