1 या 2 फरवरी, कब है माघी पूर्णिमा, जानिए माघ पूर्णिमा की सही डेट, पूजन मुहूर्त और विधि, चंद्रोदय समेत सारी जानकारी
- Authored by: Mohit Tiwari
- Updated Jan 31, 2026, 10:11 AM IST
Magh Purnima 2026: माघ माह के पूर्णिमा तिथि बेहद ही खास होती है। इसको माघी पूर्णिमा कहते हैं और इसी दिन से माघ मेले का समापन भी होता है। माघ महीने के बाद हिंदू कैलेंडर का अंतिम महीना फाल्गुन शुरू हो जाता है। माघी पूर्णिमा पर स्नान, दान और व्रत का विशेष महत्व माना गया है। आइए जानते हैं कि माघी पूर्णिमा कब पड़ रही है।
माघ पूर्णिमा की क्या है सही डेट
Magh Purnima 2026: माघ मास की पूर्णिमा तिथि को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना गया है। इस दिन स्नान, दान और व्रत करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माघ पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। वर्ष 2026 की माघ पूर्णिमा और भी खास मानी जा रही है, क्योंकि इस दिन रवि पुष्य योग का शुभ संयोग भी बन रहा है। आइए जानते हैं कि साल 2026 में माघी पूर्णिमा किस तारीख को है?
माघ पूर्णिमा 2026 कब है?
वैदिक पंचांग के अनुसार माघ मास की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 1 फरवरी 2026, रविवार की सुबह लगभग 5 बजकर 53 मिनट पर होगी। वहीं, इस तिथि का समापन अगले दिन 2 फरवरी की मध्य रात्रि के बाद करीब 3 बजकर 39 मिनट पर होगा। शास्त्रों में यह मान्यता है कि जब पूर्णिमा तिथि प्रदोष काल में आती है, तब उसी दिन पूर्णिमा व्रत और स्नान-दान किया जाता है। इस कारण वर्ष 2026 में माघ पूर्णिमा का व्रत, स्नान और पूजन 1 फरवरी को ही किया जाएगा। इस दिन रविवार होने और पुष्य नक्षत्र के कारण रवि पुष्य योग भी बन रहा है, जो इसे और अधिक शुभ बनाता है।
माघ पूर्णिमा का धार्मिक और पौराणिक महत्व
माघ पूर्णिमा का महत्व पुराणों और धर्मग्रंथों में विस्तार से बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन देवता पृथ्वी पर आकर पवित्र नदियों के संगम में स्नान करते हैं। इसी वजह से इस दिन गंगा, यमुना, सरस्वती या किसी भी पवित्र नदी में स्नान करना अत्यंत फलदायी माना गया है। माघ पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु की पूजा विशेष रूप से की जाती है। माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने, सत्यनारायण कथा सुनने और दान करने से व्यक्ति को सांसारिक सुखों के साथ-साथ मोक्ष का मार्ग भी प्राप्त होता है।
माघ पूर्णिमा 2026 स्नान-दान और पूजा का शुभ मुहूर्त
माघ पूर्णिमा के दिन सुबह स्नान और दान का विशेष महत्व है। इस दिन प्रातःकाल स्नान के बाद दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। 1 फरवरी 2026 को सुबह लगभग 5 बजकर 30 मिनट से लेकर 7 बजकर 9 मिनट तक का समय स्नान-दान के लिए विशेष रूप से शुभ माना गया है। इसी दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना और सूर्यदेव को अर्घ्य देना भी लाभकारी माना गया है। दोपहर के समय अभिजीत मुहूर्त में भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। शाम के समय गोधूलि काल में दीपक जलाकर पूजा करने का भी विशेष महत्व माना जाता है।
माघ पूर्णिमा 2026 पर चंद्रोदय का समय
माघ पूर्णिमा के दिन चंद्रमा को अर्घ्य देने का विधान है। मान्यता है कि चंद्रोदय के बाद चंद्रदेव को दूध, जल और अक्षत से अर्घ्य देने से मानसिक शांति प्राप्त होती है। वर्ष 2026 में माघ पूर्णिमा के दिन चंद्रोदय शाम करीब 5 बजकर 266 मिनट पर होगा। इसके बाद व्रती लोग चंद्रमा की पूजा कर अपना व्रत पूर्ण करते हैं।
माघ पूर्णिमा की पूजा सामग्री
माघ पूर्णिमा की पूजा के लिए घी, पंचामृत, रोली, अक्षत, चंदन, गंगाजल, दीपक, सूती बाती, फूल, फल, मिठाई, तुलसी पत्र, लाल या पीला वस्त्र तथा भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर रखनी चाहिए। इन सामग्रियों से विधिपूर्वक पूजा करने पर पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
माघ पूर्णिमा पूजा विधि
माघ पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर सूर्यदेव को अर्घ्य देना चाहिए। इसके बाद मन में पूर्णिमा व्रत और पूजा का संकल्प लें। घर के पूजा स्थान को साफ करें और एक चौकी पर लाल या पीले रंग का वस्त्र बिछाएं। उस पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। पूजा स्थल पर गंगाजल का छिड़काव करें और दीपक प्रज्वलित करें।
इसके बाद भगवान विष्णु को पंचामृत से स्नान कराएं और उन्हें वस्त्र, चंदन, अक्षत और फूल अर्पित करें। तुलसी दल अर्पित करना विशेष शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान भगवान विष्णु के मंत्रों का जप करें और पूर्णिमा व्रत कथा या सत्यनारायण कथा का पाठ करें। अंत में भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की आरती करें और प्रसाद का वितरण करें।
माघ पूर्णिमा पर क्या करें और क्या न करें
माघ पूर्णिमा के दिन पवित्र नदी में स्नान, जरूरतमंदों को तिल, अन्न, वस्त्र और घी का दान करना शुभ माना जाता है। इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। इसके साथ ही, इस दिन क्रोध, अहंकार और नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए।