Navratri 2024 1st Day Maa Shailputri Puja Vidhi, Mantra, Aarti: नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा इसलिए की जाती है क्योंकि मां पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं। हिमालय को पर्वतों का राजा माना जाता है जो सदैव अपने स्थान पर कायम रहता है। कहते हैं यदि भक्त अपने आराध्य के लिए ऐसी ही अडिग भावना रखे, तो उसके जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। इसी बात का ध्यान रखते हुए ही नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा का विधान बताया गया है। यहां आप जानेंगे मां शैलपुत्री की आरती।
मां शैलपुत्री आरती (Maa Shailputi Aarti)
शैलपुत्री मां बैल असवार। करें देवता जय जयकार।
शिव शंकर की प्रिय भवानी। तेरी महिमा किसी ने ना जानी
पार्वती तू उमा कहलावे। जो तुझे सिमरे सो सुख पावे।
ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू। दया करे धनवान करे तू।
सोमवार को शिव संग प्यारी। आरती तेरी जिसने उतारी।
उसकी सगरी आस पुजा दो। सगरे दुख तकलीफ मिला दो।
घी का सुंदर दीप जला के। गोला गरी का भोग लगा के।
श्रद्धा भाव से मंत्र गाएं। प्रेम सहित फिर शीश झुकाएं।
जय गिरिराज किशोरी अंबे। शिव मुख चंद्र चकोरी अंबे।
मनोकामना पूर्ण कर दो। भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो।
शैलपुत्री पूजा मंत्र (Maa Shailputri Mantra)
-या देवी सर्वभूतेषु शैलपुत्री रूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
-शिवरूपा वृष वहिनी हिमकन्या शुभंगिनी
पद्म त्रिशूल हस्त धारिणी
रत्नयुक्त कल्याणकारिणी
-ओम् ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्यै नम:
-बीज मंत्र- ह्रीं शिवायै नम:
-वन्दे वांच्छित लाभाय चंद्रार्धकृतशेखराम्
वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्
मां शैलपुत्री का स्वरूप
मां शैलपुत्री के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का फूल है। देवी के माथे पर अर्ध चंद्र है। माता नंदी बैल यानि वृषभ की सवारी करती हैं। मां शैलपुत्री का एक नाम सती भी है। मां शैलपुत्री को करुणा और स्नेह की देवी माना जाता है।
