अध्यात्म

राखी कैसे बांधे: भाई को किस दिशा में बैठाएं, पहले राखी बांधें या तिलक लगाएं, देखें राखी बांधने का सही तरीका स्टेप बाय स्टेप

रक्षाबंधन पर राखी कैसे बांधे (rakhi bandhne ka tarika step by step): रक्षाबंधन पर भाई को किस दिशा में बैठाकर राखी बांधनी चाहिए? जानें तिलक, अक्षत, आरती, राखी और मिठाई का सही क्रम। साथ ही नोट करें राखी बांधने का मंत्र।

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रक्षा बंधन पर भाई को राखी कैसे बांधें, यहां नोट करें स्टेप बाय स्टेप गाइड

रक्षाबंधन पर राखी कैसे बांधे (rakhi bandhne ka tarika step by step): रक्षाबंधन केवल भाई की कलाई पर रंगीन धागा बांधने का त्योहार नहीं है। इस छोटे-से रक्षा सूत्र में बहन की प्रार्थना, भाई का स्नेह और परिवार की कई यादें जुड़ी होती हैं। यही वजह है कि बहुत से घरों में राखी बांधने से पहले पूजा की पूरी तैयारी की जाती है। कहीं बहनें चौकी सजाती हैं तो कहीं घर के मंदिर के सामने ही भाई को बैठाकर राखी बांधी जाती है।

इस बीच एक सवाल अक्सर मन में आता है- भाई को किस दिशा में बैठाना चाहिए? तिलक पहले लगाएं या राखी बांधें? मिठाई कब खिलाएं और आरती किस समय करें? अलग-अलग परिवारों की परंपरा थोड़ी बदल सकती है, लेकिन सामान्य पूजा विधि का क्रम लगभग एक जैसा माना जाता है।

राखी बांधते समय भाई का मुंह किस दिशा में होना चाहिए

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राखी बंधवाते समय भाई का मुंह पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखना शुभ माना जाता है। पूर्व दिशा को सूर्य, ऊर्जा और नई शुरुआत से जोड़ा जाता है। उत्तर दिशा को सकारात्मकता और प्रगति की दिशा माना गया है।

बहन ऐसी जगह बैठे, जहां वह आसानी से भाई को तिलक लगाकर दाहिने हाथ की कलाई पर राखी बांध सके। यदि घर की बनावट के कारण पूर्व या उत्तर की ओर बैठाना संभव न हो तो इसे लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं है। साफ स्थान, शांत मन और स्नेह के साथ किया गया अनुष्ठान सबसे महत्वपूर्ण है।

भाई को दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके बैठाने से सामान्यतः बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि दिशा संबंधी मान्यताएं परिवार और क्षेत्र के अनुसार बदल सकती हैं।

रक्षाबंधन की पूजा थाली में क्या-क्या रखें

राखी की थाली बहुत भारी या दिखावटी होना जरूरी नहीं है। घर में उपलब्ध जरूरी पूजा सामग्री से इसे सादगी से तैयार किया जा सकता है।

पूजा सामग्रीउपयोग
राखी या रक्षा सूत्रभाई की दाहिनी कलाई पर बांधने के लिए
रोली या कुमकुममाथे पर तिलक लगाने के लिए
अक्षत यानी साबुत चावलतिलक पर लगाने और मंगल कामना के लिए
दीपकआरती और शुभता के प्रतीक के रूप में
मिठाईपूजा के बाद भाई का मुंह मीठा कराने के लिए
फूलपूजा और शुभकामना अर्पित करने के लिए
जल या छोटा कलशपूजा की परंपरा के अनुसार

दीपक जलाते समय थाली को सुरक्षित और समतल स्थान पर रखें। छोटे बच्चे पास हों तो खुली लौ का विशेष ध्यान रखें।

पहले तिलक लगाएं या राखी बांधें

सामान्य पूजा क्रम में सबसे पहले भाई के माथे पर रोली या कुमकुम का तिलक लगाया जाता है। इसके बाद तिलक पर अक्षत लगाए जाते हैं। फिर आरती उतारी जाती है और भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधी जाती है। अंत में मिठाई खिलाकर उसके अच्छे स्वास्थ्य, लंबी आयु और सुखी जीवन की कामना की जाती है।

भाई को राखी बांधने की सही विधि स्टेप बाय स्टेप

  • पूजा स्थान और राखी की थाली तैयार करें।
  • भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुंह करके बैठाएं।
  • भाई के माथे पर रोली या कुमकुम का तिलक लगाएं।
  • तिलक के ऊपर साबुत चावल यानी अक्षत लगाएं।
  • दीपक से भाई की आरती उतारें।
  • भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधें।
  • मिठाई खिलाएं और मन से शुभकामना दें।
  • भाई अपनी बहन को उपहार या आशीर्वाद दे और हमेशा साथ निभाने का वचन ले।

कुछ परिवारों में राखी बांधने के बाद आरती की जाती है। यदि आपके घर में वर्षों से ऐसा ही क्रम चला आ रहा है तो अपनी पारिवारिक परंपरा का पालन किया जा सकता है।

राखी किस हाथ में बांधी जाती है

भाई को राखी सामान्यतः दाहिने हाथ की कलाई पर बांधी जाती है। धार्मिक कार्यों और संकल्प में दाहिने हाथ को प्राथमिकता देने की परंपरा रही है।

राखी इतनी कसकर न बांधें कि कलाई पर निशान पड़ जाए या रक्त प्रवाह में परेशानी हो। बच्चों, बुजुर्गों और संवेदनशील त्वचा वाले लोगों के लिए मुलायम धागे वाली हल्की राखी चुनें।

राखी बांधने का मंत्र क्या है

राखी बांधते समय यह प्रचलित मंत्र बोला जा सकता है:

येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबलः।

तेन त्वाम् अभिबध्नामि, रक्षे मा चल मा चल॥

इस मंत्र का सरल भाव है- जिस रक्षा सूत्र से महाबली राजा बलि को बांधा गया था, उसी रक्षा सूत्र से मैं तुम्हें बांधती हूं। यह रक्षा सूत्र तुम्हारी रक्षा करे और अपने संकल्प से कभी न डिगे।

यदि संस्कृत मंत्र याद न हो तो बहन अपनी भाषा में भी भाई के स्वास्थ्य, सुरक्षा और सुख की प्रार्थना कर सकती है। पूजा का भाव केवल मंत्र के कठिन उच्चारण पर निर्भर नहीं करता।

राखी पर भाई को तिलक लगाने का सही तरीका

रोली या कुमकुम में थोड़ा-सा जल मिलाकर गाढ़ा तिलक तैयार करें। भाई के माथे के बीच में साफ उंगली से तिलक लगाएं। इसके बाद उस पर कुछ साबुत चावल चिपका दें।

बहुत अधिक रोली या गीला तिलक लगाने से बचें, खासकर यदि भाई की त्वचा संवेदनशील हो। बाजार के चमकीले रंग की जगह पूजा के लिए बनी अच्छी गुणवत्ता वाली रोली इस्तेमाल करना बेहतर है।

रक्षाबंधन पूजा में इन बातों का रखें ध्यान

  • राखी शुभ मुहूर्त में बांधें और भद्रा काल से बचने की स्थानीय पंचांग परंपरा का ध्यान रखें।
  • पूजा से पहले हाथ साफ करें और पूजा की सामग्री व्यवस्थित रखें।
  • टूटी हुई राखी, बासी मिठाई या खंडित दीपक का प्रयोग न करें।
  • राखी बांधते समय जल्दबाजी, नाराजगी या दिखावे से बचें।
  • भाई दूर हो तो वीडियो कॉल पर शुभकामना देकर राखी भेजी जा सकती है। दूरी से रिश्ते का भाव कम नहीं होता।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, परंपराओं और सामान्य प्रचलनों पर आधारित है। पूजा विधि और रीति-रिवाज क्षेत्र तथा परिवार के अनुसार अलग हो सकते हैं। पाठक अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा करें।

Medha Chawla
मेधा चावलाauthor

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।

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