अध्यात्म

Kabir Ke Dohe: 'माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रौंदे मोय'..कबीर दास जी के सबसे लोकप्रिय दोहे

  • Authored by: लवीना शर्मा
  • Updated Jun 4, 2023, 09:13 AM IST

Kabir Ke Dohe In Hindi: 'जग में बैरी कोई नहीं, जो मन शीतल होए, यह आपा तो डाल दे, दया करे सब कोए'... कबीर दास जी की जयंती (Kabir Das Jayanti 2023) के अवसर पर देखिए कबीर जी के सबसे लोकप्रिय दोहे।

Image

Kabir Das ji Ke Dohe In Hindi: तिनका कबहुं ना निंदए, जो पांव तले होए, कबहुं उड़ अंखियन पड़े, पीर घनेरी होए॥

Kabir Ke Dohe In Hindi: ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि को हर साल कबीर दास जी की जयंती (Kabir Das Jayanti 2023) मनाई जाती है। इस साल ये तिथि 4 जून 2023 को मनाई जा रही है। संत कबीर दास जी (Sant Kabir Das) 15वीं सदी के रहस्यवादी कवि थे। इनके दोहे जीवन की सच्चाई को बयां करते हैं साथ ही मनुष्य को सही राह पर चलने की प्ररेणा भी देते हैं। संत कबीर दास जी प्रसिद्ध कवि होने के साथ-साथ समाज सुधारक भी थे। इनकी रचनाओं में मुख्य रूप से अवधी, पूरबी, ब्रज भाषा, खड़ी बोली और राजस्थानी भाषा का समावेश देखने को मिलता है। कबीर दास जी भगवान राम के बड़े भक्त थे। इनकी जयंती के अवसर पर देखिए इनके सबसे लोकप्रिय दोहे।

Kabir Ke Dohe In Hindi

-माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रौंदे मोय।

एक दिन ऐसा आएगा, मैं रौंदूगी तोय॥

-ऐसी वाणी बोलिए मन का आप खोये ।

औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होए ।

-जग में बैरी कोई नहीं, जो मन शीतल होए ।

यह आपा तो डाल दे, दया करे सब कोए ।

-सब धरती काजग करू, लेखनी सब वनराज ।

सात समुद्र की मसि करूँ, गुरु गुण लिखा न जाए ।

-माला फेरत जुग गया, गया न मन का फेर ।

कर का मन का डा‍रि दे, मन का मनका फेर॥

-तिनका कबहुं ना निंदए, जो पांव तले होए।

कबहुं उड़ अंखियन पड़े, पीर घनेरी होए॥

-गुरु गोविंद दोऊं खड़े, काके लागूं पांय।

बलिहारी गुरु आपकी, गोविंद दियो बताय॥

-साईं इतना दीजिए, जा मे कुटुम समाय।

मैं भी भूखा न रहूं, साधु ना भूखा जाय॥

-धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय।

माली सींचे सौ घड़ा, ॠतु आए फल होय॥

-कबीरा ते नर अंध है, गुरु को कहते और।

हरि रूठे गुरु ठौर है, गुरु रूठे नहीं ठौर॥

-माया मरी न मन मरा, मर-मर गए शरीर।

आशा तृष्णा ना मरी, कह गए दास कबीर॥

-रात गंवाई सोय के, दिवस गंवाया खाय।

हीरा जनम अमोल है, कोड़ी बदली जाय॥

-दुःख में सुमिरन सब करें सुख में करै न कोय।

जो सुख में सुमिरन करे तो दुःख काहे होय॥

-बडा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर।

पंथी को छाया नहीं फल लागे अति दूर॥

-उठा बगुला प्रेम का तिनका चढ़ा अकास।

तिनका तिनके से मिला तिन का तिन के पास॥

-सात समंदर की मसि करौं लेखनि सब बनाई।

धरती सब कागद करौं हरि गुण लिखा न जाई॥

लवीना शर्मा
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

और पढ़ें
End of Article