Jitiya Puja Samagri: हिंदू धर्म में जितिया व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। ये व्रत महिलाएं अपनी संतान की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना से रखती हैं। इस व्रत की शुरुआत आश्विन कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि पर नहाय खाय के साथ होती है और समापन नवमी तिथि पर होता है। वहीं मुख्य व्रत अष्टमी तिथि पर रखा जाता है। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और फिर शुभ मुहूर्त में जितिया की विधि विधान पूजा करती हैं। चलिए आपको बताते हैं जितिया पूजा में क्या-क्या सामग्री की जरूरत पड़ेगी।
जितिया पूजा सामग्री लिस्ट
- कुश (जीमूतवाहन की प्रतिमा बनाने के लिए)
- गाय का गोबर (चील व सियारिन की आकृति बनाने के लिए)
- अक्षत यानि चावल
- पेड़ा
- दूर्वा की माला
- श्रृंगार का सामान
- सिंदूर पुष्प
- पान और सुपारी
- लौंग और इलायची
- मिठाई
- फल
- फूल
- गांठ का धागा
- धूप-दीप
- बांस के पत्ते
- सरसों का तेल
जितिया पूजा विधि
जितिया व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर विधि विधान पूजा करें। फिर पूरे दिन निर्जला व्रत रहें। शुभ मुहूर्त में जितिया व्रत की पूजा करें और कथा सुनें। फिर अगले दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान कर उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दें। इसके बाद विधि विधान पूजा करके व्रत खोल लें।
जितिया व्रत का महत्व
जीवित्पुत्रिका या जितिया व्रत माताएं अपनी संतान की लंबी आयु के लिए रखती हैं। कहते हैं इस दिन जो भी महिला सच्चे मन से व्रत कथा सुनती है उसे कभी भी अपनी संतान के वियोग का सामना नहीं करना पड़ता है। ये व्रत संतान का जीवन खुशियों से भर देता है।
