Janmashtami Vrat 2026: जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाया जाता है। इस दिन बड़ी संख्या में भक्त व्रत रखते हैं और रात 12 बजे भगवान कृष्ण के प्राकट्य के बाद पूजा-अर्चना करके व्रत खोलते हैं। हालांकि हर व्यक्ति के लिए निर्जल या लंबा उपवास रखना सही नहीं होता है। साल 2026 में यह व्रत 4 सितंबर को रखा जाएगा।
कुछ शारीरिक अवस्थाओं में लंबे समय तक भोजन और पानी से दूर रहने पर कमजोरी, चक्कर, लो ब्लड शुगर और डिहाइड्रेशन जैसी परेशानियां हो सकती हैं। ऐसे लोगों के लिए उपवास करने की बजाय भगवान श्रीकृष्ण की पूजा, भजन और नाम जप करना बेहतर विकल्प है। इसके अलावा धार्मिक परंपराओं में भी कुछ परिस्थितियों में व्रत न रखने के नियम बताए जाते हैं। आइए जानते हैं किन लोगों को जन्माष्टमी का व्रत रखने से बचना चाहिए।
जो लोग हलषष्ठी का व्रत रखते हैं
जन्माष्टमी से पहले हलषष्ठी या हलछठ का व्रत आता है। यह भगवान बलराम से जुड़ा पर्व है। माना जाता है कि अगर आप भगवान बलराम का व्रत रखते हैं तो आपको कान्हा का व्रत नहीं रखना चाहिए। इसके पीछे मुख्य कारण दोनों ही व्रत बच्चों के लिए होना है। वहीं, विज्ञान के अनुसार, लगातार दो कठिन व्रत रखने से सेहत से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।
गर्भवती महिलाएं
गर्भावस्था में महिला के शरीर को अतिरिक्त पोषण और पर्याप्त पानी की जरूरत होती है। लंबे समय तक भूखा या निर्जल रहने से कमजोरी और डिहाइड्रेशन हो सकता है। गर्भवती महिलाएं जन्माष्टमी पर व्रत रखने की बजाय भगवान श्रीकृष्ण की पूजा कर सकती हैं। अगर व्रत रखना हो तो अपनी डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही खान-पान तय करें। इसके साथ ही स्तनपान कराने वाली महिलाओं को लंबे समय तक भूखे रहने से बचना चाहिए। मां के शरीर को पर्याप्त कैलोरी और तरल पदार्थ की जरूरत होती है। जन्माष्टमी पर ऐसी महिलाएं व्रत के बजाय पूजा-पाठ और कृष्ण नाम का जाप कर सकती हैं। धार्मिक भावना बनाए रखने के लिए फलाहार या सामान्य सात्विक भोजन का विकल्प अपनी स्थिति के अनुसार चुना जा सकता है।
डायबीटीज के मरीज
डायबीटीज में लंबे समय तक खाना न खाने से ब्लड शुगर का स्तर असंतुलित हो सकता है। खासतौर पर जो लोग इंसुलिन या ब्लड शुगर कम करने वाली दवाएं लेते हैं, उनके लिए बिना चिकित्सकीय सलाह के उपवास करना परेशानी पैदा कर सकता है। ऐसे लोग जन्माष्टमी पर पूजा और भक्ति कर सकते हैं, लेकिन उपवास रखने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग वाले लोग
हाई ब्लड प्रेशर या हृदय रोग से जूझ रहे लोगों को भी लंबा या निर्जल व्रत रखने से बचना चाहिए। दवाओं का समय बदलना, पानी कम पीना या लंबे समय तक भोजन न करना कुछ लोगों के लिए परेशानी बढ़ा सकता है। ऐसे में जन्माष्टमी की पूजा करें, लेकिन स्वास्थ्य के साथ समझौता करके कठिन व्रत न रखें।
पीरियड्स वाली स्त्रियां
मासिक धर्म के दौरान व्रत रखने को लेकर अलग-अलग परिवारों और धार्मिक परंपराओं में अलग नियम हैं। कुछ परंपराओं में इस दौरान महिलाओं को पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों से दूर रखा जाता है, जबकि कई परिवारों में महिलाएं अपनी सुविधा के अनुसार पूजा और व्रत करती हैं। इस दौरान शरीर में कमजोरी, दर्द या ज्यादा ब्लीडिंग हो तो कठिन या निर्जल व्रत रखने से बचना चाहिए। अपनी शारीरिक स्थिति को प्राथमिकता दें और परिवार की धार्मिक परंपरा के अनुसार पूजा का तरीका तय करें।
सूतक या पातक काल
परिवार में किसी करीबी सदस्य की मृत्यु होने पर सूतक या पातक की स्थिति मानी जाती है। इस अवधि में धार्मिक कर्मकांड और पूजा-पाठ को लेकर अलग-अलग परंपराओं में नियम होते हैं। कुछ धार्मिक परंपराओं में इस दौरान व्रत और नियमित पूजा न करने का नियम रखा जाता है। ऐसे लोगों को जन्माष्टमी का व्रत नहीं करना चाहिए।
