अध्यात्म

Hariyali Teej Geet Lyrics: हरियाली गीत के दिन जरूर गाएं ये भजन और झूला गीत, नोट कर लें गाने के लिरिक्स

Hariyali Teej Geet Lyrics (हरियाली तीज के गीत): हरियाली तीज पर लोकगीत गाने की परंपरा रहा है। इस दिन व्रती महिलाएं पूजा करती हैं और झूला झूलते हुए गीत और भजन गाती हैं। यहां हम आपके लिए हरियाली तीज के गीत के लिरिक्स लेकर आए हैं। इन्हें आप नोट कर सकती हैं और गुनगुना सकती हैं।

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हरियाली तीज के गीत लिरिक्स (Photo Source: Canva)

Hariyali Teej Geet Lyrics (हरियाली तीज के गीत): सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन यानी आज हरियाली तीज मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में ऐसी मान्यता है कि हरियाली तीज में भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती की विधि विधान से पूजा करने पर सारी मनोकामना पूरी होती है। इस व्रत में पूजा-पाठ के साथ झूला झूलने और लोकगीत गाने की भी परंपरा है। यहां से आप झूला गीत के लिरिक्स और लोकगीत के लिरिक्स हिंदी में देख सकते हैं।

1. झुला झूल रही सब सखियां

झुला झूल रही सब सखियां, आई हरयाली तीज आज,

राधा संग में झूलें कान्हा झूमें अब तो सारा बाग,

झुला झूल रही सब सखियां, आई हरयाली तीज आज,

नैन भर के रस का प्याला देखे, श्यामा को नंद लाला,

घन बरसे उमड़-उमड़ के देखो नृत्य करे बृज बाला,

छमछम करती ये पायलियां खोले मन के सारे राज,

झुला झूल रही सब सखियां, आई हरयाली तीज आज।

2. सावन दिन आ गए

अरी बहना! छाई घटा घनघोर, सावन दिन आ गए।

उमड़-घुमड़ घन गरजते, अरी बहना! ठण्डी-ठण्डी पड़त फुहार,

सावन दिन...

बादल गरजे बिजली चमकती, अरी बहना! बरसत मूसलधार।

सावन दिन...

कोयल तो बोले हरियल डार पे, अरी बहना! हंसा तो करत किलोल।

सावन दिन...

वन में पपीहा पिऊ पिऊ रटै, अरी बहना! गौरी तो गावे मल्हार।

सावन दिन...

सखियां तो हिलमिल झूला झूलती, अरी बहना! हमारे पिया परदेस।

सावन दिन...

लिख-लिख पतियां मैं भेजती, अजी राजा सावन की आई बहार।

सावन दिन...

हमरा तो आवन गोरी होय ना, अजी गोरी! हम तो रहे मन मार।

सावन दिन...

राजा बुरी थारी चाकरी,

अजी राजा जोबन के दिन चार

सावन दिन...

3. नांनी नांनी बूंदियां

नांनी नांनी बूंदियां हे सावन का मेरा झूलणा,

एक झूला डाला मैंने बाबल के राज में,

बाबुल के राज में...

संग की सहेली हे सावन का मेरा झूलणा,

नांनी नांनी बूंदियां, हे सावन का मेरा झूलणा।

ए झूला डाला मैंने भैया के राज में,

भैया के राज में..

गोद भतीजा हे सावन का मेरा झूलणा,

नांनी नांनी बूंदियां हे सावन का मेरा झूलणा...

4. अम्मा मेरी रंग भरा जी

अम्मा मेरी रंग भरा जी, ए जी कोई आई हैं हरियाली तीज।

घर-घर झूला झूलें कामिनी जी, बन बन मोर पपीहा बोलता जी।

एजी कोई गावत गीत मल्हार,सावन आया...

कोयल कूकत अम्बुआ की डार पें जी, बादल गरजे, चमके बिजली जी।

एजी कोई उठी है घटा घनघोर, थर-थर हिवड़ा अम्मा मेरी कांपता जी।

5. सावन का महीना

सावन का महीना, झुलावे चित चोर, धीरे झूलो राधे पवन करे शोर,

मनवा घबराये मोरा बहे पूरवैया, झूला डाला है नीचे कदम्ब की छैयां…

कारी अंधियारी घटा है घनघोर, धीरे झूलो राधे पवन करे शोर,

सखियां करे क्या जाने हमको इशारा, मन्द मन्द बहे जल यमुना की धारा…

सावन का महीना झूलावे चित चोर…

श्री राधेजी के आगे चले ना कोई जोर, धीरे झूलो राधे, पवन करे शोर,

मेघवा तो गरजे देखो बोले कोयल कारी, पाछवा में पायल बाजे नाचे बृज की नारी…

श्री राधे परती वारो हिमरवाकी और, धीरे झूलो राधे पवन करे शोर,

सावन का महीना झूलावे चित चोर…

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

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