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क्या खत्म होने जा रहा है अमेरिका-ईरान संघर्ष? ट्रंप ने रोके हमले, जानें ओमान की मध्यस्थता से कैसे बढ़ीं शांति की उम्मीदें

US Iran Peace Talk: अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव के बीच राहत के संकेत मिल रहे हैं। अमेरिका ने फिलहाल ईरान पर एयरस्ट्राइक रोक दी है, जबकि ओमान की मध्यस्थता में दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ रही है। हालांकि, अभी कोई औपचारिक शांति समझौता नहीं हुआ है। ऐसे में सवाल बना हुआ है कि क्या यह स्थायी शांति की शुरुआत है या फिर अगले बड़े संघर्ष से पहले का अस्थायी विराम।

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अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के वजह से पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीद। AI IMAGE
Authored by: Piyush Kumar
Updated Jul 27, 2026, 19:33 IST
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दुनिया के लिए राहत की खबर सामने आई है। अमेरिका-ईरान युद्ध की आग धीरे-धीरे ही सही, लेकिन बुझती नजर आ रही है। दरअसल, करीब पांच महीने से अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव अब ऐसे मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है, जहां पहली बार युद्ध के साथ-साथ कूटनीति भी बराबरी से आगे बढ़ रही है। अमेरिका ने लगभग दो हफ्तों तक लगातार हवाई हमले करने के बाद फिलहाल अपने एयरस्ट्राइक रोक दिए हैं। दूसरी ओर, ओमान की मध्यस्थता में दोनों देशों के बीच बातचीत का सिलसिला भी तेज हो गया है।

हालांकि, सवाल अब भी यही है कि क्या यह युद्ध खत्म होने की शुरुआत है या फिर अगले बड़े हमले से पहले का सिर्फ एक विराम? पिछले कुछ दिनों तक अमेरिका लगातार ईरान के सैन्य ठिकानों, तटीय रक्षा प्रणाली और अहम इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना रहा था। जवाब में ईरान ने भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में जहाजों पर हमले किए और समुद्री रास्तों पर नियंत्रण कड़ा कर दिया। लेकिन अब हालात कुछ बदलते नजर आ रहे हैं।

अमेरिका ने लगातार 13 रात तक हमले करने के बाद पहली बार एयरस्ट्राइक रोक दी है। वहीं, ईरान ने भी अमेरिकी सैन्य ठिकानों वाले पड़ोसी देशों पर जवाबी कार्रवाई फिलहाल धीमी कर दी है। ओमान की मध्यस्थता में बातचीत आगे बढ़ रही है और दोनों देश अंतरिम युद्धविराम की शर्तों पर चर्चा कर रहे हैं। यानी पहली बार दोनों पक्ष एक साथ 'लड़ भी रहे हैं और बातचीत भी कर रहे हैं।'

us iran talk (4)

us iran talk (4)

क्या अमेरिका अब युद्ध नहीं चाहता?

ऐसा बिल्कुल नहीं कहा जा सकता। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा है कि उनके सामने दो विकल्प हैं। पहला, सैन्य कार्रवाई जारी रखकर ईरान को लगातार कमजोर करना। दूसरा, बातचीत के जरिए समझौते तक पहुंचना। ट्रंप का कहना है कि फिलहाल दोनों रास्ते खुले हैं। यानी अमेरिका ने युद्ध छोड़ा नहीं है, बल्कि बातचीत को एक मौका दिया है।

ट्रंप आखिर चाहते क्या हैं?

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का लक्ष्य सिर्फ सैन्य जीत हासिल करना नहीं, बल्कि ईरान को बातचीत की मेज पर मजबूर करना भी है। इसी रणनीति के तहत पहले लगातार हमले किए गए और अब कुछ समय का विराम देकर यह देखा जा रहा है कि ईरान का अगला कदम क्या होता है। यानी 'पहले दबाव, फिर बातचीत।'

ट्रंप ईरान पर बातचीत के साथ-साथ दबाव भी बना रहे।

ट्रंप ईरान पर बातचीत के साथ-साथ दबाव भी बना रहे।

ईरान क्या चाहता है?

ईरान की स्थिति थोड़ी जटिल है। एक तरफ उसका कहना है कि अमेरिका के साथ कोई औपचारिक वार्ता नहीं चल रही है। वहीं दूसरी तरफ, ईरान ने यह भी स्वीकार किया है कि ओमान के साथ तकनीकी स्तर पर कई दौर की बातचीत हुई है और उसमें प्रगति भी हुई है। इसका मतलब साफ है कि पर्दे के पीछे संपर्क पूरी तरह टूटा नहीं है।

अमेरिका-ईरान की बातचीत से दुनिया में राहत। AI IMAGE

अमेरिका-ईरान की बातचीत से दुनिया में राहत। AI IMAGE

आखिर बातचीत किस मुद्दे पर हो रही है?

इस समय सबसे बड़ा मुद्दा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ही है। यही वह समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का कारोबार होता है। युद्ध शुरू होते ही ईरान ने यहां जहाजों पर हमले शुरू कर दिए। इसके बाद तेल की कीमतों में तेजी आई, दुनिया की सप्लाई चेन प्रभावित हुई और कई जहाजों ने अपना रास्ता बदल दिया। अब दोनों देशों के बीच सबसे बड़ी बातचीत इसी जलमार्ग को दोबारा सामान्य बनाने को लेकर हो रही है। सूत्रों के मुताबिक, बातचीत का केंद्र यह है कि जहाज पहले की तरह गुजर सकें, ईरान सुरक्षा बनाए रखे, जहाजों पर कम प्रतिबंध हों और समुद्री व्यापार सामान्य हो जाए। हालांकि, अंतिम समझौता अभी नहीं हुआ है।

होर्मुज इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

इस सवाल का जवाब दुनिया अब तक जान चुकी है, लेकिन एक बार फिर समझ लेते हैं। अगर यह रास्ता बंद होता है, तो दुनिया में तेल महंगा हो जाता है। पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ जाती हैं। एशिया और यूरोप की सप्लाई चेन प्रभावित होती है। भारत, चीन और जापान जैसे बड़े आयातक देशों पर सीधा असर पड़ता है। यही वजह है कि पूरी दुनिया की नजर इस जलमार्ग पर टिकी हुई है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत जारी।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत जारी।

अमेरिका ने अचानक हमले क्यों रोके?

राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में मध्य पूर्व के वरिष्ठ निदेशक रहे माइकल सिंह के मुताबिक, इसके पीछे दो संभावनाएं हो सकती हैं। पहली, यह केवल सैन्य रणनीति के तहत लिया गया ऑपरेशनल ब्रेक हो। दूसरी, पर्दे के पीछे चल रही बातचीत को मौका देने के लिए जानबूझकर हमले रोके गए हों। अगर यह विराम कई दिनों तक जारी रहता है, तो इसे बड़ी कूटनीतिक सफलता माना जा सकता है।

क्या इजरायल भी अब पीछे हट गया है?

दिलचस्प बात यह है कि इस बार अमेरिका के नए हमलों में इजरायल की सक्रिय भूमिका पहले जैसी दिखाई नहीं दी। हालांकि, अगले सप्ताह प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की ट्रंप से मुलाकात होने वाली है। इस बैठक में कई अहम फैसले हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इजरायल दोबारा सक्रिय हुआ, तो युद्ध फिर तेज हो सकता है। वहीं, अगर अमेरिका कूटनीति को प्राथमिकता देता रहा, तो तनाव कम होने की संभावना बढ़ सकती है।

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की फाइल फोटो। AP

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की फाइल फोटो। AP

ईरान की सबसे बड़ी मुश्किल क्या है?

विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान के भीतर सत्ता कई गुटों में बंटी हुई है। अगर सरकार अमेरिका से समझौता करती है, तो कट्टरपंथी गुट इसे उसकी कमजोरी मान सकते हैं। यही वजह है कि ईरान बातचीत भी करना चाहता है और सार्वजनिक तौर पर अपनी सख्त छवि भी बनाए रखना चाहता है।

ट्रंप पर घरेलू दबाव कितना है?

दरअसल, युद्ध का असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं है। अमेरिका में पेट्रोल महंगा हुआ है, महंगाई बढ़ी है और खाद्य पदार्थों की कीमतों पर भी असर पड़ा है। इतना ही नहीं, इसी साल अमेरिका में मध्यावधि चुनाव होने हैं। विपक्ष का आरोप है कि लंबा युद्ध रिपब्लिकन पार्टी को नुकसान पहुंचा सकता है। हालांकि, ट्रंप का कहना है, "मैं चुनाव की वजह से जल्दबाजी में फैसला नहीं करूंगा। पहले सही फैसला होगा, चुनाव बाद में।"

क्या अभी भी खतरा टला नहीं है?

बिल्कुल नहीं। इसी बीच यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में भी तनाव बढ़ गया है। वहीं, अमेरिकी नौसेना ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी जारी रखे हुए है। यानी पश्चिम एशिया अभी भी बेहद संवेदनशील स्थिति में बना हुआ है। क्या सचमुच खत्म होने जा रहा है अमेरिका-ईरान युद्ध? इसका जवाब फिलहाल 'नहीं, लेकिन उम्मीद जरूर बढ़ी है।'

अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष फिलहाल युद्ध और कूटनीति के बीच झूलता हुआ दिखाई दे रहा है। एक ओर मिसाइलों की आवाज कुछ धीमी हुई है, तो दूसरी ओर बातचीत के चैनल पहले से ज्यादा सक्रिय हुए हैं। यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि युद्ध पूरी तरह समाप्त होने वाला है। लेकिन इतना जरूर है कि पिछले कई महीनों में पहली बार दोनों पक्षों के पास गोलियों की बजाय बातचीत के जरिए समाधान तलाशने का वास्तविक अवसर मौजूद है। यही आने वाले दिनों में तय करेगा कि पश्चिम एशिया स्थायी शांति की ओर बढ़ेगा या फिर एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव की आग में झोंक दिया जाएगा।

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