अध्यात्म

Gupt Navratri 2023: नौ दिन की ही क्यों होती है नवरात्रि पूजा, पढ़ें क्या होते हैं इन दिनों के नियम

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jan 21, 2023, 11:03 PM IST

Gupt Navratri 2023: नवरात्रि महोत्सव 9 के बजाए हो सकता है आठ या 10 दिन का भी। 22 जनवरी से शुरू होंगे माघ गुप्त नवरात्रि और 30 जनवरी को होंगे समाप्त। नवरात्रि पूजन में न लगाएं किसी अन्य घर बना भाेग। नौ दिन नवरात्रि के क्यों होते हैं महत्वपूर्ण आइये देते हैं इस पर जानकारी।

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गुप्त नवरात्रि पूजन

KEY HIGHLIGHTS
  • नवरात्रि महोत्सव नौ से कम या अधिक दिन के भी होते हैं
  • गुप्त नवरात्रि 22 जनवरी से आरंभ होकर 30 जनवरी तक
  • शक्ति एवं कुलदेवता के अनुसार होना चाहिए नवरात्रि पूजन

Gupt Navratri 2023: मां आदिशक्ति की पूजा को समर्पित नौ दिन। नवरात्रि के पुण्यशाली दिन जब घर-घर में मां भवगती वास करती हैं। लेकिन कभी सोचा है कि शक्ति आराधना के लिए नौ दिन ही क्यों चुने गए हैं। “नवरात्र” शब्द नव संख्यावाचक होने से नवरात्र के दिनों की संख्या नौ तक ही सीमित होनी चाहिए लेकिन ये सत्य नहीं है। कुछ परिवारों में सात दिनों के तो कुछ परिवारों में 9 दिनों के नवरात्रि होते हैं। देवी भागवत पुराण के अनुसार देवी दुर्गा और महिषासुर के युद्ध नौ दिन तक युद्ध चला था। इस दौरान देवता देवी की आराधना एवं स्तुति पूरे नौ दिन तक करते रहें। इसी वजह से शक्ति आराधना का पर्व नौ दिन का होता है। इन नौ दिनों के मध्य आंतरिक शारीरिक चेतना और प्रकृति में परिवर्तन होते हैं। मां पार्वती के नौ रूपों की पूजा इन दिनों की जाती है।

एक ही परिवार के सदस्य यदि अलग अलग घरों में रहते हैं तो सभी घरों में होनी चाहिए नवरात्रि पूजन। जैसे पिता और पुत्र अलग−अलग घर में रहते हैं। तो इस स्थिति में दोनों घरों में ही नवरात्रि का पूजन होना आवश्यक होता है। ध्यान रखें कि इन दिनों में किसी अन्य घर में बने भाेजन का भोग देवी को नहीं लगाना चाहिए।

नवरात्रि पूजन विधान

नवरात्रि पूजन में देवी की षोडशाेपचार विधि से पूजन कर स्थापना की जाती है। अखंड दीप प्रज्वलन, माला बंधन, देवी महात्म्य का पठन, उपवास और जागरण आदि विविध कार्यक्रम करके अपनी शक्ति एवं कुलदेवता या देवी के अनुसार नवरात्रि महोत्सव संपन्न किया जाता है। खेत से मृत्तिका लाकर उसकी दो अंगुल चौड़ी चौकोर सतह बनाएं एवं उसमें सप्त धान्य बोएं। उसी तरह तांबे का कलश लेकर उसमें जल, गंध, फूल, अक्षत, सुपारी, पंचपल्लव, पंचरत्न और सिक्के डालें।

यदि भक्त का उपवास हो तो भी देवी को सदैव की तरह भोग अर्पित करना चाहिए। इस कालावधि में उत्कृष्ट आचार के एक अंग के स्वरूप हजामत न करें और कड़े ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करें। पलंग या गद्दे पर नहीं सोना चाहिए। बहुत से लोग नवरात्रि में पहले और आखिरी दिन ही उपवास रखते हैं। किसी भ्रम में न पड़ें। दो दिन उपवास रखकर भी नवरात्रि का फल प्राप्त कर सकते हैं साथ ही शारीरिक एवं मानसिक आरोग्य के लिए भी ये बहुत उपकारक सिद्ध होते हैं। अष्टमी और नवमी के दिन कन्याओं का पूजन प्रायः सर्वत्र किया जाता है।

(डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्‍स नाउ नवभारत इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है।)

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