क्या आपने कभी ऐसे बर्तन देखे हैं जो देखने में किसी प्रीमियम डिजाइनर कुकवेयर जैसे लगें, लेकिन उनकी कहानी किसी फैक्ट्री नहीं, बल्कि सदियों पुरानी भारतीय परंपरा से जुड़ी हो? बेशक ही हर ट्रेंड सोशल मीडिया से पैदा नहीं होता। कुछ ट्रेंड इतिहास के पन्नों और शाही महलों से लौटते हैं और लोगों की बदलती जरूरतों के साथ फिर से अपनी जगह बना लेते हैं। मणिपुर की ब्लैक पॉटरी (Black Pottery) ऐसी ही एक शाही विरासत है, जो आज आधुनिक रसोई में नई पहचान बना रही है। जब दुनिया प्लास्टिक और केमिकल-कोटेड कुकवेयर से आगे बढ़कर प्राकृतिक, टिकाऊ विकल्पों की तलाश कर रही है। तब भारत के पूर्वोत्तर के एक छोटे-से गांव में बनाए जाने वाले बर्तन दुनिया भर में अपनी पहचान बना रहे हैं।
मणिपुर के काली मिट्टी वाले बर्तन (Photo Credit - Goodearthindia)
नॉर्थ ईस्ट के लॉन्गपी में सदियों से बन रहे ये काले बर्तन, अब मॉडर्न रसोई का हिस्सा बनते जा रहे हैं। पहले इन बर्तनों को शाही घरानों में इस्तेमाल किया जाता था। ब्लैक पॉटरी को उस जमाने में रॉयल पॉटरी ही कहा जाता था। इन काले बर्तनों को के बिना किसी मशीन के, सिर्फ हाथों की मेहनत और नेचुरल सामग्री से तैयार किया जाता है। और हर बर्तन अपने आप में अनोखे, लॉग्ग लास्टिंग और एस्थेटिक होते हैं।
क्या होती है ब्लैक पॉटरी?
ब्लैक पॉटरी मणिपुर के उखरुल जिले के लॉन्गपी गांव की पारंपरिक हस्तकला है। इसे मुख्य रूप से थंगखुल नगा समुदाय पीढ़ियों से बनाता आ रहा है। इन बर्तनों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन्हें बनाने के लिए कुम्हार का चाक इस्तेमाल नहीं किया जाता। हर बर्तन हाथों, लकड़ी के औजारों और सांचों की मदद से तैयार होता है। इसी वजह से हर पीस थोड़ा अलग और बिल्कुल यूनिक दिखाई देता है।
लाल मिट्टी के बर्तनों से कितनी अलग है?
लाल मिट्टी के बर्तन
- सामान्य मिट्टी से बनते हैं।
- जल्दी गर्म हो जाते हैं।
- ज्यादा झटका मिलने पर टूटने की संभावना रहती है।
- आमतौर पर लाल या भूरे रंग के होते हैं।
लाल मिट्टी के बर्तनों और ब्लैक पॉटरी में क्या अंतर है
ब्लैक पॉटरी
- खास पत्थर और स्थानीय मिट्टी के मिश्रण से तैयार होती है।
- ज्यादा मजबूत मानी जाती है।
- प्राकृतिक चमकदार काला रंग इसकी पहचान है।
- देखने में बेहद प्रीमियम और आधुनिक लगती है।
कैसे बनती है ब्लैक पॉटरी?
इन दिनों पॉटरी बनाने का शौक बहुत से लोगों के सिर पर संवार है। कई लोग पॉटरी क्लासेस तो थेरेपी की तरह रिलैक्सिंग मानते हैं। लेकिन लाल मिट्टी के बर्तन बनाने जैसे ब्लैक पॉटरी की प्रक्रिया आसान नहीं होती है।
अगर आपको पॉटरी में दिलचस्पी है, तो बता दें कि काले बर्तन बनाने के लिए सबसे पहले लोकलसर्पेन्टाइन पत्थर को बारीक पीसा जाता है। फिर इसमें खास मिट्टी मिलाकर मिश्रण तैयार किया जाता है। इसके बाद कारीगर अपने हाथों से बर्तन को आकार देते हैं। फिर जब बर्तन सूख जाता है, तब उसे तेज आग में पकाया जाता है। आखिर में खास पौधे की पत्तियों से पॉलिश की जाती है, जिससे इसका नेचुरल काला रंग और हल्की चमक सामने आती है।
मॉडर्न किचन में बढ़ी ब्लैक पॉटरी की डिमांड?
आज लोग ऐसे बर्तन चाहते हैं जो देखने में सुंदर हों और लंबे समय तक चलें। ब्लैक पॉटरी में दाल, सब्जी, सूप, स्टू और धीमी आंच पर बनने वाली रेसिपी आराम से पकाई जा सकती हैं। ये बर्तन गर्मी को देर तक संभालकर रखते हैं, इसलिए कई लोगों को इनमें बना खाना ज्यादा स्वादिष्ट लगता है। इसके अलावा ये डाइनिंग टेबल पर भी बेहद आकर्षक दिखाई देते हैं। इसलिए अब लोग इन्हें सिर्फ कुकिंग ही नहीं, बल्कि सर्विंग के लिए भी खरीद रहे हैं। शाही फील वाले इन बर्तनों की इसलिए इतनी भारी डिमांड है।
रॉयल पॉटरी के नाम से जाना जाती है
कहां से खरीद सकते हैं?
अगर आप ब्लैक पॉटरी खरीदना चाहते हैं, तो इसके कई विकल्प मौजूद हैं।
- मणिपुर के लोकल हस्तशिल्प बाजार
- राज्य सरकार द्वारा आयोजित हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट मेले
- बड़े क्राफ्ट एग्जीबिशन
- ऑनलाइन हैंडीक्राफ्ट प्लेटफॉर्म
- कुछ प्रीमियम होम डेकोर और आर्ट स्टोर्स
लॉन्गपी ब्लैक पॉटरी की कीमत कितनी होती है?
ब्लैक पॉटरी पूरी तरह हाथ से बनाई जाती है, इसलिए इसकी कीमत सामान्य मिट्टी के बर्तनों से अधिक होती है।
छोटे बाउल या कप लगभग ₹500–₹1,000 तक मिल सकते हैं।
कुकिंग पॉट ₹1,500–₹4,000 या उससे अधिक तक हो सकते हैं।
बड़े सर्विंग सेट या सजावटी पीस की कीमत ₹5,000 से ऊपर भी जा सकती है।
ऐसे करें देखभाल
ब्लैक पॉटरी के बर्तनों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए पहली बार इस्तेमाल से पहले इन्हें अच्छी तरह सीजन करें। तेज़ आंच और अचानक ठंडे पानी से बचें, मुलायम स्पंज से साफ करें और पूरी तरह सुखाकर रखें। हार्ड मेटल स्क्रबर का इस्तेमाल न करें, ताकि इनकी सुंदरता और मजबूती बरकरार रहे।
मणिपुर की ब्लैक पॉटरी सिर्फ एक बर्तन नहीं, बल्कि भारतीय कारीगरों की मेहनत, सदियों पुरानी परंपरा और आज की सस्टेनेबल सोच का बेहतरीन उदाहरण है। जिसे आप भी अपनी रसोई का हिस्सा बना सकते हैं।
