Ganga Dussehra Dwar Patra Photos
Ganga Dussehra Dwar Patra Photos, Mantra: गंगा दशहरा पर द्वार पत्र लगाने की परंपरा मुख्य रूप से उत्तराखंड में प्रचलित है। यहां हर व्यक्ति अपने घर के मेन गेट पर द्वार पत्र लगाता है। मान्यताओं अनुसार द्वार पत्र लगाने से बहुत अधिक लाभ मिलता है। इसे बेहद शुभ माना गया है। कहते हैं इससे घर में नकारात्मक शक्तियां प्रवेश नहीं कर पातीं। साथ ही घर में सदैव सुख-समृद्धि बनी रहती है। ये भी मान्यता है कि द्वारपत्र को लगाने से प्राकृतिक आपदाओं का भी भय नहीं रहता। चलिए जानते हैं द्वार पत्र कैसे लगाया जाता है।
Ganga Dussehra Wishes In Hindi
द्वार पत्र वर्गाकार यानि Square शेप के कागज के टुकड़े पर वृताकार (Circular) आकार में होते हैं जिसमें घेरे के चारों ओर त्रिभुजाकार डिजाइन बना होता है। इसके बीच में भगवान श्री गणेश, मां गंगा, माँ लक्ष्मी, श्री हनुमान या भगवान शंकर का चित्र बना होता है और भगवान के चित्र के चारों ओर संस्कृत में एक मंत्र लिखा होता है। द्वार पत्र पीले, लाल और हरे रंग में होता है। (गंगा दशहरा पूजा विधि)
अगस्त्यश्च पुलस्त्यश्च वैशम्पायन एव च।
जैमिनिश्च सुमन्तुश्च पञ्चैते वज्र वारका:।।1।।
मुने कल्याण मित्रस्य जैमिनेश्चानु कीर्तनात।
विद्युदग्निभयंनास्ति लिखिते च गृहोदरे।।2।।
यत्रानुपायी भगवान् हृदयास्ते हरिरीश्वर:।
भंगो भवति वज्रस्य तत्र शूलस्य का कथा।।3।।
इस दिन श्रद्धालु सुबह जल्दी उठ कर नहा धोकर घर को गोबर और लाल मिट्टी से लिपते हैं। इसके बाद ईश्वर की पूजा करते हैं औक घर की दहलीज और खिड़की दरवाजों पर गंगा दशहरा द्वारपत्र लगाते हैं और फिर उसपर अक्षत अर्पित करते हैं। पहले के समय पंडित जी लोग ये द्वार पत्र अपने हाथों से बनाकर देते थे। लेकिन अब धीरे धीरे बाजार में ये मिलने लगे हैं।
कहते हैं मेन गेट पर गंगा दशहरा द्वार पत्रल गाने से घर में नकारात्मक शक्तियां प्रवेश नहीं कर पाती हैं। साथ ही घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।द्वारपत्रों प्राकृतिक आपदाओं से भी बचाते हैं।