अध्यात्म

कब होगी आपकी मृत्यु, बताएगा ये रहस्यमय मंदिर, यहां पत्तों पर लिखी है आपकी जीवनगाथा

Mysterious Temples Of India: क्या आप जानते हैं कि आपकी मौत कब होगी? सुनने में प्रश्न बेहद डरावना लगता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसे जाना जा सकता है! जी हां भारत में एक ऐसा मंदिर भी है, जहां यह मान्यता है कि यहां पर आपकी मृत्यु का समय प्रिडिक्ट किया जा सकता है।

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वैतेश्वरन कोइल मंदिर

Mysterious Temples Of India: कई लोग अपने भविष्य को जानने के लिए ज्योतिषियों के पास जाते हैं। वे चाहते हैं कि उन्हें पता चले कि जीवन में आगे क्या घटने वाला है, जिससे वे उन घटनाओं के लिए प्रिपेयर हो सकें या सुधार कर सकें। हालांकि कई शास्त्रों के अनुसार व्यक्ति के जन्म के साथ ही उसका भविष्य और मृत्यु तय हो जाते हैं, लेकिन क्या आप अपने भविष्य के साथ ही अपनी मृत्यु के बारे में जान सकते हैं?

यह सवाल काफी पेंचीदा है, लेकिन इसका उत्तर कइयों को डरावना लग सकता है, क्योंकि इसका जवाब हां है। जी हां भारत के तमिलनाडु राज्य में एक ऐसा मंदिर भी है, जहां आपके फ्यूचर ही नहीं आपकी मृत्यु को भी प्रिडिक्ट किया जा सकता है।

हालांकि सुनने में ये भले ही काल्पनिक लगे, लेकिन वहां के लोगों का मानना है कि यह बिल्कुल सत्य है। लोगों का यही विश्वास ही उन्हें तमिलनाडु के इस छोटे से शहर में आने के लिए आकर्षित करता है।

कौन सा है यह मंदिर?

यह मंदिर तमिलनाडु के नागापट्टिनम जिले में स्थित है। इसे वैतेश्वरन कोइल मंदिर के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है, लोग भगवान शिव को यहां वैद्यनाथ या वैदीश्वरन के रूप में पूजते हैं। इस मंदिर में मंगल दोष निवारण के लिए भी पूजन किया जाता है।

क्यों है प्रसिद्ध?

यह मंदिर दो मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है। पहली मान्यता है कि यहां पूजा करने से भक्तों को रोगों से मुक्ति मिलती है। वहीं, दूसरी प्रसिद्धि का कारण इस मंदिर का नाड़ी ज्योतिष का केंद्र होना है। यहां पर ताड़ के पत्तों पर लिखी भविष्यवाणियों को पढ़ा जाता है। इससे व्यक्तियों को भविष्य बताया जाता है।

यहां माना जाता है कि व्यक्तियों के संपूर्ण जीवन की कहानी यहां ताड़ के पत्तों पर पहले से ही लिखी होती है। मान्यता है कि हजारों साल पहले ऋषियों ने इन पत्तों पर भविष्यवाणियों को लिखा था। इन ऋषियों में अगस्त्य ऋषि विशेष थे, जिन्होंने जन्म से काफी पहले ही सभी आत्माओं के भाग्य को लिखा था।

कैसे होती है भविष्यवाणी?

माना जाता है कि यहां पर नाड़ी ज्योतिष के माध्यम से भविष्य बताने की परंपरा है। यह प्रक्रिया अंगूठे के निशान से शुरू होती है। व्यक्ति को इसके आधार पर ही कई श्रेणियों में रखा जाता है। इसके बाद ताड़ के पत्तों के गट्ठों को देखा जाता है, जब तक कि एक खास पत्ता न मिल जाए। पत्ते के मिलने पर उसको पढ़ा जाता है।

वहां, जो विद्वान पत्तों को पढ़ता है वह भविष्य पूछने वाले व्यक्ति को जवाब देते हुए सवाल पूछते हैं। इसमें व्यक्ति का नाम, माता और पिता का नाम, जीवन की महत्वपूर्ण घटनाएं और कुछ व्यक्तिगत जानकारी शामिल होती है, जो बिल्कुल सही होती हैं। इस प्रक्रिया पर भरोसा रखने वाले लोगों का मानना है कि जानकारियों की सटीकता ही उन्हें इस बात का यकीन दिलाती है कि उस ताड़ के पत्ते में उनका ही भविष्य लिखा है।

क्या मृत्यु की भी हो सकती है भविष्यवाणी?

नाड़ी ज्योतिष के जानकारों की मानें तो ज्योतिष की यह वह शाखा है, जो व्यक्ति का भविष्य ही नहीं, उसकी मौत का समय भी प्रिडिक्ट कर सकती है। ज्योतिष इस विशेष शाखा को आयु खंडम के नाम से भी जाना जाता है।

मान्यता है कि यह व्यक्ति के जीवनकाल के बारे में बताती है। इसमें मृत्यु कैसे और कब होगी, यह भी शामिल होता है। हालांकि कई लोगों के लिए यह अनुभव रोमांचक हो सकता है तो कईयों के लिए डरावना भी हो सकता है?

दिए जाते हैं उपाय

मान्यता सिर्फ भविष्यवाणी की ही नहीं है। यहां पर मान्यता यह भी है कि किसी भी व्यक्ति का भाग्य पूरी तरह से तय नहीं होता है। मंदिर के पुजारी और नाड़ी ज्योतिष परिहारम मतलब दुर्भाग्य को दूर करने के उपाय भी देते हैं। इन उपायों में शक्तिशाली मंत्रों का जाप, जरूरतमंदों की मदद आदि हो सकते हैं।

ज्योतिष के अलावा भगवान शिव की भी होती है पूजा

यह मंदिर सिर्फ नाड़ी ज्योतिष के लिए ही फेमस नहीं है बल्कि यहां पर भगवान शिव की पूजा रोगनाशक देवता के रूप में की जाती है। मान्यता है कि यहां पर की गई पूजा लॉन्गटर्म के रोग तक ठीक हो जाते हैं। असाध्य रोगों को ठीक करने के लिए इसे प्रमुख स्थान माना जाता है।

तलाब में स्नान से धुलते हैं पाप

मंदिर के पास एक सिद्धामृतम तालाब भी है, जिसमें लोग स्नान करते हैं। माना जाता है कि इस तालाब में स्नान से व्यक्ति के पाप धुल जाते हैं और स्किन डिजीज ठीक हो जाती हैं। वहीं, कुछ लोग यहां के रीति-रिवाजों के अनुसार पानी में गुड़ भी घोलते हैं। कई भगवान शिव का रुद्राभिषेक भी करते हैं।

डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।

Mohit Tiwari
मोहित तिवारीauthor

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ने प्रिंट, टीवी और डिजिटल तीनों प्लेटफॉर्म पर काम किया है। देश-विदेश, लाइफस्टाइल, धर्म और आध्यात्मिक विषयों में गहरी रुचि रखने वाले मोहित ने ज्योतिष का भी व्यापक अध्ययन किया है। मोहित के आलेख लाइफस्टाइल, हेल्थ, न्यूज, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर गहरी शोध और प्रामाणिकता पर आधारित होते हैं और इन विषयों पर वह 12,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं।

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