Budhwa Mangal 2026: भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष का आखिरी मंगलवार 22 सितंबर 2026 को पड़ रहा है। उत्तर भारत के कई हिस्सों में इस दिन को बुढ़वा मंगल के नाम से मनाया जाता है। इसे बूढ़े मंगल और कुछ क्षेत्रों में बड़े मंगल के नाम से भी जाना जाता है। इस बार खास बात यह है कि 22 सितंबर को परिवर्तिनी एकादशी भी है, जिससे इस दिन का धार्मिक महत्व और बढ़ गया है।
बुढ़वा मंगल भगवान हनुमान के उस स्वरूप से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने एक वृद्ध वानर का रूप धारण करके महाबली भीम की शक्ति और अहंकार की परीक्षा ली थी। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन हनुमान जी की पूजा करने से संकट दूर होते हैं, मनोकामनाएं पूरी होती हैं और भक्त को बल, बुद्धि तथा आत्मविश्वास का आशीर्वाद मिलता है। उत्तर प्रदेश समेत उत्तर भारत के कई हिस्सों में इस दिन हनुमान मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होती है। कहीं सुंदरकांड का पाठ किया जाता है तो कहीं भंडारे और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
बुढ़वा मंगल क्यों मनाया जाता है
भाद्रपद माह के अंतिम मंगलवार को बुढ़वा मंगल मनाने के पीछे भगवान हनुमान और महाबली भीम से संबंधित एक कथा मिलती है।
महाभारत के वनपर्व के अनुसार, पांडवों के वनवास के दौरान भीम को अपनी अपार ताकत पर काफी गर्व था। उन्हें अपनी शक्ति पर इतना भरोसा था कि वे स्वयं को बेहद शक्तिशाली मानने लगे थे। इसी दौरान उनके जीवन में एक ऐसी घटना हुई जिसने उनके अहंकार को खत्म कर दिया।
कहा जाता है कि द्रौपदी के लिए सुगंधित पुष्प लाने के उद्देश्य से भीम गंधमादन पर्वत की ओर जा रहे थे। रास्ते में उन्हें एक वृद्ध वानर दिखाई दिया, जो मार्ग में लेटा हुआ था। उसकी पूंछ रास्ते में फैली थी। भीम ने उस वानर को रास्ते से हटने के लिए कहा। वृद्ध वानर ने जवाब दिया कि वह बहुत बूढ़ा और थका हुआ है, इसलिए खुद उठकर रास्ता नहीं दे सकता है। उसने भीम से कहा कि वे उसकी पूंछ को हटाकर आगे निकल जाएं।
पूरी ताकत लगाने के बाद भी नहीं हिला सके पूंछ
भीम को लगा कि वृद्ध वानर की पूंछ हटाना उनके लिए कोई मुश्किल काम नहीं होगा। उन्होंने पहले सामान्य तरीके से पूंछ हटाने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद भीम ने अपनी पूरी ताकत लगा दी। एक समय ऐसा आया जब उन्होंने अपनी सारी शक्ति का इस्तेमाल कर लिया, लेकिन पूंछ अपनी जगह से हिली तक नहीं। महाबली भीम के लिए यह बेहद चौंकाने वाला क्षण था। उन्हें समझ में आने लगा कि जिस वानर को वह साधारण और कमजोर समझ रहे थे, वह कोई सामान्य जीव नहीं है। यहीं से भीम के भीतर का अहंकार टूटना शुरू हुआ। उन्होंने वृद्ध वानर से विनम्र होकर उसकी वास्तविक पहचान पूछी।
वृद्ध वानर के रूप में भगवान हनुमान ने दिए दर्शन
कथा के अनुसार इसके बाद भगवान हनुमान ने अपना वास्तविक स्वरूप प्रकट किया। उन्होंने भीम को बताया कि वे स्वयं भगवान राम के परम भक्त हनुमान हैं। भीम को जब यह पता चला कि जिस वानर की पूंछ वह अपनी पूरी ताकत के बाद भी नहीं हिला सके, वह स्वयं हनुमान हैं, तो उनका गर्व समाप्त हो गया। उन्होंने हनुमान जी से क्षमा मांगी। भगवान हनुमान ने भी उनको क्षमा कर दिया। दरअसल, भगवान हनुमान और भीम दोनों ही वायुपुत्र हैं। इस कारण भीम स्वंय हनुमान जी के छोटे भाई हैं। माना जाता है कि जब ये घटना हुई, वह दिन भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष का आखिरी मंगलवार था।
बुढ़वा मंगल पर कैसे करें हनुमान जी की पूजा
बुढ़वा मंगल के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें और भगवान हनुमान की पूजा करें। हनुमान मंदिर जाकर उनके दर्शन करें। श्रद्धा के अनुसार सिंदूर, चमेली का तेल और लाल फूल अर्पित करें। हनुमान जी को बूंदी या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं। इसके बाद हनुमान चालीसा का पाठ करें। श्रद्धा के अनुसार बजरंग बाण और सुंदरकांड का पाठ भी किया जा सकता है। इस दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद लोगों को भोजन या दान देना भी इस दिन की धार्मिक भावना से जुड़ा माना जाता है।
