अध्यात्म

Hanuman Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi: हनुमान जी की आरती लिरिक्स इन हिंदी, यहां जानिए आरती करने की शास्त्रीय विधि

Hanuman Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi: किसी भी भगवान की पूजा बिना आरती के पूर्ण नहीं मानी जाती है। हनुमान जी की पूजा में आरती अवश्य करनी चाहिए। आइए जानते हैं आरती लिरिक्स और करने की विधि क्या है।

Image

हनुमान जी की आरती लिरिक्स (Image AI Generated and Newsroom Verified)

Hanuman Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi: आज 22 सितंबर 2026, मंगलवार को भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है। इस दिन बुढ़वा मंगल का पर्व भी मनाया जा रहा है। 22 सितंबर भाद्रपद माह का अंतिम मंगलवार है, इस कारण आज बुढ़वा मंगल मनाया जा रहा है। इस दिन हनुमान ने वृद्ध स्वरूप रखा था और भीम का घमंड तोड़ा था।

बुढ़वा मंगल के दिन हनुमान जी की पूजा, हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करना शुभ फलदायी होता है। पूजा के अंत में दीप जलाकर बजरंगबली की आरती करना आवश्यक माना जाता है। यहां पढ़ें हनुमान जी की संपूर्ण आरती ‘आरती कीजै हनुमान लला की’, जिसके बिना हनुमान जी की पूजा अधूरी मानी जाती है।

हनुमान जी की आरती लिरिक्स हिंदी में (Hanuman Ji Ki Arti)

आरती कीजै हनुमान लला की,

दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।

जाके बल से गिरिवर कांपे,

रोग दोष जाके निकट न झांके।

अंजनि पुत्र महा बलदाई,

सन्तन के प्रभु सदा सहाई।

दे बीरा रघुनाथ पठाए,

लंका जारि सिया सुधि लाए।

लंका सो कोट समुद्र-सी खाई,

जात पवनसुत बार न लाई।

लंका जारि असुर संहारे,

सियारामजी के काज सवारे।

लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे,

आनि संजीवन प्राण उबारे।

पैठि पाताल तोरि जम-कारे,

अहिरावण की भुजा उखारे।

बाएं भुजा असुरदल मारे,

दाहिने भुजा संतजन तारे।

सुर नर मुनि आरती उतारें,

जय जय जय हनुमान उचारें।

कंचन थार कपूर लौ छाई,

आरती करत अंजना माई।

जो हनुमानजी की आरती गावे,

बसि बैकुण्ठ परम पद पावे।

आरती कीजै हनुमान लला की,

दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥

जय श्री राम, जय श्री राम,

जय श्री राम, जय श्री राम।

कैसे की जाती है आरती

भगवान की आरती करने के लिए सबसे पहले तांबे, पीतल या चांदी की थाली में घी या कपूर का दीपक, गंगाजल, कुमकुम, अक्षत, फूल और भोग के लिए फल या मिठाई रखें। दीपक में गाय के घी की पांच बत्तियां यानी पंचप्रदीप या कपूर जलाएं। आरती करते समय खड़े होकर श्रद्धा और भाव के साथ थोड़ा आगे की ओर झुकें और दाहिने हाथ में दीपक लेकर उसे भगवान के सामने हमेशा दक्षिणावर्त यानी घड़ी की दिशा में घुमाएं। परंपरा के अनुसार सबसे पहले भगवान के चरणों के पास दीपक को 4 बार, नाभि के पास 2 बार, मुख के पास 1 बार और फिर पूरे शरीर के चारों ओर 7 बार घुमाया जाता है। आरती के दौरान घंटी बजाई जा सकती है और आरती के बाद दीपक की लौ पर दोनों हथेलियां फेरकर आंखों और माथे से लगाएं, फिर परिवार के अन्य सदस्यों या उपस्थित भक्तों को आरती दें।

Mohit Tiwari
मोहित तिवारीauthor

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ने प्रिंट, टीवी और डिजिटल तीनों प्लेटफॉर्म पर काम किया है। देश-विदेश, लाइफस्टाइल, धर्म और आध्यात्मिक विषयों में गहरी रुचि रखने वाले मोहित ने ज्योतिष का भी व्यापक अध्ययन किया है। मोहित के आलेख लाइफस्टाइल, हेल्थ, न्यूज, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर गहरी शोध और प्रामाणिकता पर आधारित होते हैं और इन विषयों पर वह 12,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं।

और पढ़ें
End of Article