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Eid-ul-Adha 2025 Date: सऊदी अरब में बकरा ईद का चांद कब दिखेगा 27 या 28 मई? नोट कर लें सही तारीख

Eid-ul-Adha 2025 Date In Saudi Arabia, India, Moon Sighting Time: ईद-उल-अजहा को बकरीद के नाम से भी जाता है। ये इस्लाम धर्म का एक प्रमुख त्योहार है जो हजरत इब्राहीम की अल्लाह के प्रति पूर्ण समर्पण और उनके द्वारा दी गई परीक्षा की याद में मनाया जाता है। जानिए 2025 में यह पर्व कब मनाया जाएगा।

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Eid-ul-Adha 2025 Date: सऊदी अरब में बकरा ईद का चांद कब दिखेगा 27 या 28 मई? नोट कर लें सही तारीख

Eid-ul-Adha 2025 Date In Saudi Arabia, India, Moon Sighting Time: ईद-उल-अजहा का त्योहार इस्लामी कैलेंडर के 12वें महीने 'जुल हिज्जा' की 10वीं तारीख को मनाया जाता है। यह तारीख चांद के दिखने पर निर्भर करती है। यह महीना हज यात्रा के लिए भी प्रसिद्ध है। बकरीद पर मुसलमान हजरत इब्राहीम की उस निष्ठा और बलिदान को याद करते हैं जो उन्होंने अल्लाह के प्रति दिखाई थी। अल्लाह के एक आदेश पर उन्होंने अपने प्रिय पुत्र की कुर्बानी देने का संकल्प ले लिया था। चलिए जानते हैं इस साल ईद-उल-अजहा कब मनाई जाएगी और इसका धार्मिक महत्व क्या है।

बकरा ईद का चांद कब दिखेगा 2025 (Zil Hajj Ka Chand 2025 In Saudi Arabia)

सऊदी अरब में धुल हिज्जा 1446 AH का चांद 27 मई 2025 को देखा जाएगा। यदि यहां चांद 27 मई को दिखाई देता है, तो 28 मई 2025 (बुधवार) को धुल हिज्जा का पहला दिन होगा और ऐसे में सऊदी में ईद-उल-अजहा का त्योहार 6 जून को मनाया जाएगा।

बकरा ईद कब है 2025 (Eid Ul Adha 2025 Date In India)

भारत में धुल हिज्जा 1446 AH का चांद 28 मई 2025 (बुधवार) को दिखने की संभावना है। यदि चांद उस दिन दिखाई देता है, तो 29 मई 2025 (गुरुवार) को धुल हिज्जा का पहला दिन माना जाएगा और भारत के लोग 7 जून 2025 को ईद मनाएंगे। लेकिन अगर 29 मई को चांद दिखता है तब ईद का त्योहार 8 जून को मनाया जाएगा।

बकरा ईद क्यों मनाते हैं (Bakra Eid Kyu Manate Hai)

मुस्लिम धार्मिक मान्यताओं अनुसार इस दिन हजरत इब्राहीम ने अल्लाह की आज्ञा पर अपने बेटे हजरत इस्माईल को कुर्बान करने का संकल्प लिया था। तब अल्लाह ने उनकी नीयत और ईमान को देखकर इस्माईल की जगह एक दुम्बा (मेंढा) भेज दिया। कहते हैं तभी से इस दिन कुर्बानी देने की परंपरा शुरू हो गई। यह घटना ईमान, समर्पण और त्याग का सर्वोच्च उदाहरण मानी जाती है। यह दिन इंसान को सिखाता है कि जब अल्लाह की राह में कुछ छोड़ना पड़े, तो उसे खुशी से त्याग कर देना चाहिए। इस दिन कुर्बानी के जानवर का मांस तीन हिस्सों में बांटा जाता है – एक गरीबों को, एक रिश्तेदारों को और एक खुद के लिए।

Laveena Sharma
लवीना शर्मा author

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करि... और देखें

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