Mangal grah dosh: मंगल ग्रह, जैसा कि नाम से विदित होता है कि जीवन में मंगल का कारक बनता है। यदि मंगल दोष जन्मकुंडली में हो तो व्यक्ति के करियर से लेकर विवाह तक में सिर्फ बाधा ही बाधा आती है। जन्म कुंडली के चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में मंगल होने से वो दोष पूर्ण हो जाता है। विवाह के समय वर− वधू की कुंडली में मंगल की दशा जरूर देखते हैं। मान्यता है कि मांगलिक लड़के या लड़की की शादी मांगलिक से ही होनी चाहिए। यहां देखते हैं मंगल ग्रह की शांति के कुछ अचूक उपाय।
मंगल की शांति के चमत्कारी उपाय
- लाल पुष्पों से मंगल की पूजा करें।
- वंश वृद्धि के लिए मंगल यंत्र प्राण प्रतिष्ठित कर उसका विधिवत जप और पूजा करें।
- मंगल दोष में आचार्य शंकर कृत सुब्रह्मण्यम भुजंगस्तोत्र या कार्तिकेय स्तोत्र का पाठ एवं कुमार कार्तिकेय की पूजा लाभदायक रहती है। इसके साथ 11 प्रदोष तिथियों में रुद्राभिषेक करना चाहिए।
- मंगल दोष निवारण के लिए मंगलवार व्रत सहित मंगल मंत्र का विधिवत अनुष्ठान करना चाहिए।
- मंगल अशुभ हो तो तिल− गुड़ की रेवड़ियां जल में प्रवाहित करें
- गायत्री मं का पाठ करें, हनुमान जी को सिंदूर लगाएं और खुद भी हनुमान जी के पैरों में रखे सिंदूर को लगाएं।
- मंगल को शक्तिशाली बनाने के लिए मंगल यंत्र धारण करें।
- मंगल पीड़ा की विशेष शांति के लिए बेलपत्र, अटामांसी, मसूली, बकुलचंदन, बला, लाल पुष्प, एवं हिंगुल पंसारी की दुकान से लाकर आठ मंगलवार पानी में डालकर स्नान करें।
- दुर्गा स्तुति का पाठ या श्रवण करें।
- महारुद्र या अतिरुद्र का यज्ञ करना चाहिए।
- मंगल यंत्र को मूंगा सहित गले में धारण करें।
- 21 मंगलवार, 21 संकष्टी व्रत और 21 विनायकी व्रत करें।
- लाल रंग का रुमाल सदैव अपने साथ रखें।
- सामान्य मंगल पीड़ा बजरंग बाण एवं हनुमान जी के मंदिर में दीपदान से भी दूर हो जाती है।
- शुद्ध चांदी धारण करने से लाभ मिलता है।
उपरोक्त उपाय कुंडली में मंगल ग्रह दोष को दूर करने के लिए कारगर होते हैं। मंगल दोष हनुमान जी की भक्ति से दूर हो सकता है। यदि किसी भी उपाय को न कर सकें तो परम गुरु हनुमान जी की शरण में आकर हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ अवश्य आरंभ कर देना चाहिए।
(डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।)
