Dhanteras 2026 Lakshmi Ganesh Murti Buying Tips: धनतेरस पर सोना-चांदी, बर्तन और दूसरी शुभ चीजें खरीदने के साथ भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की मूर्ति खरीदने का भी खास महत्व है। दिवाली की शाम घरों में गणेश-लक्ष्मी की पूजा की जाती है। ऐसे में बाजार से मूर्ति लाते समय उसका स्वरूप, मुद्रा, बनावट और सामग्री जरूर देखनी चाहिए। वास्तु और पूजा से जुड़ी पारंपरिक मान्यताओं में माता लक्ष्मी को कमल पर विराजमान और भगवान गणेश को बैठे हुए स्वरूप में घर लाने की सलाह दी जाती है। गणेश जी की सूंड किस तरफ होनी चाहिए, लक्ष्मी जी की मूर्ति खड़ी हो या बैठी, दोनों की मूर्तियां अलग-अलग खरीदनी चाहिए या एक साथ बनी हुई प्रतिमा भी ला सकते हैं? आइए जानते हैं मूर्ति खरीदने से जुड़ी जरूरी बातें क्या हैं?
धनतेरस 2026 पर कब खरीदें गणेश-लक्ष्मी की मूर्ति
साल 2026 में धनतेरस 6 नवंबर, शुक्रवार को है। इस दिन लोग घर की पूजा के लिए गणेश जी और माता लक्ष्मी की नई मूर्तियां खरीदते हैं। इन मूर्तियों की दिवाली के दिन लक्ष्मी-गणेश पूजा में स्थापना की जाती है। मूर्ति खरीदते समय केवल उसकी सुंदरता या कीमत न देखें, बल्कि उसका स्वरूप और बनावट भी ध्यान से जांचें।
माता लक्ष्मी की कैसी मूर्ति खरीदनी चाहिए
धनतेरस पर माता लक्ष्मी की मूर्ति खरीदते समय उनका बैठा हुआ स्वरूप लेना शुभ माना जाता है। ऐसी प्रतिमा चुनें जिसमें माता कमल के फूल पर विराजमान हों। कमल का फूल माता लक्ष्मी के पारंपरिक स्वरूप का अहम हिस्सा है। यह पवित्रता, समृद्धि और संपन्नता का प्रतीक है।माता के हाथों में कमल का फूल होना और एक हाथ से सोने के सिक्कों की वर्षा होती दिखाई देना भी प्रचलित स्वरूप है। उनका दूसरा हाथ आशीर्वाद देने की मुद्रा में हो तो प्रतिमा पूजा के लिए अच्छी रहती है। माता के चेहरे पर प्रसन्नता और शांति का भाव होना चाहिए।
माता लक्ष्मी की खड़ी हुई प्रतिमा को घर में नहीं रखना चाहिए, ऐसा कहना सही नहीं है। धार्मिक चित्रों और मूर्तियों में माता लक्ष्मी को बैठी और खड़ी, दोनों मुद्राओं में दिखाया गया है। हालांकि, दिवाली की सामान्य घरेलू पूजा के लिए कमल पर बैठी माता लक्ष्मी का स्वरूप ले सकते हैं।
कैसी होनी चाहिए भगवान गणेश की मूर्ति
गणेश जी की मूर्ति खरीदते समय उनकी सूंड की दिशा पर खास ध्यान दिया जाता है। घर की सामान्य पूजा के लिए बाईं ओर मुड़ी सूंड वाली गणेश प्रतिमा यानी वाममुखी गणेश का स्वरूप प्रचलित है। इस स्वरूप की पूजा घरों में आसानी से की जाती है। दाईं ओर मुड़ी सूंड वाली प्रतिमा को दक्षिणमुखी गणेश कहा जाता है। कुछ धार्मिक परंपराओं में इस स्वरूप की पूजा के लिए विशेष नियम और विधि बताई गई है। इसी वजह से सामान्य घरेलू पूजा के लिए लोग बाईं ओर मुड़ी सूंड वाली प्रतिमा पसंद करते हैं।
गणेश जी की मूर्ति में उनके हाथ में मोदक या लड्डू होना अच्छा माना जाता है। उनके पास मूषक यानी चूहा भी बना हो तो यह उनके पारंपरिक स्वरूप को पूरा करता है। प्रतिमा में गणेश जी का चेहरा प्रसन्न और मुद्रा शांत होनी चाहिए। इस बात का ध्यान रखें कि सूंड गणेश जी के दाएं हाथ की तरफ न मुड़ी हो।
गणेश और लक्ष्मी की मूर्तियां अलग-अलग खरीदें या एक साथ
धनतेरस पर बाजार में गणेश-लक्ष्मी की अलग-अलग मूर्तियां और एक ही आधार पर बनी संयुक्त प्रतिमाएं, दोनों मिलती हैं। दिवाली की घरेलू पूजा के लिए अलग-अलग मूर्तियां खरीदना सुविधाजनक रहता है। इससे दोनों को पूजा की चौकी पर उचित स्थान और अलग आसन दिया जा सकता है। हालांकि संयुक्त प्रतिमा भी घर में रखी जा सकती है, बशर्ते उसमें दोनों देवी-देवताओं का स्वरूप साफ हो। खरीदते समय यह जरूर देखें कि मूर्तियां ठीक से बनी हों और पूजा के लिए उपयुक्त हों। इसके साथ ही मूर्ति किसी भी प्रकार से खंडित न हो।
धनतेरस पर किस चीज की बनी मूर्ति खरीदना शुभ है
मूर्ति की सामग्री का चुनाव अपनी पसंद, बजट और पूजा की जरूरत के हिसाब से करें। धनतेरस पर मिट्टी, पीतल और चांदी की मूर्तियां खरीदी जाती हैं। दिवाली की वार्षिक पूजा के लिए मिट्टी की प्रतिमा अच्छा विकल्प है। इसे प्राकृतिक रंगों से सजाया गया हो तो बेहतर है। पीतल की मूर्ति मजबूत होती है और इसे साफ करके हर साल पूजा में इस्तेमाल किया जा सकता है।
चांदी की प्रतिमा को लोग धनतेरस पर खरीदना पसंद करते हैं। यह लंबे समय तक संभालकर रखने और नियमित पूजा के लिए भी इस्तेमाल की जा सकती है। वहीं, POP से बनी मूर्तियों के बजाय मिट्टी या दूसरी पर्यावरण के अनुकूल सामग्री से बनी प्रतिमा खरीदना बेहतर है। POP पानी में आसानी से नहीं घुलता और मूर्ति विसर्जन के दौरान जल स्रोतों को नुकसान पहुंचा सकता है।
मूर्ति खरीदते समय ये 5 बातें जरूर जांचें
धनतेरस पर बाजार में मूर्ति खरीदते समय इन बातों का ध्यान रखें कि मूर्ति के हाथ, पैर, मुकुट, चेहरे और आधार को अच्छी तरह देखें। उसमें दरार या टूटा हुआ हिस्सा नहीं होना चाहिए। गणेश जी और माता लक्ष्मी की प्रतिमा का चेहरा शांत, सुंदर और प्रसन्न दिखाई देना चाहिए। मूर्ति पर लगे रंग साफ हों और बहुत तेज गंध वाले या खराब गुणवत्ता के रंगों से बचें। घर की पूजा चौकी या मंदिर में आसानी से रखी जा सके, ऐसी मूर्ति खरीदें। बहुत बड़ी प्रतिमा लाने से पहले उसके लिए उचित जगह और देखभाल का ध्यान रखें। मिट्टी, धातु या पर्यावरण के अनुकूल सामग्री को प्राथमिकता दें। मूर्ति पर इस्तेमाल किए गए रंग भी जांच लें।
क्या धनतेरस पर मूर्ति खरीदते समय मोलभाव नहीं करना चाहिए
मूर्ति खरीदते समय मोलभाव न करने की परंपरा कुछ परिवारों में मानी जाती है। इसके पीछे भावना यह है कि देवी-देवताओं की प्रतिमा श्रद्धा और सम्मान के साथ घर लाई जाए। हालांकि, मूर्ति खरीदते समय मोलभाव नहीं करने का कोई एक अनिवार्य नियम सभी हिंदू परंपराओं में लागू नहीं होता है। आप दुकानदार से कीमत की जानकारी ले सकते हैं और अपनी पसंद व बजट के अनुसार मूर्ति खरीद सकते हैं। स्थानीय कारीगर से मूर्ति खरीदते समय उसकी मेहनत और कला का उचित मूल्य देना भी जरूरी है।
क्या माता लक्ष्मी की उल्लू पर बैठी मूर्ति घर लानी चाहिए?
माता लक्ष्मी के वाहन के रूप में उल्लू भी कई मूर्तियों में मिलता है, हालांकि उल्लू के साथ बनी माता लक्ष्मी की प्रतिमा को अशुभ नहीं होती है। कमल पर बैठीं माता लक्ष्मी की मूर्ति लेना ज्यादा शुभ माना जाता है।
धनतेरस पर गणेश-लक्ष्मी की मूर्ति घर लाने के बाद क्या करें
मूर्ति खरीदकर घर लाने के बाद उसे साफ कपड़े में रखकर पूजा स्थल तक लेकर आएं। दिवाली की पूजा से पहले चौकी की सफाई करें और उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। इसके बाद माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमाओं को उचित स्थान पर स्थापित करें। पूजा के समय दोनों को फूल, अक्षत, रोली, चंदन, मिठाई और फल अर्पित करें। दीपक जलाकर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की आरती करें। भगवान गणेश को मोदक या लड्डू और माता लक्ष्मी को खील-बताशे या मिठाई का भोग लगा सकते हैं।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी शास्त्रों पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
