November 2026 mein Sankranti kab hai: हिंदू धर्म में संक्रांति का विशेष महत्व माना जाता है। हर महीने जब सूर्य एक राशि से निकलकर दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं, तो उस दिन को संक्रांति कहा जाता है। इस दिन सूर्य देव की पूजा, स्नान, दान और पुण्य कर्म करने की परंपरा है। देश के अलग-अलग हिस्सों में संक्रांति को अलग-अलग रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है।
नवंबर 2026 में सूर्य देव तुला राशि से निकलकर वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे। इसलिए इस महीने पड़ने वाली संक्रांति को वृश्चिक संक्रांति कहा जाएगा। यह दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दोनों ही नजरिए से खास माना जाता है।
November 2026 Sankranti Date and Time
- संक्रांति का नाम: वृश्चिक संक्रांति
- तारीख: 16 नवंबर 2026, सोमवार
- सूर्य का राशि परिवर्तन: तुला से वृश्चिक राशि में
- संक्रांति का क्षण: शाम 7 बजकर 48 मिनट
- पुण्य काल (नई दिल्ली): दोपहर 12:06 से शाम 5:27 बजे तक
- महा पुण्य काल: दोपहर 3:40 से शाम 5:27 बजे तक।
वृश्चिक संक्रांति क्या होती है
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य को सभी ग्रहों का राजा माना जाता है। सूर्य हर महीने एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं। इस बदलाव को संक्रांति कहते हैं। इसी क्रम में जब सूर्य तुला राशि को छोड़कर वृश्चिक राशि में प्रवेश करते हैं, तो इसे वृश्चिक संक्रांति कहा जाता है। साल में कुल 12 संक्रांतियां आती हैं। इनमें मकर संक्रांति सबसे अधिक लोकप्रिय है। हालांकि, धार्मिक मान्यताओं में हर संक्रांति का अपना महत्व है।
वृश्चिक संक्रांति का धार्मिक महत्व
हिंदू मान्यताओं के अनुसार संक्रांति का दिन स्नान और दान के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा है। जो लोग नदी या तीर्थ स्थल तक नहीं जा सकते, वे घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं। मान्यता है कि संक्रांति पर किया गया दान पुण्य फल प्रदान करता है। इसलिए इस दिन जरूरतमंद लोगों की मदद करना अच्छा माना जाता है।
वृश्चिक संक्रांति पर अन्न, अनाज, गुड़, तिल, वस्त्र और अपनी सामर्थ्य के अनुसार धन का दान किया जा सकता है। गाय को हरा चारा खिलाना और गरीबों को भोजन कराना भी पुण्यदायी माना जाता है।
इस दिन सूर्य देव को जल अर्पित करने की भी परंपरा है। ऐसा माना जाता है कि सूर्य की उपासना से आत्मविश्वास, ऊर्जा और मान-सम्मान में वृद्धि होती है।
वृश्चिक संक्रांति पर कैसे करें सूर्य देव की पूजा
- संक्रांति के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। इसके बाद साफ कपड़े पहनकर सूर्य देव की पूजा करें।
- सूर्य देव को तांबे के लोटे से जल अर्पित करें।
- जल में लाल फूल और अक्षत डाल सकते हैं।
- सूर्य देव के सामने दीपक जलाएं।
- 'ॐ सूर्याय नमः' मंत्र का जाप करें।
- आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना भी शुभ माना जाता है।
- अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंद व्यक्ति को अन्न, वस्त्र या धन का दान करें।
वृश्चिक संक्रांति पर क्या दान करना चाहिए
संक्रांति को दान-पुण्य से जोड़कर देखा जाता है। इस दिन जरूरतमंद लोगों को उनकी जरूरत के अनुसार चीजें देना अच्छा माना जाता है। आप इस दिन गेहूं, चावल, दाल, गुड़, तिल, गर्म कपड़े और कंबल का दान कर सकते हैं। नवंबर में ठंड की शुरुआत भी हो जाती है। ऐसे में किसी जरूरतमंद को गर्म कपड़े या कंबल भी दान कर सकते हैं।
