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नवंबर 2026 में चतुर्दशी कब है- जानें 6 या 7 नवंबर में से दिवाली से पहले कार्तिक मास के कष्ण पक्ष की चतुर्दशी सही तारीख क्या है

November 2026 mein chaturdashi kab hai: नवंबर 2026 में चतुर्दशी कब है? जानें दिवाली से पहले चतुर्दशी की डेट। कार्तिक मास के कष्ण पक्ष की चतुर्दशी किस तारीख को पड़ेगी।

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7 या 8 नवंबर - नवंबर 2026 में चतुर्दशी कब है, नोट करें सही डेट

November 2026 mein chaturdashi kab hai: नवंबर का महीना आते ही दिवाली की तैयारियां तेज हो जाती हैं। घरों की सफाई से लेकर पूजा की तैयारी और बाजारों में खरीदारी तक, हर तरफ त्योहार का माहौल नजर आने लगता है। दिवाली के आसपास कई महत्वपूर्ण तिथियां पड़ती हैं। इन्हीं में से एक है चतुर्दशी, जिसे नरक चतुर्दशी, रूप चौदस और छोटी दिवाली के नाम से भी जाना जाता है। अगर आप भी जानना चाहते हैं कि नवंबर 2026 में चतुर्दशी कब है, छोटी दिवाली किस दिन मनाई जाएगी और इसका दिवाली से क्या संबंध है, तो यहां जानिए पूरी जानकारी।

नवंबर 2026 में चतुर्दशी कब है

हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि नवंबर 2026 में 8 नवंबर, रविवार को है। इसे नरक चतुर्दशी और छोटी दिवाली के नाम से जाना जाता है। इस साल एक खास बात यह है कि नरक चतुर्दशी और मुख्य दिवाली यानी लक्ष्मी पूजन एक ही दिन पड़ रहे हैं। 8 नवंबर को ही कार्तिक अमावस्या और दिवाली का पर्व भी मनाया जाएगा।

  • चतुर्दशी की डेट : 8 नवंबर 2026
  • दिन: रविवार
  • पर्व: नरक चतुर्दशी, रूप चौदस और छोटी दिवाली
  • मुख्य दिवाली: 8 नवंबर 2026, रविवार

ध्यान देने वाली बात यह है कि चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर को शुरू होगी, लेकिन उदया तिथि और पर्व की धार्मिक गणना के अनुसार नरक चतुर्दशी का पर्व 8 नवंबर को मनाया जाएगा।

चतुर्दशी तिथि कब से कब तक रहेगी

कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी की शुरुआत 7 नवंबर 2026 को सुबह के समय होगी और इसका समापन 8 नवंबर को होगा। अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और पंचांग की गणना के कारण पूजा और स्नान के मुहूर्त में थोड़ा अंतर हो सकता है।

इसलिए अगर आप नरक चतुर्दशी पर अभ्यंग स्नान या अन्य धार्मिक अनुष्ठान करना चाहते हैं, तो अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार समय देखना बेहतर रहेगा।

नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली क्यों कहते हैं

नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली कहने के पीछे भी एक खास वजह है। दरअसल, इस दिन से ही घरों में दीपावली का उत्सव अपने पूरे रंग में आने लगता है। लोग घर के बाहर दीपक जलाते हैं, रंगोली बनाते हैं और मिठाइयां तैयार करते हैं।

कई परिवारों में इस दिन शाम को यमराज के नाम का दीपक जलाने की परंपरा भी है। मान्यता है कि इससे परिवार के सदस्यों को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों में इस दिन की पूजा और रीति-रिवाजों में अंतर देखने को मिलता है।

नरक चतुर्दशी पर क्यों किया जाता है अभ्यंग स्नान

नरक चतुर्दशी पर अभ्यंग स्नान का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर शरीर पर तेल लगाकर स्नान करने की परंपरा है। कई जगहों पर उबटन और सुगंधित चीजों का इस्तेमाल भी किया जाता है।

इसे केवल शरीर की सफाई से जोड़कर नहीं देखा जाता, बल्कि धार्मिक रूप से इसे पुराने कष्टों और नकारात्मकता से मुक्ति का प्रतीक माना जाता है। महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में अभ्यंग स्नान को लेकर खास उत्साह रहता है। इसी वजह से इस दिन को रूप चौदस भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन स्नान और उबटन लगाने से सौंदर्य और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।

नवंबर 2026 में दिवाली और छोटी दिवाली की तारीख

इस साल दिवाली के पर्व का कैलेंडर थोड़ा खास है, क्योंकि नरक चतुर्दशी और लक्ष्मी पूजन एक ही दिन पड़ रहे हैं।

  • धनतेरस - 6 नवंबर 2026
  • काली चौदस - 7 नवंबर 2026
  • नरक चतुर्दशी - 8 नवंबर 2026
  • छोटी दिवाली - 8 नवंबर 2026
  • दिवाली और लक्ष्मी पूजन - 8 नवंबर 2026
  • गोवर्धन पूजा - 10 नवंबर 2026
  • भाई दूज - 11 नवंबर 2026

चतुर्दशी और दिवाली का क्या है संबंध

दिवाली से पहले आने वाली चतुर्दशी हमें यह याद दिलाती है कि जीवन में अंधकार चाहे कितना भी गहरा क्यों न हो, रोशनी का रास्ता हमेशा निकलता है। नरकासुर के वध की कथा भी इसी विचार को सामने रखती है।

इस दिन दीप जलाने की परंपरा केवल घर को रोशन करने तक सीमित नहीं है। इसके पीछे सुख, शांति और सकारात्मकता की कामना भी जुड़ी है। यही वजह है कि छोटी दिवाली से लेकर मुख्य दिवाली तक हर दिन का अपना अलग धार्मिक और पारिवारिक महत्व है।

Medha Chawla
मेधा चावलाauthor

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।

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