अध्यात्म

Chhath Mata Aarti Lyrics: 'जय छठी मईया...' छठ पूजा बिना इस आरती के है अधूरी

  • Authored by: लवीना शर्मा
  • Updated Mar 27, 2023, 04:53 PM IST

Chhath Mata Ki Aarti: छठ पर्व में सूर्य देव और छठी मैया (Chhathi Maiya) की उपासना की जाती है। इसलिए इस पर्व की पूजा के समय छठी मैया की ये आरती करना बिल्कुल भी न भूलें।

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छठ माता की आरती

Chhathi Mata Ki Aarti: साल में दो बार छठ पर्व मनाया जाता है एक बार चैत्र महीने में दूसरी बार कार्तिक महीने में। छठ सूर्य देव और छठी मैया की उपासना का पर्व है। ये पर्व पूरे चार दिनों तक चलता है। मुख्य रूप से छठ का त्योहार उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और नेपाल में मनाया जाता है। कहते हैं जो कोई भी सच्चे दिल से ये व्रत रखता है उसकी समस्त मनोकामना पूर्ण हो जाती है। अभी चैती छठ पर्व चल रहा है। जिसकी शुरुआत 25 मार्च से हुई है और इसका समापन 28 मार्च को होगा। इस पर्व की पूजा के समय छठी मैया की इस आरती को करना बिल्कुल भी न भूलें।

छठी मैया की आरती (Chhathi Mata Ki Aarti)

जय छठी मईया ऊ जे केरवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए।

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए॥जय॥

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।

ऊ जे नारियर जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए॥जय॥

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥जय॥

अमरुदवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए।

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए॥जय॥

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।

शरीफवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए॥जय॥

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥जय॥

ऊ जे सेववा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए।

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए॥जय॥

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।

सभे फलवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए॥जय॥

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥जय॥

लवीना शर्मा
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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