अध्यात्म

छेरछेरा कब है 2026 में, क्यों इस दिन किया जाता है अन्न का दान

Cherchera 2026 Kab Hai (छेरछेरा 2026 डेट): छेरछेरा त्योहार फसल की कटाई से जुड़ा है और छत्तीसगढ़ में मनाया जाता है। इस दिन अन्न का दान दिया और लिया भी जाता है। यहां जानें 2026 में छेर छेरा कब मनाया जाएगा। क्या है छेर छेरा 2026 की डेट।

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छेर छेरा 2026 की डेट ( Pic: iStock)

Cherchera 2026 Kab Hai (छेरछेरा 2026 डेट): छत्तीसगढ़ का प्रमुख लोकपर्व छेरछेरा हर साल पौष पूर्णिमा को बड़े उत्साह और सामाजिक सौहार्द के साथ मनाया जाता है। यह पर्व नई फसल, दान-पुण्य और सामुदायिक एकता का प्रतीक है। यहां छेरछेरा 2026 की तिथि से लेकर इससे जुड़ी परंपराओं, लोककथाओं और महत्व तक की पूरी जानकारी आप पढ़ सकते हैं।

छेरछेरा कब है 2026 में?

छेरछेरा तिहार पौष पूर्णिमा को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में पौष पूर्णिमा 2 जनवरी 2026 (शुक्रवार) को है तो छेरछेरा भी इसी दिन मनाया जाएगा। इसी दिन पूरे छत्तीसगढ़ में छेरछेरा पुन्नी मनाई जाएगी। यह तिथि बेहद खास होती है, क्योंकि यह नई फसल के आगमन का त्योहार है। कई लोग इस दिन शाकंभरी देवी की पूजा करके उन्हें नई फसल अर्पित करते हैं, जिन्हें अन्नपूर्णा का रूप माना जाता है।

छेरछेरा की शिव जी से जुड़ी लोककथा

छेरछेरा पर्व से एक पौराणिक कहानी भी जुड़ी है, जो भगवान शिव और माता पार्वती से संबंधित है। लोककथा के अनुसार- एक बार माता पार्वती ने भगवान शिव से कहा कि वे धरती पर जाकर जानें कि लोग अन्न का सम्मान और सही उपयोग कर रहे हैं या नहीं। भगवान शिव एक साधु के रूप में धरती पर आए। उन्होंने देखा कि लोग नई फसल का जश्न तो मना रहे हैं, परंतु दान, साझा करने और अन्न की पवित्रता का भाव कुछ कम होता जा रहा है।

इसी परंपरा को फिर से जीवंत करने के लिए भगवान शिव ने बच्चों को घर-घर जाकर अन्न मांगने का संदेश दिया।

छेरछेरा पर बच्चे क्या गाते हैं

छेरछेरा पर धान या अन्न मांगते हुए ये गीत गाया जाता है -

छेरछेरा छेरछेरा, माई कोठी के धान ला हेरहेरा।

इससे यही संदेश मिलता है कि अन्न का दान सबसे बड़ा पुण्य है।

छेरछेरा पर क्यों अन्न दान करते हैं

बच्चों के मांगने पर घर की महिलाएं कोठी में रखे नए धान को टोकरी में भरकर बच्चों को देती हैं। यह दान संपन्नता और शुभता का प्रतीक माना जाता है। अमीर-गरीब सभी के घर नई फसल की खुशियां पहुंचें, इसी सोच से अन्न दान किया जाता है। यह भी मान्यता है कि इस दिन धान दान करने से घर में सालभर धन-धान्य की कमी नहीं रहती।

Medha Chawla
मेधा चावलाauthor

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।

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