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अंकिता भंडारी हत्याकांड: सभी दोषियों की जमानत याचिका फिर खारिज,सरकार ने कहा- मजबूत पैरवी का नतीजा

  • Agency by: Agency
  • Updated Aug 19, 2026, 05:12 PM IST
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सीएम पुष्कर सिंह धामी (फोटो-@pushkardhami)

देहरादून: अंकिता भंडारी हत्याकांड में उम्रकैद की सजा पाए तीनों दोषियों को एक बार फिर राहत नहीं मिली है। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मुख्य आरोपी पुलकित आर्य समेत सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। इससे तीनों दोषी फिलहाल जेल में ही रहेंगे।

30 मई 2025 को सुनाई गई थी उम्रकैद की सजा

अंकिता भंडारी हत्याकांड वर्ष 2022 का बहुचर्चित मामला है। अंकिता वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थी। मामले में पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को आरोपी बनाया गया था। कोटद्वार की अदालत ने 30 मई 2025 को तीनों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

मामले की जांच के लिए सरकार ने एसआईटी गठित की थी। जांच के बाद पुलिस ने करीब 500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें लगभग 100 गवाहों को शामिल किया गया था। सरकार का कहना है कि मामले में मजबूत जांच और प्रभावी पैरवी के कारण आरोपियों को मुकदमे के दौरान भी जमानत नहीं मिल सकी और बाद में उन्हें दोषी ठहराकर उम्रकैद की सजा सुनाई गई।

उत्तराखंड सरकार ने दी प्रतिक्रिया

ताजा आदेश के बाद उत्तराखंड सरकार ने इसे लेकर प्रतिक्रिया दी है। सरकार ने कहा है कि अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए शुरू से ही ठोस कार्रवाई की गई। घटना के बाद ही आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की गई और जांच को तेजी से आगे बढ़ाया गया। परिजनों की मांग पर सरकारी वकीलों में भी बदलाव किया गया।

वहीं, सरकार ने पीड़ित परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने के साथ अंकिता के पिता और भाई को नौकरी देने की भी बात है। सरकार का कहना है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और मजबूत कानूनी पैरवी की गई।

अंकिता हत्याकांड को लेकर कथित 'VIP' कल्चर के नाम पर समय-समय पर सवाल भी उठते रहे हैं। सरकार ने कहा कि मामले से जुड़े किसी भी ठोस तथ्य या साक्ष्य को जांच एजेंसियों अथवा न्यायालय के समक्ष रखा जाना चाहिए। फिलहाल हाईकोर्ट द्वारा जमानत याचिकाएं खारिज किए जाने के बाद तीनों दोषियों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पहले दिन ही स्पष्ट कर दिया था कि बेटी अंकिता को न्याय दिलाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। अंकिता को न्याय दिलाने की लड़ाई में धामी सरकार केवल आश्वासनों तक सीमित नहीं रही,बल्कि कार्रवाई,मजबूत पैरवी और निर्णायक परिणाम के साथ परिवार के साथ खड़ी रही।

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