अध्यात्म

Chaurchan Puja 2025 (Aaj Chand Kab Niklega): चौरचन व्रत आज, जानें कैसे की जाती है इसकी पूजा, आज कितने बजे निकलेगा चांद?

Chaurchan Puja 2025 Puja Vidhi, Muhurat, Mantra, Moonrise Time (Chauth Chandra 2025 Date): चौरचन व्रत महिलाएं अपने संतान की लंबी उम्र, परिवार की सुख-शांति, और समृद्धि के लिए करती हैं। इसमें चंद्रमा की पूजा की जाती है, और चंद्र को भोग अर्पित कर आरती की जाती है। इस साल मिथिला की चौरचन पूजा आज है। यहां से आप जान सकते है कि आज पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है, साथ ही यहां चांद निकलने के समय के बारे में भी बताया गया है।

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चौरचन पूजा 2025 तिथि, पूजा मुहूर्त, विधि, चांद निकलने का समय (pic credit: canva)

Chaurchan Puja 2025 Vidhi, Muhurat, Mantra, Moonrise Time, Chand Nikalne Ka Samay In Hindi (चौरचन पूजा विधि 2025): जैसे छठ पर्व में डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है, वैसे ही चौरचन पर्व में आधे उगते चंद्रमा की पूजा होती है। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को ही चौरचन मनाया जाता है। इस व्रत को महिलाएं अपने संतान की रक्षा और दीर्घायु होने के आशीर्वाद के लिए करती हैं। परिवार में सुख-शांति और समृद्धि के लिए भी इस व्रत को किया जाता है। चौरचन पूजा करने से मन की शांति मिलती है और सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यहां देखें चौरचन की पूजा का मुहूर्त और साथ ही जानें आज चांद कब निकलेगा?

चौरचन 2025 तिथि और मुहूर्त (Mithila Chaurchan Puja 2025 Date And Time)

भाद्रपद मास, शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 26 अगस्त 2025 (मंगलवार) दोपहर 01:54 बजे से शुरू होकर 27 अगस्त 2025 (बुधवार) दोपहर 03:44 बजे तक रहेगी। साल 2025 में चौरचन पूजा 26 अगस्त के दिन मनाया जाएगा। संध्या समय, यानी जब चंद्रमा उदय हो, तब पूजा की जाती है। आमतौर पर शाम 7:50 बजे से रात 8:16 बजे तक यह मुहूर्त अत्यंत शुभ माना जाता है।

चौरचन पूजा विधि (Chaurchan Puja Vidhi In Hindi)

  • चौरचन पूजा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद व्रत का संकल्प लें।
  • ये व्रत सुबह से शाम तक रखा जाता है।
  • शाम के समय घर के आंगन को गाय के गोबर से लीपकर अच्छे से साफ-सुथरा कर लें।
  • इसके बाद घर के आंगन में पीसे हुए चावल से रंगोली बनाएं।
  • फिर केले के पत्ते की मदद से एक गोलाकार चांद बना लें।
  • इसके बाद तरह-तरह के मीठे पकवान जैसे खीर, मिठाई, गुझिया और फल आदि भोग के रूप में चढ़ाने के लिए तैयार कर लें।
  • फिर चंद्रमा की विधि विधान पूजा करें।
  • चौरचन पूजा में दही का जरूर इस्तेमाल किया जाता है।
  • इस दिन मिट्टी के बर्तन में दही जरूर जमाया जाता है।
  • साथ ही बांस के बर्तन में खीर तैयार की जाती है। इसी खीर का चंद्र देव को भोग लगाया जाता है।

चौरचन पूजा मंत्र (Chaurchan Puja Mantra)

रोहिणीक्षत्र भाद्रशुक्ल चतुर्थी चंद्रायनमः

चौरचन पूजा के दिन चांद पूजा का समय (Chaurchan Puja Par Chand Nikalne Ka Samay)

चौरचन पूजा के दिन चांद पूजा का समय शाम 8 बजकर 16 मिनट है। इस दिन चंद्र उदय का समय सुबह 08:34 बजे और चंद्र अस्त रात 08:28 बजे होगा।

Srishti
सृष्टि author

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्... और देखें

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