अध्यात्म

बिहार के 10 प्रसिद्ध मंदिर कौन से हैं, जानें क्या है इनका महत्व और मान्यता

Bihar ke Popular Mandir: बिहार सिर्फ इतिहास और शिक्षा की धरती नहीं, बल्कि आध्यात्मिकता का भी केंद्र रहा है। यहाa भगवान बुद्ध से लेकर देवी-देवताओं की अनगिनत कथाएं जुड़ी हैं। आइए जानते हैं बिहार के 10 प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में, जहां हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

Bihar ke prasidh mandir

बिहार के प्रसिद्ध मंदिर कौन से हैं (Pic: iStock, Wiki)

Bihar ke Popular Mandir: बिहार की पावन धरा अपने में आध्यात्मिकता और ज्ञान का अपार भंडार समेटे है। यहां धर्म और संस्कृति का एक सुंदर संगम देखने में को मिलता है जिसमें अपार श्रद्धा भी है और साथ मोक्ष पाने की राह भी। बिहार में हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन के प्रमुख तीर्थ स्थल हैं। चाहे आप शक्ति उपासक हों या बुद्ध के अनुयायी, हर श्रद्धालु को बिहार में शांति और आध्यात्मिक अनुभव अवश्य मिलता है। यहां हम आपको बिहार के कुछ प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में बता रहे हैं।

बिहार के प्रसिद्ध मंदिर कौन से हैं

महाबोधि मंदिर, बोधगया (जिला गया)

यही वह पवित्र स्थान है जहां भगवान बुद्ध ने बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त किया था। गया जी का पावन धरती के पास स्थित यह जगह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है और इसकी ऊंचाई लगभग 170 फीट है। बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए यह स्थान सबसे पवित्र तीर्थ है।

महाबोधि मंदिर, बोधगया

विष्णुपद मंदिर, गया

गया जी का महत्व पितृ पक्ष में बहुत बढ़ जाता है। पिंड दान करके पितृों को मुक्ति देने का एक पवित्र स्थान है। कहा जाता है कि गया जी के विष्णुपद मंदिर में भगवान विष्णु के पदचिह्न पत्थर पर अंकित हैं। पितृ पक्ष में श्राद्ध कर्म करने के लिए गया को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इस मंदिर का निर्माण राजा राघवदेव ने 18वीं शताब्दी में करवाया था।

विष्णुपद मंदिर, गया

मुंडेश्वरी देवी मंदिर, कैमूर

यह भारत का सबसे प्राचीन जीवित मंदिर माना जाता है, लगभग 2000 साल पुराना। यहां मां मुंडेश्वरी (शक्ति) और भगवान शिव की अराधना होती है। यह मंदिर अष्टकोणीय संरचना में बना है, जो भारतीय वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है।

हरिहरनाथ मंदिर, सोनपुर (सारण)

इस प्राचीन और पौराणिक मंदिर में भगवान हरिहरनाथ (शिव-विष्णु का संयुक्त रूप)की पूजा होती है। पौराणिक कथा के अनुसार यहीं गज-ग्राह युद्ध हुआ था, जहां भगवान हरिहरनाथ ने हस्ती की रक्षा की थी। सोनपुर मेले के दौरान यहां श्रद्धालुओं का विशाल जमावड़ा लगता है।

जलमंदिर, पावापुरी (नालंदा)

यह जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर का निर्वाण स्थल है। संगमरमर से बना यह मंदिर एक सुंदर जलाशय के बीच स्थित है, जो शांति का अद्भुत अनुभव कराता है।

जलमंदिर, पावापुरी (नालंदा) (Pic: wiki)

मां ताराचंडी मंदिर, सासाराम (रोहतास)

यह स्थल देश के 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि इसी जगह पर सती के नेत्र गिरे थे। यहां मां मां ताराचंडी की पूजा होती है। यह मंदिर पहाड़ियों के बीच स्थित है, और यहां से रोहतास किला भी दिखाई देता है।

उग्रतारा मंदिर, सासाराम

महत्व: यह भी एक शक्तिपीठ है, जहां देवी उग्रतारा की पूजा की जाती है। मंदिर की प्राचीन मूर्ति को अत्यंत चमत्कारिक माना जाता है।

एकरुखे महादेव मंदिर, भागलपुर

महत्व: पौराणिक कथा के अनुसार भगवान शिव ने स्वयं यहां लिंग रूप में प्रकट होकर भक्तों को दर्शन दिए थे। सावन और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां विशेष मेले का आयोजन होता है। शिव भक्तों के बीच यह मंदिर अपना विशिष्ट स्थान भी रखता है।

पतनेश्वर नाथ मंदिर, पटना

भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर पटना के सबसे प्राचीन शिवालयों में से एक है। कहा जाता है कि बिहार की राजधानी पटना के नाम की उत्पत्ति भी पतनेश्वर नाथ मंदिर से हुई है।

पटना साहिब गुरुद्वारा

पटना साहिब गुरुद्वारा बिहार की राजधानी पटना में स्थित एक प्रमुख सिख तीर्थ स्थल है। यह स्थान दसवें सिख गुरु, गुरु गोविंद सिंह जी का जन्मस्थान है और इसे तख्त श्री हरमंदिर जी पटना साहिब के नाम से भी जाना जाता है। इस गुरुद्वारे का निर्माण महाराजा रणजीत सिंह ने 18वीं सदी में करवाया था।

बिहार के ये मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से पवित्र हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति और स्थापत्य कला की धरोहर भी हैं। एक बार यहां की यात्रा हर व्यक्ति के जीवन में आध्यात्मिकता का नया अध्याय जोड़ देती है।

लेटेस्ट न्यूज

मेधा चावला
मेधा चावला Author

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वा... और देखें

End of Article