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Bhadrapada Month Pradosh Vrat Date 2024: भाद्रपद महीने में कब- कब रखा जाएगा प्रदोष व्रत, यहां जानिए तिथि और महत्व

Bhadrapada Month Pradosh Vrat Date 2024: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का बहुत ही महत्व होता है। प्रदोष का व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है। आइए जानते हैं भादव महीने में प्रदोष का व्रत कब- कब रखा जाएगा।

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Bhadrapada Month Pradosh Vrat

Bhadrapada Month Pradosh Vrat Date 2024: प्रदोष का व्रत शिव जी की पूजा के लिए समर्पित होता है। प्रदोष व्रत के दिन माता पार्वती और शिव जी की पूजा की जाती है। प्रदोष का व्रत हर महीने में दो बार रखा जाता है। एक प्रदोष व्रत शुक्ल पक्ष और दूसरा कृष्ण पक्ष में रखा जाता है। प्रदोष का व्रत रखने से और इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से साधक को शुभ फल की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही इस दिन का व्रत रखने से साधक को संतान सुख की भी प्राप्ति होती है। प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की पूजा प्रदोष काल में की जाती है। प्रदोष व्रत करने से साधक की सारी मनोकामना की पूर्ति होती है। आइए जानते हैं भादव के महीने में कब- कब रखा जाएगा प्रदोष व्रत।

Bhadrapada Month Pradosh Vrat Date 2024 (भादव मास के प्रदोष व्रत 2024)

पहला प्रदोष व्रत 2024

भादव महीने की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 31 अगस्त 2024 को पड़ रही है। ऐसे में भाद्रपद मास का पहला प्रदोष व्रत 31 अगस्त 2024 को शनिवार के दिन रखा जाएगा। शनिवार के दिन पड़ने के कारण ये शनि प्रदोष व्रत कहलाएगा।

भादव दूसरा प्रदोष व्रत 2024

भादव महीने की शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 15 सितंबर 2024 को पड़ रही है। ऐसे में भादव महीने का दूसरा प्रदोष व्रत 15 सितंबर 2024 को रखा जाएगा। ये व्रत रविवार के दिन रखा जाएगा, इसलिए ये रवि प्रदोष व्रत कहलाएगा। इस दिन शिव जी और सूर्य देवता की पूजा की जाती है।

प्रदोष का महत्व (Pradosh Vrat Importance)

शास्त्रों में प्रदोष व्रत को बहुत ही खास माना गया है। इस व्रत के दिन देवों के देव महादेव की पूजा की जाती है। प्रदोष का व्रत करने से साधक के परिवार में सुख, समृद्धि आती है और संतान सुख की भी प्राप्ति होती है। संतान की तरक्की के लिए प्रदोष व्रत रखना उत्तम माना गया है। शिव पुराण के अनुसार प्रदोष का व्रत रखने से साधक को हर प्रकार के क्षय और रोगों से मुक्ति मिल जाती है और मृत्यु के बाद शिवलोक की प्राप्ति होती है। प्रदोष व्रत की विशेष पूजा शाम को प्रदोष काल में की जाती है।

Jayanti Jha
जयंती झा author

बिहार के मधुबनी जिले से की रहने वाली हूं, लेकिन शिक्षा की शुरुआत उत्तर प्रदेश की गजियाबाद जिले से हुई। दिल्ली विश्वविद्यायलय से हिंदी ऑनर्स से ग्रेजुए... और देखें

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