अध्यात्म

Basant Panchami Katha: बसंत पंचमी की कथा हिंदी में, पढ़ें मां सरस्वती के अवतरण की ये पौराणिक कहानी

  • Authored by: Srishti
  • Updated Jan 23, 2026, 11:13 AM IST

Basant Panchami Katha in Hindi (बसंत पंचमी की कथा): आज बसंत पंचमी के शुभ दिन पर यहां दी गई व्रत कथा का पाठ करना अनिवार्य है। ऐसा करने से मां सरस्वती ज्ञान, विद्या और कला का आशीर्वाद देती हैं। यहां से आप बसंत पंचमी की कथा, सरस्वती माता की कथा पढ़ सकते हैं।

बसंत पंचमी कथा (pc: pinterest)

बसंत पंचमी कथा (pc: pinterest)

Basant Panchami Katha in Hindi (बसंत पंचमी की कथा): बसंत पंचमी की पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन मां सरस्वती परम ब्रह्म के प्रकृति रूप में अवतरित हुई थीं। कथा के अनुसार एक दिन भगवान ब्रह्मा संसार का भ्रमण करने निकले, तो उन्हें समस्त संसार उदास नजर आया, हर तरफ घोर शांति छाई हुई थी। ये देखकर ब्रह्माजी को लगा कि संसार की रचना करते हुए शायद कोई कमी रह गई है। भगवान ब्रह्मा एक स्थान पर रुके और अपने कमंडल से जल निकालकर छिड़का। तब अलौकिक‍ ज्योति पुंज के साथ एक देवी प्रकट हुईं। देवी के हाथ में वीणा और चेहरे पर अत्यंत ही तेज झलक रहा था। ये देवी मां सरस्वती थीं। उन्होंने ब्रह्मा जी को प्रणाम किया ज‍िसके उपरांत ब्रह्माजी ने माता सरस्वती से कहा कि इस संसार में सभी लोग मूक है, ये आपसी संवाद नहीं कर सकते हैं। ये सुनकर मां सरस्वती ने पूछा कि प्रभु मेरे लिए क्या आज्ञा है? तब ब्रह्माजी ने मां सरस्वती से कहा कि वे अपनी वीणा से इन्हें ध्वनि प्रदान करें, जिससे इनके बीच संवाद हो सके और ये एक दूसरे की भावों को समझ सके। भगवान ब्रह्मा की आज्ञा का पालन करते हुए मां सरस्वती ने समस्त संसार को वाणी प्रदान की, जिसके बाद से मनुष्य‍य एक-दूसरे के विचारों को समझने लगे। मान्यताओं के अनुसार बसंत पंचमी के दिन व्रत करने वाले भक्तों को ये कथा सुनने से मां सरस्वती की असीम कृपा प्राप्त होती है और उन्‍हें जीवन में सफलता म‍िलती है।

मां सरस्वती का नामकरण

देवी ने प्रकट होकर संसार को ज्ञान, स्वर और शब्द दिए, इसलिए ब्रह्मा जी ने उन्हें 'सरस्वती' नाम दिया। देवी सरस्वती के अन्य कई नाम भी हैं। वाणी प्रदान करने के कारण उन्हें 'वाग्देवी' कहा जाता है। संगीत की उत्पत्ति के कारण उन्हें 'वीणावादिनी' कहा जाता है। जिस तिथि पर देवी सरस्वती का प्राकट्य हुआ, उस दिन माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि थी। इसी कारण हर वर्ष इस दिन को बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा जैने नामों से जाना जाता है और उत्साह के साथ इस तिथि को मनाया जाता है।

बसंत पंचमी की कथा पढ़ने के नियम

बसंत पंचमी की कथा पढ़ने से पहले स्नान करें और साफ-सुथरे पीले वस्त्र पहनें। पूजा स्थल को स्वच्छ करें, मां सरस्वती की मूर्ति या चित्र स्थापित करें और पीले फूल अर्पित करें। पुस्तक, कलम, वाद्य यंत्र, पीले फल या मिठाई रखें। कथा शुरू करने से पहले मन में संकल्प करें कि यह पाठ श्रद्धा और भक्ति से किया जा रहा है। कथा को एकाग्रता और श्रद्धा के साथ पढ़ें, बीच में बातचीत या व्याकुलता से बचें। कथा से पहले या बाद में ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। कथा पूर्ण होने पर माँ सरस्वती की आरती करें और प्रसाद वितरित करें।

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Srishti
Srishti author

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्... और देखें

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