Baglamukhi Aarti Lyrics: आज 24 अप्रैल 2026 को वैशाख शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर बगलामुखी जयंती का पावन पर्व मनाया जा रहा है, जो साधना और शक्ति उपासना के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन मां बगलामुखी की आरती का पाठ करने से भक्तों को मानसिक शांति, आत्मबल और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा का आशीर्वाद मिलता है। आरती के संपूर्ण लिरिक्स का उच्चारण करते समय साधक अपनी श्रद्धा और विश्वास के साथ देवी का स्मरण करता है, जिससे मन एकाग्र होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। धार्मिक मान्यता है कि इस विशेष दिन की गई पूजा और आरती कई गुना फलदायी होती है, विशेषकर उन लोगों के लिए जो शत्रुओं, बाधाओं या जीवन की परेशानियों से जूझ रहे हैं। मां बगलामुखी की कृपा से जीवन में स्थिरता, विजय और सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है। आगे पढ़ें मां बगलामुखी की आरती के लिरिक्स...
मां बगलामुखी की आरती - Baglamukhi Mata Ki Aarti Lyrics
जय जय श्री बगलामुखी माता, आरति करहुँ तुम्हारी।
पीत वसन तन पर तव सोहै, कुण्डल की छबि न्यारी॥
कर-कमलों में मुद्गर धारै, अस्तुति करहिं सकल नर-नारी॥
जय जय श्री बगलामुखी माता…
चम्पक माल गले लहरावे, सुर नर मुनि जय जयति उचारी॥
त्रिविध ताप मिटि जात सकल सब, भक्ति सदा तव है सुखकारी॥
जय जय श्री बगलामुखी माता…
पालत हरत सृजत तुम जग को, सब जीवन की हो रखवारी॥
मोह निशा में भ्रमत सकल जन, करहु हृदय महँ, तुम उजियारी॥
जय जय श्री बगलामुखी माता…
तिमिर नशावहु ज्ञान बढ़ावहु, अम्बे तुमही हो असुरारी॥
सन्तन को सुख देत सदा ही, सब जन की तुम प्राण पियारी॥
जय जय श्री बगलामुखी माता…
तव चरणन जो ध्यान लगावै, ताको हो सब भव-भयहारी॥
प्रेम सहित जो करहिं आरती, ते नर मोक्षधाम अधिकारी॥
जय जय श्री बगलामुखी माता...
॥ दोहा ॥
बगलामुखी की आरती, पढ़ै सुनै जो कोय।
विनती कुलपति मिश्र की, सुख-सम्पति सब होय॥
मां बगलामुखी के पूजन का महत्व
मां बगलामुखी को शत्रु नाशिनी, स्तंभन शक्ति की अधिष्ठात्री और तांत्रिक परंपरा की परम देवी के रूप में अत्यंत श्रद्धा से पूजा जाता है। उनका स्वरूप साधक को साहस, सुरक्षा और आत्मबल प्रदान करता है। मान्यता है कि मां की कृपा से शत्रुओं की नकारात्मक शक्तियां शांत हो जाती हैं और जीवन में आने वाली बाधाएं स्वतः दूर होने लगती हैं।
