अध्यात्म

'अस्सलाम वालेकुम' का क्या मतलब होता है? नहीं जानते तो आज जान लें

Assalam Walekum Meaning In Hindi: मुस्लिमों में अभिवादन के लिए अस्सलाम वालेकुम बोला जाता है। लेकिन इसका मतलब क्या होता है इस बारे में कम ही लोग जानते हैं। चलिए आपको बताते हैं अस्सलाम वालेकुम का अर्थ क्या है।

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Assalam Walekum Meaning

Assalam Walekum Meaning In Hindi: मुस्लिम लोग जब भी एक-दूसरे से मिलते हैं तो 'अस्सलाम वालेकुम' कहते हैं। जिस तरह से हिंदू धर्म में अभिवादन के लिए नमस्ते, नमस्कार या प्रणाम कहा जाता है वैसे ही इस्लाम में लोग एक-दूसरे को 'अस्सलाम वालेकुम' कहकर मिलते हैं। इस्लामिक परंपरा के अनुसार, मुस्लिम व्यक्ति जब भी किसी से मिलता है तो उसे अपना हाथ आगे बढ़ाकर और सिर झुकाकर सामने वाले को अस्सलाम वालेकुम कहना चाहिए। जिसके जवाब में सामने वाले व्यक्ति को "वालेकुम अस्सलाम" बोलना चाहिए। लेकिन इस शब्द का मतलब क्या होता है चलिए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

अस्सलाम वालेकुम का मतलब (Assalam Walekum Meaning In Hindi)

अस्सलाम वालेकुम का मतलब होता है, 'आप पर शांति हो' या आप सलामत रहें और आप पर अल्लाह की बरकत और रहमत बरकरार रहे।

अस्सलाम वालेकुम किस तरह बोला जाता है?

दुनिया के अलग- अलग देशों में अस्सलाम वालेकुम बोलने का तरीका अलग-अलग है। जैसे साऊदी अरब, ईरान, जार्डन, तुर्की, इराक, सीरिया आदि देशों में लोग हाथ मिलाने के बाद दो या तीन बार गालों को चूमकर अस्सलाम वालेकुम करते हैं। पाकिस्तान में अभिवादन करने के लिए हाथ मिलाते हैं। इंडोनेशिया में अस्सलाम वालेकुम बोलते हुए दो हाथ मिलाने का रिवाज है।

अस्सलाम वालेकुम का जवाब

अस्सलाम वालेकुम के जवाब में 'वालेकुम अस्सलाम' कहना चाहिए। इसका मतलब होता है, 'और तुम पर शांति हो' या आप भी सलामत रहें।

डिसक्लेमर- इस लेख में दी गई जानकारी मान्यताओं पर आधारित है। timesnowhindi.com इसकी सटीकता या विश्वसनीयता की पुष्टि नहीं करता है। इसलिए किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ की राय जरूर लें।

Laveena Sharma
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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