April 2026 mein pradosh vrat kab kab hai : भगवान शिव की आराधना के लिए रखा जाने वाला प्रदोष व्रत हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। यह व्रत भगवान शिव (Bhagwan Shiv) को समर्पित है। हर महीने कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को यह व्रत रखा जाता है। मान्यता है कि प्रदोष काल में शिव-पूजन करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं, मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। अप्रैल 2026 का महीना शिव भक्तों के लिए खास रहने वाला है, क्योंकि इस महीने दो प्रदोष व्रत पड़ रहे हैं। आइए जानते हैं अप्रैल में पहला प्रदोष व्रत कब है और अप्रैल 2026 का दूसरा प्रदोष व्रत किस दिन रखा जाएगा। बता दें कि अप्रैल 2026 में हिंदू कैलेंडर के अनुसार, वैशाख मास के प्रदोष व्रत रखे जाएंगे।
अप्रैल 2026 का पहला प्रदोष व्रत कब है
अप्रैल महीने का पहला प्रदोष व्रत 15 अप्रैल 2026, बुधवार को रखा जाएगा। यह कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का व्रत है, इसलिए इसे बुध प्रदोष व्रत कहा जाएगा।
धार्मिक पंचांग के अनुसार इस दिन प्रदोष काल शाम के समय माना जाता है, जब सूर्यास्त के बाद भगवान शिव की पूजा विशेष फलदायी होती है। प्रदोष पूजा का शुभ समय लगभग शाम 6:47 बजे से रात 9:00 बजे तक रहेगा। बुधवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत बुद्धि, निर्णय क्षमता और पारिवारिक शांति के लिए विशेष लाभकारी माना जाता है। शिव-पार्वती की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सामंजस्य बढ़ता है और मानसिक तनाव कम होता है।

प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा होती है
अप्रैल का दूसरा प्रदोष व्रत कब रखा जाएगा
अप्रैल 2026 का दूसरा प्रदोष व्रत 28 अप्रैल 2026, मंगलवार को पड़ेगा। यह शुक्ल पक्ष त्रयोदशी का व्रत है और मंगलवार होने के कारण इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है।
इस दिन भगवान शिव के साथ भगवान हनुमान की भी विशेष पूजा का महत्व माना जाता है। भौम प्रदोष व्रत साहस, रोग मुक्ति और बाधाओं से राहत दिलाने वाला माना जाता है। शाम के प्रदोष काल में दीप, धूप और बेलपत्र अर्पित कर शिवलिंग का अभिषेक करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
शास्त्रों के अनुसार प्रदोष काल वह समय है जब भगवान शिव कैलाश पर देवताओं के साथ आनंद तांडव करते हैं। इस दौरान की गई पूजा जल्दी फल देती है। मान्यता है कि प्रदोष व्रत रखने से -
- आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं
- विवाह एवं संतान संबंधी बाधाएं कम होती हैं
- मन की नकारात्मकता समाप्त होती है
- घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा आती है
यही वजह है कि प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित सबसे प्रभावशाली मासिक व्रतों में गिना जाता है।
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