सावधान! सूर्य ग्रहण के साथ शुरू होंगे खतरनाक अग्नि पंचक, इन कार्यों से बना लें दूरी
- Authored by: Mohit Tiwari
- Updated Feb 8, 2026, 09:30 PM IST
February 2026 Mei Panchak Kab Se Hai: फरवरी 2026 में साल का पहला सूर्य ग्रहण पड़ने जा रहा है। साल के पहले सूर्य ग्रहण के साथ ही पंचक की भी शुरुआत हो रही है। इस कारण यह समय बेहद खतरनाक माना जा रहा है। ज्योतिष के जानकारों की मानें तो यह पंचक अग्नि पंचक है, जो बेहद ही खतरनाक होता है। आइए जानते हैं कि फरवरी 2026 में पंचक कब से शुरू हो रहे हैं और इस दौरान कौन से काम नहीं करने चाहिए?
पंचक कब से लग रहे हैं?
February 2026 Mei Panchak Kab Se Hai: फरवरी 2026 का महीना धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से काफी संवेदनशील माना जा रहा है। इस महीने एक ओर सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है, वहीं दूसरी ओर अग्नि पंचक की शुरुआत भी हो रही है। यह साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण होगा। वहीं, पंचक काल को शास्त्रों में अशुभ समय माना गया है और खासकर अग्नि पंचक को सबसे अधिक प्रभावशाली और सावधानी वाला पंचक बताया गया है। ऐसे में आइए जानते हैं कि फरवरी 2026 में पंचक कब से कब तक रहेगा और इस दौरान किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
फरवरी 2026 में पंचक काल कब से शुरू होगा?
पंचांग के अनुसार फरवरी महीने में अग्नि पंचक की शुरुआत 17 फरवरी 2026 को सुबह 9 बजकर 5 मिनट से होगी। यह पंचक पूरे पांच दिनों तक रहेगा और 21 फरवरी 2026 को शाम 7 बजकर 7 मिनट पर समाप्त होगा। खास बात यह है कि 17 फरवरी को ही सूर्य ग्रहण भी लग रहा है, जिससे इस दिन का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व और अधिक बढ़ जाता है। ग्रहण और पंचक का एक साथ होना समय को और भी संवेदनशील बना देता है।
पंचक क्या होते हैं और क्यों लगते हैं?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब चंद्रमा धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्रों में गोचर करता है, तब पंचक लगते हैं। यह समय कुल पांच नक्षत्रों का होता है, इसलिए इसे पंचक कहा जाता है।
मान्यता है कि पंचक काल में किए गए कुछ कार्य अशुभ फल देते हैं, क्योंकि इस दौरान चंद्रमा की स्थिति स्थिरता नहीं देती है। अलग-अलग वार से शुरू होने वाले पंचक के अलग-अलग नाम और प्रभाव बताए गए हैं।
अग्नि पंचक क्यों माना जाता है सबसे खतरनाक?
जब पंचक की शुरुआत मंगलवार से होती है, तो उसे अग्नि पंचक कहा जाता है। अग्नि पंचक को इसलिए अधिक खतरनाक माना जाता है, क्योंकि इसका संबंध अग्नि तत्व से होता है। इस दौरान आग, बिजली, विस्फोट, दुर्घटना और नुकसान की आशंका अधिक मानी जाती है। शास्त्रों में बताया गया है कि अग्नि पंचक के दौरान थोड़ी सी लापरवाही भी बड़ा नुकसान करा सकती है, इसलिए इस समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
अग्नि पंचक के दौरान किन कामों से बचना चाहिए?
अग्नि पंचक के दौरान आग से जुड़े किसी भी काम से दूरी बनाकर रखना चाहिए। इस समय गैस सिलेंडर, पेट्रोल, डीजल, लकड़ी या अन्य ज्वलनशील वस्तुओं का अधिक भंडारण नहीं करना चाहिए। इस काल में नया व्यवसाय, नया प्रोजेक्ट या किसी बड़े काम की शुरुआत करना भी शुभ नहीं माना जाता। घर की छत डलवाना, निर्माण से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य और हवन-यज्ञ जैसे धार्मिक अनुष्ठान भी पंचक में वर्जित बताए गए हैं। इसके अलावा पंचक काल में दक्षिण दिशा की यात्रा से भी बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इसे दुर्घटना और बाधा का कारण माना गया है।
सूर्य ग्रहण और अग्नि पंचक का संयोग क्यों है खतरनाक?
17 फरवरी 2026 को सूर्य ग्रहण और अग्नि पंचक का एक साथ होना इस दिन को और भी संवेदनशील बना देता है। ग्रहण काल में वैसे ही शुभ कार्य नहीं किए जाते और जब उसी दिन पंचक भी लग जाए, तो इसका प्रभाव और गहरा हो जाता है। ऐसे में इस दिन संयम, सावधानी और नियमों का पालन करना बेहद जरूरी माना जाता है।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी पंचांग और ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
