Varuthini Ekadashi: एकादशी व्रत हिंदू धर्म में बहुत खास माना जाता है। 13 अप्रैल 2026 यानी आज वरुथिनी एकादशी है। इस दिन लोग व्रत रखते हैं, पूजा करते हैं और अपने जीवन में सुख-शांति की कामना करते हैं। इसे भगवान विष्णु की कृपा पाने का आसान और पवित्र तरीका माना जाता है। व्रत (Ekadashi ke niyam) सही तरीके से किया जाए, इसके लिए कुछ जरूरी नियमों का पालन करना बेहद जरूरी होता है जिसे यहां डिटेल में बताया गया है।
एकादशी व्रत के मुख्य नियम
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
- इसके बाद भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करें।
- पूजा में तुलसी माता को विशेष महत्व दिया जाता है, इसलिए उन्हें जल अर्पित जरूर करें।
- 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें या विष्णु चालीसा का पाठ करें।
- अगर संभव हो तो दिनभर भगवान का ध्यान और भजन-कीर्तन करें।
सात्विक आहार
- इस दिन सात्विक भोजन ही ग्रहण करें।
- आप फल, दूध, सूखे मेवे और कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बने व्यंजन खा सकते हैं।
- अगर पूरा उपवास रखना संभव ना हो, तो फलाहार कर सकते हैं, लेकिन अनाज का सेवन ना करें।
- व्रत के दौरान सेंधा नमक का ही इस्तेमाल किया जाता है।
क्या आज चावल खा सकते हैं?
एकादशी के दिन चावल खाना सख्त मना होता है। मान्यता है कि चावल में अशुद्ध तत्व होते हैं जो व्रत की पवित्रता को प्रभावित करते हैं। इसलिए इस दिन चावल, गेहूं और दालों से पूरी तरह परहेज करें।
क्या व्रत में कॉफी पी सकते हैं
व्रत में कॉफी पीने से बचना चाहिए। हालांकि, अगर आप फलाहार कर रहे हैं और बिना चाय-कॉफी के रहना मुश्किल है, तो हल्की मात्रा में दूध वाली कॉफी ले सकते हैं।
क्या नहीं करना चाहिए
- इस दिन चावल, गेहूं, दालें, प्याज, लहसुन और नॉन-वेज का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए।
- दिन में सोने से भी बचें क्योंकि इससे आलस्य बढ़ता है और व्रत का फल कम हो जाता है।
- किसी से वाद-विवाद ना करें और गुस्से पर काबू रखें।
पारण का नियम
व्रत खोलने यानी पारण का भी अपना महत्व होता है। वरुथिनी एकादशी का पारण 14 अप्रैल को सुबह 06:54 से 08:31 बजे के बीच करना शुभ माना गया है। इस दौरान तुलसी दल और जल ग्रहण करके व्रत खोला जाता है। अगर इन नियमों का सही तरीके से पालन किया जाए, तो एकादशी व्रत ना सिर्फ धार्मिक रूप से फलदायी होता है, बल्कि मानसिक और शारीरिक रूप से भी लाभ पहुंचाता है।
