Aaj Ka Panchang 2 April 2025 (आज का पंचांग 2 अप्रैल 2025): हिंदू धर्म में प्रत्येक दिन की एक विशेष आध्यात्मिक और ज्योतिषीय मान्यता होती है। बुधवार का संबंध भगवान गणेश और बुध ग्रह से माना जाता है। ये दिन विशेष रूप से व्यापार, शिक्षा, तर्क शक्ति और संचार से जुड़े कार्यों के लिए शुभ होता है। वहीं, नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा की आराधना के लिए समर्पित है, जिसमें भक्त नौ दिनों तक उपवास, पूजा और साधना करते हैं। जब नवरात्रि का संयोग बुधवार के दिन से होता है, तो इसे अत्यंत ही शुभ माना जाता है। ज्योतिषीय दृष्टि से ये संयोग साधकों और भक्तों के लिए विशेष फलदायी होता है क्योंकि बुध ग्रह ज्ञान, तर्क और चातुर्य का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि नवरात्रि साधना और आत्म शुद्धि का पर्व है। इस दिन से नवरात्रि का प्रारंभ होने पर साधक की बुद्धि और आध्यात्मिक ऊर्जा अधिक प्रभावी होती है, जिससे सिद्धि प्राप्ति में सहायता मिलती है। इस संयोग में व्रत रखने, दान करने और मंत्र जाप करने से व्यक्ति को मानसिक शांति, आर्थिक समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। शुभ मुहूर्त, राहुकाल, दिशा शूल और तिथि से जुड़ी अन्य जानकारियों के बारे में जानने के लिए पढ़ें 2 अप्रैल 2025 का पंचांग।
आज का पंचांग 2 अप्रैल 2025 (Aaj Ka Panchang 2 April 2025)
- संवत - पिङ्गला विक्रम संवत 2082
- माह - चैत्र, कृष्ण पक्ष,
- तिथि - चैत्र माह शुक्ल पक्ष पंचमी
- पर्व - नवरात्रि
- दिवस - बुधवार
- सूर्योदय - 06:13 ए.एम सूर्यास्त - 6:39 पी.एम
- नक्षत्र - कृतिका 08:49 ए.एम तक फिर रोहिणी
- चन्द्र राशि - वृष, स्वामी ग्रह-शुक्र
- सूर्य राशि - मीन, स्वामी ग्रह-गुरु
- करण - बव 01:08 पी.एम तक फिर बालव
- योग - आयुष्मान 09:49 ए.एम तक फिर प्रीति
आज के शुभ मुहूर्त
- अभिजीत - नहीं है।
- विजय मुहूर्त - 02:23 पी.एम से 03:26 पी.एम तक
- गोधुली मुहूर्त - 06:22 पी.एम से 07:22 पी.एम तक
- ब्रम्ह मुहूर्त - 4:03 ए.एम से 05:09 ए.एम तक
- अमृत काल - 06:03 ए.एम से 07:44 ए.एम तक
- निशीथ काल मुहूर्त - रात 11:43 से 12:25 तक
- संध्या पूजन - 06:30 पी.एम से 07:05 पी.एम तक
दिशा शूल - उत्तर दिशा। इस दिशा में यात्रा से बचें। दिशा शूल के दिन उस दिशा की यात्रा करने से बचते हैं, यदि आवश्यक है तो एक दिन पहले प्रस्थान निकालकर फिर उसको लेकर यात्रा करें।
अशुभ मुहूर्त - राहुकाल - सायंकाल 12 बजे से 01:30 बजे तक।
क्या करें - चैत्र नवरात्रि का पवित्र समय चल रहा है। ये व्रत, उपासना व शक्ति पूजा का पुण्य काल है। नित्यप्रतिदिन दुर्गासप्तशती का पाठ करें। माता जगदंबा को समर्पित ये महान उपवास शक्ति उपासना का पुनीत अवसर है। मन में हर पल माता दुर्गा के किसी भी नाम का जप करें। नियम पूर्वक व्रत व दान-पुण्य करना बहुत फलित होता है। शिव मंदिर परिसर में बेल, बरगद ,आम, पाकड़ व पीपल का पेड़ लगाएं। अपने घर के मंदिर में अखण्ड दीप जलाइए। दुर्गासप्तशती का नित्य पाठ करें। सिद्धिकुंजिकास्तोत्र का 09 पाठ अवश्य करें। माता दुर्गा के 32 व 108 नामों का जप करें। सप्तश्लोकी दुर्गा का नियमित 09 पाठ करें। ब्रम्ह मुहूर्त में श्री राम रक्षा स्तोत्र का पाठ बहुत फलदायी है। कलश स्थापना वाले घरों में नित्य दुर्गासप्तशती का पाठ व अखण्ड दीपक जलाना श्रेयस्कर है। माता दुर्गा की भक्ति प्राप्त करने के लिए सिद्धिकुंजिकास्तोत्र का पाठ अत्यंत आवश्यक है। इस समय मन का सात्विक होना बहुत आवश्यक है।
क्या न करें - मन के अंदर वासना, क्रोध व अहंकार का समावेश मत हो।
